विस्तृत उत्तर
हाँ। गरुड़ पुराण का प्रेतकल्प जीवन से उतना ही संबंधित है जितना मृत्यु से — बल्कि इसका अधिकांश उपदेश जीवित मनुष्यों के लिए ही है।
कर्म का उपदेश — प्रेतकल्प में पाप-कर्मों और उनके दंड का वर्णन इसीलिए है कि जीवित रहते मनुष्य पापकर्म से बचे। यमदूत का उलाहना — 'जल-अन्न का दान क्यों नहीं दिया?' — यह जीवित को प्रेरणा देता है।
दान-धर्म का विधान — अष्टमहादान, गोदान, भूमिदान आदि का वर्णन जीवित मनुष्य को दान करने के लिए प्रेरित करता है।
जीवन में सत्कर्म — गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'गरुड़ पुराण की समस्त कथाओं और उपदेशों का सार यह है कि हमें आसक्ति का त्यागकर वैराग्य की ओर प्रवृत्त होना चाहिए।' यह जीवित के लिए है।
आत्मज्ञान — 'परमात्मा का ध्यान ही आत्मज्ञान का सबसे सरल उपाय है' — यह जीवित व्यक्ति का मार्गदर्शन है।
मृत्यु की तैयारी — प्रेतकल्प जीवित को मृत्यु के लिए मानसिक और आत्मिक रूप से तैयार करता है — यह भी जीवन से गहरा संबंध है।





