विस्तृत उत्तर
हंस मंत्र योग और तंत्र परंपरा में श्वास से जुड़ा एक गूढ़ मंत्र है। हं और स ध्वनियाँ प्राण के आवागमन से जोड़ी जाती हैं। कुछ परंपराओं में हं को श्वास छोड़ने और स को श्वास लेने से समझाया जाता है। इसका गहरा अर्थ यह है कि जीव हर श्वास में अपनी आत्मा और परमात्मा के संबंध का स्मरण कर सकता है। जब हंस मंत्र की साधना गहराती है, तो वह सोहम भाव में परिणत होती है: वह मैं हूँ। यह भाव हंस अवतार के अद्वैत उपदेश से भी जुड़ता है, जहाँ आत्मा को शुद्ध साक्षी चेतना बताया गया है।
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