विस्तृत उत्तर
काव्या माता का तपोबल अत्यंत शक्तिशाली बताया गया है। वे केवल ऋषि-पत्नी नहीं थीं, बल्कि एक सिद्ध तपस्विनी थीं। जब इंद्र असुरों को पकड़ने आए, तो उन्होंने अपने योगबल से इंद्र को निष्क्रिय कर दिया। इंद्र का वज्र हाथ से छूट गया और देवता भयभीत होकर पीछे हट गए। कथा में यह भी आता है कि वे विष्णु और इंद्र दोनों को अपनी तपशक्ति से भस्म करने की सामर्थ्य रखती थीं। यही कारण था कि विष्णु के सामने सामान्य युद्ध नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय धर्मसंकट खड़ा हो गया। काव्या माता का तपोबल शरणागत धर्म और पतिव्रत शक्ति का प्रतीक है।
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