विस्तृत उत्तर
इंद्र ने असुरों पर हमला अवसर देखकर किया। असुरों के गुरु शुक्राचार्य मृत संजीवनी विद्या पाने के लिए भगवान शिव की कठोर तपस्या में गए थे। उनके बिना असुरों के पास न तो वही मार्गदर्शन था और न ही युद्ध में मृत योद्धाओं को पुनर्जीवित करने की शक्ति। इंद्र ने इसे देवताओं के लिए अनुकूल समय माना। उन्होंने सोचा कि यदि अभी असुरों पर आक्रमण किया जाए, तो उनकी शक्ति स्थायी रूप से टूट सकती है। इसी कूटनीतिक सोच से देव-सेना ने असुरों पर धावा बोला, जिसके बाद वे भागकर काव्या माता की शरण में गए।
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