विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में दान के पुनर्जन्म पर प्रभाव का वर्णन कर्म के नियम के आधार पर है।
श्रेष्ठ कुल में जन्म — गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'महान पुण्य के प्रभाव से मनुष्य-जन्म प्राप्त होता है।' दान पुण्य का सर्वोच्च रूप है। दानी व्यक्ति अगले जन्म में उत्तम, सुखी और समृद्ध परिवार में जन्म लेता है।
धन-संपत्ति और स्वास्थ्य — जिसने इस जन्म में दान किया, अगले जन्म में उसे अपने आप धन मिलता है। गरुड़ पुराण के तेरहवें अध्याय में श्राद्ध-दान के फल के रूप में — 'पिता उसको सत्पुत्र प्रदान करता है, पितामह उसे गोधन देते हैं, प्रपितामह बहुविध धन-संपत्ति प्रदान करते हैं।'
दान का अक्षय फल — गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय में — 'अपने हाथ से अपने कल्याण के लिए दिया गया अल्प वित्त वाला वह दान भी अक्षय होता है और उसका फल भी तत्काल प्राप्त होता है।' अक्षय का अर्थ है — यह फल इस जन्म के बाद भी बना रहता है।
कर्म का नियम — 'नाभुक्तं क्षीयते कर्म' — दान-कर्म का फल अवश्य मिलता है, चाहे इस जन्म में हो या अगले जन्म में।





