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गरुड़ पुराण प्रश्नोत्तरी — 591 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित गरुड़ पुराण विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 591 प्रश्न

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प्रेत योनि क्या है?

प्रेत योनि वह अवस्था है जिसमें शरीर छोड़ चुकी आत्मा नई योनि या पितृलोक न पाकर वायव्य सूक्ष्म देह में भूख-प्यास से भटकती रहती है।

प्रेत योनिगरुड़ पुराणसूक्ष्म शरीर
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यमलोक और कर्म-विपाक से जीवन को क्या सीख मिलती है?

यमलोक सिखाता है कि कोई कर्म छिपता नहीं; पाप का फल नरक, योनियों और रोगों में मिलता है, जबकि धर्म और भक्ति श्रेष्ठ गति देते हैं।

यमलोककर्म विपाकजीवन शिक्षा
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यमपुरी का दक्षिण द्वार किसके लिए है?

दक्षिण द्वार पापियों के लिए है, जहाँ से झूठ, परस्त्रीगमन, भ्रूणहत्या और अन्य पाप करने वालों को यमदूत ले जाते हैं।

यमपुरी दक्षिण द्वारपापी आत्मायमलोक
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यमपुरी के चार द्वार कौन-कौन से हैं?

यमपुरी के चार द्वार हैं: दक्षिण द्वार, पश्चिम द्वार, उत्तर द्वार और पूर्व द्वार। प्रवेश कर्मों के आधार पर होता है।

यमपुरीचार द्वारयमलोक
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वैतरणी नदी पार करने में गोदान कैसे सहायक होता है?

गोदान करने वाला जीव वैतरणी नदी को गाय की पूंछ पकड़कर बिना कष्ट पार कर सकता है।

गोदानवैतरणी नदीयमलोक
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वैतरणी नदी इतनी भयानक क्यों है?

वैतरणी भयानक है क्योंकि उसमें जल नहीं, उबलता रक्त, पीब, मज्जा, मूत्र और हड्डियाँ बहती हैं तथा यमदूत पापियों को उसमें धकेलते हैं।

वैतरणी नदीभयानक नदीयमलोक
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वैतरणी नदी क्या है?

वैतरणी यमलोक के मार्ग की १०० योजन चौड़ी भयंकर नदी है, जिसमें पापियों के लिए रक्त, पीब, मूत्र और हड्डियाँ बहती हैं।

वैतरणी नदीयमलोकगरुड़ पुराण
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यममार्ग में पिंडदान न होने पर आत्मा को क्या कष्ट होता है?

पिंडदान न होने पर आत्मा भूख-प्यास से तड़पती है, विलाप करती है और अपने सांसारिक मोह पर पश्चाताप करती है।

पिंडदानयममार्गआत्मा कष्ट
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विचित्रभवन में आत्मा का अनुभव कैसा होता है?

विचित्रभवन यममार्ग का एक नगर है, जहाँ राजा विचित्र है और आत्मा अपनी लंबी कर्म-यात्रा में आगे बढ़ती है।

विचित्रभवनयममार्गगरुड़ पुराण
लोक

यममार्ग के 16 नगर कौन-कौन से हैं?

यममार्ग के 16 नगर हैं: सौम्यपुर, सौरिपुर, नगेन्द्रभवन, गंधर्वपुर, शैलागम, क्रौंचपुर, क्रूरपुर, विचित्रभवन, बह्वापद, दुःखदपुर, नानाक्रन्दपुर, सुतप्तभवन, रौद्रपुर, पयोवर्षणपुर, शीताढ्यपुर और बहुभीतिपुर।

यममार्ग 16 नगरगरुड़ पुराणसौम्यपुर
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यममार्ग में श्राद्ध और पिंडदान का क्या महत्व है?

यममार्ग में पिंडदान आत्मा को नगरों में विश्राम और पोषण देता है; पिंडदान न होने पर आत्मा भूख-प्यास से तड़पती है।

श्राद्धपिंडदानयममार्ग
लोक

यममार्ग में आत्मा को कौन-कौन से कष्ट होते हैं?

