विस्तृत उत्तर
मृत्यु सूतक (मरण अशौच) की अवधि मृतक से संबंध पर निर्भर करती है।
सूतक अवधि (धर्मसिंधु/गरुड़ पुराण)
- 1निकट संबंधी (माता-पिता, पति-पत्नी, पुत्र-पुत्री, भाई-बहन) — 13 दिन (सबसे प्रचलित)। कुछ परंपराओं में 10 दिन।
- 2चाचा/मामा/ताऊ — 10 दिन (कुछ में 12)।
- 3दूर संबंधी — 3 दिन या 1 दिन।
- 4मित्र/पड़ोसी — स्नान मात्र से शुद्धि।
सूतक में वर्जित
- ▸पूजा-पाठ, मंदिर, हवन
- ▸शुभ कार्य (विवाह, गृह प्रवेश)
- ▸देवता स्पर्श
सूतक में अनुमत
- ▸ईश्वर नाम जप (मानसिक)
- ▸गीता/रामायण पाठ (कुछ में)
- ▸अंत्येष्टि संस्कार (अनिवार्य)
सूतक समाप्ति: 13वें दिन (तेरहवीं) — स्नान, ब्राह्मण भोज, दान, शुद्धि कर्म।
स्पष्टीकरण: सूतक अवधि क्षेत्र, जाति, कुल परंपरा से भिन्न होती है। कुल पुरोहित से परामर्श सर्वोत्तम।





