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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — 13772 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 13772 प्रश्न

लोक

ध्रुवलोक से महर्लोक कितनी दूरी पर है?

महर्लोक ध्रुवलोक से एक करोड़ योजन (1,00,00,000 योजन) ऊपर स्थित है। यह इतनी ऊँचाई पर है कि वहाँ भौतिक वायुमंडल और गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव नहीं होता।

ध्रुवलोकमहर्लोकदूरी
लोक

पिण्ड-ब्रह्माण्ड सिद्धांत क्या है?

पिण्ड-ब्रह्माण्ड सिद्धांत कहता है — जो ब्रह्माण्ड में है वही मानव शरीर में भी है। देवता, लोक और नक्षत्र सभी शरीर के विभिन्न अंगों में सूक्ष्म रूप में विद्यमान हैं।

पिण्ड-ब्रह्माण्डसिद्धांतगरुड़ पुराण
लोक

महर्लोक को ग्रीवा (गर्दन) क्यों कहते हैं?

जैसे गर्दन धड़ और सिर को जोड़ती है वैसे ही महर्लोक भौतिक त्रैलोक्य और आध्यात्मिक अविनाशी लोकों के बीच सेतु है। इसीलिए विराट पुरुष में इसे ग्रीवा कहते हैं।

महर्लोकग्रीवासेतु
लोक

विराट पुरुष के शरीर में महर्लोक कहाँ है?

भागवत (२.१.२८) के अनुसार विराट पुरुष के शरीर में महर्लोक ग्रीवा (गर्दन) के स्थान पर है। स्वर्लोक छाती पर, जनलोक मुख पर और सत्यलोक सिर पर है।

विराट पुरुषमहर्लोकग्रीवा
लोक

मार्कण्डेय मुनि का महर्लोक से क्या संबंध है?

मार्कण्डेय मुनि अपनी कठोर तपस्या के प्रभाव से महर्लोक के सम्मानित निवासी माने गए हैं। उनकी असीम तपस्या और वैराग्य उन्हें इस दुर्लभ लोक का अधिकारी बनाती है।

मार्कण्डेयमहर्लोकतपस्या
लोक

मन्वन्तर के बाद ऋषि महर्लोक में क्यों आते हैं?

एक मन्वन्तर के बाद सेवानिवृत्त इन्द्र, सप्तर्षि और मनु विश्राम और परब्रह्म-ध्यान के लिए महर्लोक में आते हैं और सत्यलोक की प्रतीक्षा करते हैं।

मन्वन्तरमहर्लोकसप्तर्षि
लोक

वानप्रस्थी को महर्लोक कैसे मिलता है?

वानप्रस्थी जो वन में कठोर तपस्या करे, कंद-मूल पर निर्वाह करे और देह को अस्थि-पंजर बना ले, वह मृत्यु के बाद महर्लोक प्राप्त करता है।

वानप्रस्थीमहर्लोकतपस्या
लोक

ब्रह्मचारी को महर्लोक क्यों मिलता है?

जो विद्यार्थी आजीवन अखंड ब्रह्मचर्य पालन करे, गहन वेदाध्ययन करे और बिना सांसारिक इच्छा के गुरु में समर्पित रहे, वह मृत्यु के बाद सीधे महर्लोक प्राप्त करता है।

ब्रह्मचारीमहर्लोकअखंड ब्रह्मचर्य
लोक

महर्लोक के अधिपति देव कौन हैं?

महर्लोक के अधिपति यज्ञेश्वर हैं जो स्वयं भगवान विष्णु का यज्ञ-स्वरूप है। यज्ञो वै विष्णुः — यज्ञ और विष्णु एक ही हैं।

महर्लोकयज्ञेश्वरअधिपति
लोक

महर्लोक में कौन-कौन से ऋषि रहते हैं?

महर्लोक में महर्षि भृगु, मार्कण्डेय मुनि, भृगु वंश के ऋषि, सिद्ध योगी, नैष्ठिक ब्रह्मचारी और मन्वन्तर के सेवानिवृत्त ऋषि रहते हैं।

महर्लोकऋषिभृगु
लोक

महर्षि भृगु का महर्लोक से क्या संबंध है?

महर्षि भृगु ब्रह्मा के मानस पुत्र और महर्लोक के प्रमुख निवासी हैं। नैमित्तिक प्रलय में वे यहाँ से जनलोक जाते हैं और नई सृष्टि पर पुनः लौट आते हैं।

महर्षि भृगुमहर्लोकप्रजापति
लोक

महर्लोक में कौन से गुण की प्रधानता है?

