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विस्तृत उत्तर
निवातकवचों का वध अर्जुन ने किया। महाभारत के अनुसार अर्जुन जब स्वर्ग में इंद्र से दिव्यास्त्रों की शिक्षा प्राप्त कर चुके, तब इंद्र ने उन्हें गुरु-दक्षिणा के रूप में निवातकवचों और कालेयों का वध करने को कहा। ये तीन करोड़ महापराक्रमी असुर रसातल के जल के भीतर हिरण्यपुर नामक स्वर्णमयी और मायावी नगर में रहते थे। अर्जुन इंद्र के सारथी मातलि के दिव्य रथ पर रसातल पहुँचे और एक भीषण युद्ध में इंद्र से प्राप्त वज्रास्त्र और ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर निवातकवचों और कालेयों का समूल नाश किया।
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