विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में नरक में यमदूतों द्वारा जीव को पीटने का विस्तृत वर्णन है। यह केवल मारना नहीं है — यह कर्म-दंड की एक क्रमबद्ध प्रक्रिया है।
गरुड़ पुराण के तीसरे अध्याय में वर्णित है — 'बार-बार लोहे की लाठियों, मुद्गरों, भालों, बर्छियों, गदाओं और मूसलों से उन दूतों के द्वारा वे अत्यधिक मारे जाते हैं।' इससे पापी बेहोश हो जाते हैं।
प्रहार के साधन — लोहे की लाठी, मुद्गर (एक प्रकार का भारी हथियार), भाला, बर्छी, गदा और मूसल। ये सब अलग-अलग प्रकार की पीड़ा देते हैं।
पीटने का क्रम — जब जीव पिटाई से बेहोश हो जाता है, तब भी यातना नहीं रुकती। उसे पुनः जीवित करके फिर पीटा जाता है — यह संजीवन नरक का सिद्धांत है।
यमदूत यह करते समय जीव को उसके पापों की याद दिलाते रहते हैं — 'अरे दुराचारी, तुमने जीवन में जो किया उसका यह फल है।'
इस पिटाई का आध्यात्मिक अर्थ है — प्रत्येक प्रहार उस पाप का प्रतिफल है जो जीव ने किसी दूसरे को दिया था।





