विस्तृत उत्तर
महर्षि वशिष्ठ ने विश्वामित्र द्वारा चलाए गए आग्नेयास्त्र सहित अनेक दिव्यास्त्रों को अपने ब्रह्मदंड की शक्ति से शांत कर दिया था। ब्रह्मदंड किसी ऋषि के तपोबल का प्रतीक होता था और उसमें दिव्यास्त्रों को भी निष्प्रभावी करने की क्षमता होती थी। यह दर्शाता है कि आध्यात्मिक शक्ति और तप का बल भौतिक या दिव्य अस्त्रों से भी श्रेष्ठ हो सकता है। ब्रह्मर्षि वशिष्ठ की तपोशक्ति इतनी प्रबल थी कि राजर्षि विश्वामित्र के सभी दिव्यास्त्र उसके सामने निष्प्रभावी हो गए।
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