विस्तृत उत्तर
हाँ, गरुड़ पुराण में स्पष्ट वर्णन है कि यमदूत यममार्ग पर जीव को डराते हैं। यह उनके दंड-विधान का एक भाग है।
गरुड़ पुराण के प्रेतकल्प में लिखा है — 'इस प्रकार ले जाये जाते हुए उस जीव को यम के दूत तर्जना करके डराते हैं और नरकों के तीव्र भय का पुनः-पुनः वर्णन करते हैं।' 'तर्जना' का अर्थ है धमकाना, ललकारना, भयभीत करना।
यमदूत जीव को मार्ग में उसके पापकर्मों की याद दिलाते हैं। नरक में होने वाली यातनाओं का विस्तार से वर्णन सुनाते हैं। इससे पापी जीव का हृदय और भी भय से भर जाता है और वह अत्यंत विलाप करता है। गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'यमदूतों की तर्जनाओं से उसका हृदय विदीर्ण हो जाता है।'
यह डराना प्रतिशोध नहीं, बल्कि धर्म के शासन का अंग है। यमदूत यमराज के न्यायतंत्र के कर्मचारी हैं और उनका कार्य पापी जीव को उसके कर्मफल का बोध कराना है।
पुण्यात्माओं के साथ आने वाले देवदूत ऐसा कुछ नहीं करते — वे प्रेमपूर्वक, सम्मान के साथ आत्मा को दिव्य लोकों की ओर ले जाते हैं।





