विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के बारहवें अध्याय का नाम ही 'एकादशाहकृत्य-निरूपण' है — यह एकादशाह की विधि और महत्व का प्रमुख स्रोत है।
शाब्दिक अर्थ — 'एकादश' = ग्यारह, 'अह' = दिन। एकादशाह = मृत्यु के ग्यारहवें दिन किया जाने वाला कर्म।
एकादशाह क्या होता है — मृत्यु के ग्यारहवें दिन किए जाने वाले विशेष श्राद्ध और दान-कर्म का समूह। गरुड़ पुराण के बारहवें अध्याय में इस दिन के कर्मों का विस्तृत वर्णन है — मृत-शय्यादान, गोदान, घटदान, अष्टमहादान, वृषोत्सर्ग आदि।
गरुड़ पुराण का वचन — 'ग्यारहवें दिन श्राद्ध करके सपिण्डीकरण करना चाहिए और सूतक बीत जाने पर शय्यादान और पददान करना चाहिए।'
एकादशाह की विशेषता — यह दशगात्र के दस पिंडों के बाद अगला चरण है। इस दिन षोडश श्राद्धों की आगे की प्रक्रिया शुरू होती है। दसवें दिन क्षौरकर्म (मुंडन) होता है और ग्यारहवें दिन विशेष दान-कर्म।
इस दिन के कर्म — शय्यादान (प्रेत के लिए पलंग दान), विभिन्न महादान, पिंडदान और प्रेत की मुक्ति की प्रार्थना।





