विस्तृत उत्तर
इंद्र और कर्ण के बीच हुए इस विनिमय की कथा महाभारत की सबसे प्रसिद्ध और प्रेरणादायक घटनाओं में से एक है।
इंद्र ने क्या लिया — इंद्र ने कर्ण से उनका दिव्य कवच और कुण्डल लिए। यह सूर्यदेव का वरदान था जो कर्ण को जन्म से ही प्राप्त था। जब तक यह कवच-कुण्डल कर्ण के शरीर पर था तब तक उन्हें कोई भी हरा नहीं सकता था।
छल की कथा — इंद्र ब्राह्मण वेश में आए। कर्ण सूर्योपासना के समय किसी याचक को खाली हाथ नहीं लौटाते थे। कर्ण ने पहचान लिया परंतु अपने दान-व्रत से नहीं हटे। सूर्यदेव ने पहले चेतावनी दी थी फिर भी कर्ण नहीं माने।
कवच शरीर से काटकर दिया — कर्ण ने अपने शरीर से कवच-कुण्डल काटकर इंद्र को दान दे दिए। इस बलिदान से इंद्र इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने बिना माँगे ही वासवी शक्ति दी।
कर्ण की दानवीरता — दान-वीरता और पुरुषार्थ में विश्वास रखने वाले कर्ण का यह क्षण उनके चरित्र का सर्वोच्च प्रतीक है।





