ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

पूर्वभाग अध्याय 8 प्रश्नोत्तरी — 47 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित पूर्वभाग अध्याय 8 विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 47 प्रश्न

योगसिद्धि

योग साधना के विघ्न कैसे दूर होते हैं?

योग-साधना के विघ्न निरंतर अभ्यास और गुरु के सान्निध्य से दूर होते हैं।

योग साधनाविघ्नअभ्यास
योगसिद्धि

योगसिद्धि जल्दी या देर से क्यों मिलती है?

पूर्वजन्म का योगाभ्यासी साधक योगसिद्धि जल्दी पाता है, नवीन साधक को विलम्ब से प्राप्त होती है।

योगसिद्धिपूर्वजन्मयोगाभ्यास
कुम्भक और ऐक्य

धारणा, ध्यान और समाधि की गणना कैसे बताई गई है?

बारह प्राणायामों की एक धारणा, बारह धारणाओं का एक ध्यान और बारह ध्यानों की एक समाधि कही गई है।

धारणाध्यानसमाधि
कुम्भक और ऐक्य

ईश्वर और जीव का ऐक्य कैसे प्राप्त होता है?

केवल कुम्भक में समरस होकर हृदय में शिव का ध्यान करने से साधक ईश्वर और जीव के ऐक्य को प्राप्त करता है।

ईश्वर जीव ऐक्यसमरसताकुम्भक
कुम्भक और ऐक्य

कुम्भक के साथ शिव ध्यान कैसे किया जाता है?

सुषुम्णा मार्ग से 12, 24 और 36 मात्रात्मक कुम्भक द्वारा शंकर का ध्यान करना बताया गया है।

कुम्भकमन्द कुम्भकमध्यम कुम्भक
शिव ध्यान

शिव का ध्यान करते समय उनका स्वरूप कैसा माना गया है?

शिव को निर्मल, अवयवरहित, ब्रह्मरूप, शान्त, ज्ञानस्वरूप, अनिर्देश्य, सूक्ष्म, मोक्षस्वरूप, अमृतस्वरूप और परात्पर माना गया है।

शिव स्वरूपनिर्मलब्रह्मरूप
शिव ध्यान

नाभि में सदाशिव का ध्यान कैसे किया जाता है?

नाभि के नीचे कमल में अग्नि, चन्द्र और सूर्य मण्डल तथा धर्म, ज्ञान, वैराग्य, ऐश्वर्य की कल्पना करके सदाशिव का ध्यान किया जाता है।

नाभिसदाशिवअग्निमण्डल
शिव ध्यान

हृदयकमल में शिव का ध्यान कैसे करना चाहिए?

हृदयकमल की कर्णिका में दीपशिखा जैसी आकृति वाले ओंकार नामक परमात्मा का ध्यान करना चाहिए।

हृदयकमलशिव ध्यानदीपशिखा
शिव ध्यान

शिव ध्यान शरीर के किन स्थानों में किया जाता है?

शिव ध्यान हृदय, नाभि, कण्ठ, भ्रूमध्य, ललाट और मस्तक जैसे स्थानों में बताया गया है।

शिव ध्यानहृदयनाभि
योग अभ्यास

योग में बैठने और दृष्टि रखने का तरीका क्या बताया गया है?

योगी को दृढ़ आसन लगाकर मुख बंद, सिर ऊँचा, दाँत अलग, दृष्टि रोककर उन्मीलित नेत्रों से नासिकाग्र पर दृष्टि रखनी चाहिए।

आसननासिकाग्र दृष्टिस्वस्तिक आसन
योग अभ्यास

योग शुरू करने से पहले किसे प्रणाम करना चाहिए?

योग शुरू करने से पहले गुरु, शिव, पार्वती, गणेश और शिष्यों सहित योगीश्वरों को प्रणाम करना चाहिए।

योग आरम्भगुरु प्रणामशिव
योग अभ्यास

योग साधना के लिए कैसी जगह अच्छी होती है?

