विस्तृत उत्तर
काव्या माता ने इंद्र को अपने तपोबल और योगशक्ति से रोक दिया। जब इंद्र असुरों को पकड़ने के लिए भृगु आश्रम पहुँचे, तब काव्या माता ने उन्हें चेतावनी दी कि शरणागतों को नुकसान न पहुँचाएँ। इंद्र नहीं माने और बलपूर्वक आगे बढ़े। तब काव्या माता ने अपनी दिव्य दृष्टि और योगिक शक्ति का प्रयोग किया। कथा में कहा गया है कि इंद्र का शरीर जड़ हो गया, वे बोलने और चलने में असमर्थ हो गए और उनका वज्र हाथ से छूट गया। यह प्रसंग दिखाता है कि एक तपस्विनी की शक्ति देवताओं के शस्त्रों से भी अधिक प्रभावी हो सकती है।
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