महर्लोक में विशुद्ध सत्त्वगुण की पूर्ण प्रधानता है। रजोगुण और तमोगुण का यहाँ प्रवेश नहीं। इसीलिए यहाँ रोग, शोक, भूख और क्रोध नहीं होते।

महर्लोकसत्त्वगुणरजोगुण
लोक

महर्लोक का वातावरण कैसा है?

महर्लोक का वातावरण तपस्या, वैराग्य और यज्ञीय ऊर्जा से स्पंदित है। यहाँ विशुद्ध सत्त्वगुण की प्रधानता है। रोग, शोक, थकावट और भूख का पूर्णतः अभाव है।

महर्लोकवातावरणतपस्या
लोक

महर्लोक स्वर्गलोक से कैसे अलग है?

स्वर्गलोक भौतिक भोग का स्थान है जहाँ पुण्य क्षीण होने पर वापसी होती है। महर्लोक विशुद्ध तपस्या और सत्त्वगुण का लोक है जहाँ एक पूरा कल्प रहा जा सकता है।

महर्लोकस्वर्गलोकअंतर
लोक

महर्लोक के निवासियों की आयु कितनी होती है?

महर्लोक के निवासियों की आयु एक पूर्ण कल्प (ब्रह्मा का एक दिन = 4 अरब 32 करोड़ मानवीय वर्ष) होती है। इतने समय तक वे बिना किसी कष्ट के समाधि में रहते हैं।

महर्लोकआयुकल्प
लोक

महर्लोक में निवासी भोजन कैसे करते हैं?

महर्लोक के निवासी अन्न-जल पर निर्भर नहीं। वे योग-अग्नि और परब्रह्म के ध्यान से ही पोषण प्राप्त करते हैं। यहाँ भूख का पूर्णतः अभाव है।

महर्लोकभोजनयोग-अग्नि
लोक

महर्लोक में प्रकाश का स्रोत क्या है?

महर्लोक में भौतिक सूर्य का प्रकाश नहीं होता। यहाँ ऋषियों और सिद्ध योगियों का आन्तरिक तपोबल और दैवीय प्रकाश ही प्रकाश का स्रोत है।

महर्लोकप्रकाशतपोबल
लोक

महर्लोक में रोग, बुढ़ापा और भूख क्यों नहीं होती?

महर्लोक विशुद्ध सत्त्वगुण से आच्छादित है जहाँ रजोगुण और तमोगुण का प्रवेश नहीं। इसलिए यहाँ रोग, बुढ़ापा, भूख, थकावट और क्रोध का पूर्णतः अभाव है।

महर्लोकरोगबुढ़ापा
लोक

महर्लोक किसका निवास स्थान है?

महर्लोक में महर्षि भृगु जैसे महान प्रजापति, पितृगण, सिद्ध योगी, नैष्ठिक ब्रह्मचारी और मार्कण्डेय मुनि जैसी महान आत्माएं निवास करती हैं।

महर्लोकनिवासीभृगु
लोक

त्रैलोक्य और महर्लोक में क्या अंतर है?

त्रैलोक्य (भूः, भुवः, स्वः) कृतक अर्थात विनाशशील है और सकाम कर्मों का फल-भोग क्षेत्र है। महर्लोक कृतकाकृतक है — आंशिक रूप से अविनाशी और विशुद्ध तपोमयी लोक।

त्रैलोक्यमहर्लोककृतक
लोक

महर्लोक को महः व्याहृति क्यों कहते हैं?

वैदिक सात व्याहृतियों में महः महर्लोक का प्रतीक है। भूः, भुवः, स्वः के बाद महः भौतिक त्रैलोक्य से पहली आध्यात्मिक भूमि का बोध कराता है।

महर्लोकमहःव्याहृति
लोक

महर्लोक के नीचे कौन से लोक हैं?

महर्लोक के नीचे त्रैलोक्य है — भूर्लोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक। ये तीनों कृतक अर्थात विनाशशील लोक हैं जो नैमित्तिक प्रलय में नष्ट हो जाते हैं।

महर्लोकस्वर्लोकभुवर्लोक
लोक

महर्लोक के ऊपर कौन से लोक हैं?

महर्लोक के ऊपर जनलोक, तपोलोक और सत्यलोक (ब्रह्मलोक) हैं। ये तीनों अकृतक अर्थात नित्य-अविनाशी लोक हैं।

महर्लोकजनलोकतपोलोक
लोक

महर्लोक ब्रह्मांड के 14 लोकों में कहाँ है?

महर्लोक सात ऊर्ध्व लोकों में चौथे स्थान पर है। यह स्वर्लोक के ऊपर और जनलोक के नीचे है। वैदिक व्याहृतियों में इसे महः कहते हैं।

महर्लोक14 लोकचतुर्थ

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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