योग साधना के लिये गुप्त, पवित्र, रमणीक, एकान्त, जन्तुरहित, शिवक्षेत्र, गुफा, वन या स्वच्छ सुगन्धित स्थान अच्छा बताया गया है।

योग स्थानएकान्तपवित्र स्थान
योग अभ्यास

योग अभ्यास किन जगहों पर नहीं करना चाहिए?

अग्नि, जल, श्मशान, चौराहे, शोरगुल, डरावने, अपवित्र, जन्तुयुक्त और देह-बाधा देने वाले स्थानों पर योग नहीं करना चाहिए।

योग स्थानवर्जित स्थानश्मशान
योग अभ्यास

योगी को पाप, विषय और काम-क्रोध कैसे दूर करने चाहिए?

योगी को प्राणायाम से दोष, धारणा से पाप, प्रत्याहार से विषय, ध्यान से अनीश्वर गुण और समाधि से बुद्धि की वृद्धि करनी चाहिए।

योगीपाप दहनप्रत्याहार
बुद्धि और प्रसाद

बुद्धि के अलग-अलग नाम क्यों बताए गए हैं?

बुद्धि के नाम उसके कार्य और स्वरूप के अनुसार बताए गए हैं, जैसे मनन करने से मन, स्मरण करने से स्मृति और जानने से संवित्।

बुद्धिमहत्तत्त्वप्रज्ञा
दस वायु

नाग, कूर्म, कृकल, देवदत्त और धनंजय वायु क्या करते हैं?

नाग डकार में, कूर्म नेत्र-उन्मीलन में, कृकल छींक में, देवदत्त जम्हाई में और धनंजय महाघोष में क्रियाशील बताया गया है।

नागकूर्मकृकल
दस वायु

पांच मुख्य वायु शरीर में क्या काम करती हैं?

प्राण गति करता है, अपान आहार को नीचे ले जाता है, व्यान सभी अंगों में व्याप्त है, उदान मर्मों में उद्वेजन करता है और समान शरीर में समता रखता है।

पांच वायुप्राणअपान
दस वायु

शरीर की दस वायु कौन सी हैं?

दस वायु हैं: प्राण, अपान, समान, उदान, व्यान, नाग, कूर्म, कृकल, देवदत्त और धनंजय।

दस वायुप्राणअपान
प्राणायाम सिद्धि

प्राणायाम से कौन सी चार सिद्धियाँ मिलती हैं?

प्राणायाम से शान्ति, प्रशान्त, दीप्ति और प्रसाद नामक चार अवस्थाएँ बताई गई हैं।

शान्तिप्रशान्तदीप्ति
प्राणायाम

प्राणायाम से मन, वचन और कर्म के दोष कैसे मिटते हैं?

सतत अभ्यास से प्राणायाम मन, वचन और कर्म से उत्पन्न दोषों को नष्ट करता है और देह की रक्षा करता है।

प्राणायामदोष नाशमन
प्राणायाम

प्राणवायु को वश में कैसे किया जाता है?

नियमपूर्वक अभ्यास से प्राणवायु को धीरे-धीरे वश में किया जाता है, जैसे सिंह या हाथी अभ्यास से वश में होते हैं।

प्राणवायुअभ्याससिंह उपमा
प्राणायाम

सगर्भ और अगर्भ प्राणायाम में क्या फर्क है?

जपसहित प्राणायाम सगर्भ और जपरहित प्राणायाम अगर्भ कहा गया है।

सगर्भ प्राणायामअगर्भ प्राणायामजप
प्राणायाम

प्राणायाम के अभ्यास से शरीर में क्या लक्षण दिखते हैं?

मन्द, मध्यम और उत्तम प्राणायाम से क्रमशः पसीना, कम्पन और उत्थान बताए गए हैं; आगे निद्रा, रोमांच और हलकापन भी आता है।

प्राणायाम लक्षणपसीनाकम्पन
प्राणायाम

12, 24 और 36 मात्रा वाले प्राणायाम क्या हैं?

12 मात्रा मन्द, 24 मात्रा मध्यम और 36 मात्रा उत्तम प्राणायाम कहा गया है।

मन्द प्राणायाममध्यम प्राणायामउत्तम प्राणायाम

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।