विस्तृत उत्तर
तैत्तिरीय उपनिषद: *'मातृदेवो भव। पितृदेवो भव।'* — माता-पिता = पहले देवता। मंदिर जाने से पहले = माता-पिता प्रणाम।
क्यों सबसे बड़ा
- 1जन्मदाता: ईश्वर ने शरीर माता-पिता द्वारा दिया = ईश्वर का माध्यम।
- 2ऋण: 9 माह गर्भ + वर्षों पालन = सबसे बड़ा ऋण — कभी नहीं चुक सकता।
- 3गीता: पितर सेवा = पितृ ऋण। पितर अतृप्त = जीवन कष्ट (पितृ दोष)।
- 4व्यावहारिक: माता-पिता प्रसन्न = आशीर्वाद = सबसे शक्तिशाली मंत्र। कोई पूजा/मंत्र = माता-पिता आशीर्वाद के बराबर नहीं।
श्रवण कुमार: अंधे माता-पिता = कांवर पर तीर्थ = माता-पिता सेवा आदर्श।
सार: *'जिसके माता-पिता प्रसन्न, उसे तीर्थ जाने की आवश्यकता नहीं।'*