यममार्ग में आत्मा को तपती रेत, भूख-प्यास, हिंसक जीवों की पीड़ा, यमदूतों के कोड़े और परिवार-वियोग का दुख सहना पड़ता है।

यममार्ग कष्टपापी आत्मागरुड़ पुराण
लोक

यममार्ग पापी आत्मा के लिए इतना कठिन क्यों होता है?

यममार्ग पापी आत्मा के लिए इसलिए कठिन है क्योंकि वहाँ तपती बालू, भूख-प्यास, अंधकार, हिंसक जीव और यमदूतों के कोड़े मिलते हैं।

यममार्गपापी आत्मायमदूत
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आत्मा यमलोक तक कितने दिनों में पहुँचती है?

आत्मा यमलोक तक ३४८ दिनों में पहुँचती है और प्रतिदिन लगभग २००.५ योजन चलती है।

आत्मा यात्रायमलोक348 दिन
लोक

यममार्ग की दूरी 86,000 योजन क्यों बताई गई है?

गरुड़ पुराण में मृत्युलोक से यमलोक की दूरी ८६,००० योजन बताई गई है, इसलिए यममार्ग इतना लंबा माना गया है।

यममार्ग दूरी86000 योजनगरुड़ पुराण
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यमलोक तक की यात्रा कितनी लंबी है?

यमलोक तक की यात्रा ८६,००० योजन लंबी है और आत्मा इसे ३४८ दिनों में तय करती है।

यमलोक यात्रा86000 योजन348 दिन
लोक

यममार्ग क्या है?

यममार्ग मृत्यु के बाद आत्मा की यमलोक तक ८६,००० योजन लंबी कठिन यात्रा का मार्ग है।

यममार्गयमलोकगरुड़ पुराण
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पापी आत्मा यमदूतों को देखकर क्यों डरती है?

पापी आत्मा यमदूतों के विकराल रूप, काल-पाश, त्रिशूल और दंड को देखकर भय से कांप उठती है।

पापी आत्मायमदूतमृत्यु
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मृत्यु के समय पापी को यमदूत कैसे दिखाई देते हैं?

पापी को मृत्यु के समय विकराल, लाल आँखों वाले, भयानक मुख वाले यमदूत दिखाई देते हैं, जिन्हें देखकर वह भय से कांप उठता है।

मृत्यु समययमदूतपापी आत्मा
लोक

यमदूतों का स्वरूप कैसा बताया गया है?

यमदूत विकराल, लाल आँखों वाले, भयानक मुख वाले, काल-पाश, मुद्गर, त्रिशूल और कोड़े धारण किए हुए बताए गए हैं।

यमदूत स्वरूपगरुड़ पुराणकाल पाश
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श्रवण देवों की उत्पत्ति कैसे हुई?

ब्रह्मा जी ने लोक-व्यवहार का सूक्ष्म ज्ञान रखने के लिए अपनी तपस्या से तेजस्वी और विशाल नेत्रों वाले श्रवण देव उत्पन्न किए।

श्रवण देवउत्पत्तिब्रह्मा
लोक

चित्रगुप्त की उत्पत्ति कैसे हुई?

चित्रगुप्त ब्रह्मा जी की १००० वर्षों की तपस्या से उनकी काया से प्रकट हुए, इसलिए वे कायस्थ कहलाए।

चित्रगुप्त उत्पत्तिब्रह्माकायस्थ
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यमराज की सभा में पुण्यात्माओं का स्वागत कैसे होता है?

पुण्यात्मा के आने पर धर्मराज स्वयं आसन से उठकर स्वागत करते हैं और उसे सम्मानपूर्वक सभा में स्थान देते हैं।

पुण्यात्मायमराज सभाधर्मराज
लोक

यमराज की सभा कैसी है?

यमराज की सभा दिव्य, भव्य और विस्तृत है, जहाँ मुनि, सिद्ध, गंधर्व, देवता और पितृगण उपस्थित रहते हैं।

यमराज सभायमलोकगरुड़ पुराण

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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