विस्तृत उत्तर
यमराज का न्यायालय या उनकी सभा कोई अंधकारमय या डरावना स्थान नहीं है, अपितु यह देवलोक की सभाओं के समान ही अत्यंत भव्य और विस्तृत है। जब कोई पुण्यवान आत्मा यमलोक पहुँचती है, तो वह देखती है कि यमराज की सभा में चारों ओर दिव्य प्रकाश फैला हुआ है। इस सभा में अनेक मुनीश्वर, सिद्ध योगी, गंधर्व और देवतागण उपस्थित रहते हैं। सभा में पितृलोक के अधिपति अग्निष्वात्त आदि पितृगण भी विराजमान होते हैं, जो अपने वंशजों के कर्मों का अवलोकन करते हैं। जब धर्मराज अपने सिंहासन पर आसीन होते हैं, तो गंधर्व उनका यशोगान करते हैं और अप्सराएँ नृत्य करती हैं।
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