विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में श्राद्ध के संबंध को अनेक दृष्टियों से समझाया गया है।
श्राद्ध और पितरों का संबंध — सर्वप्रथम श्राद्ध का संबंध दिवंगत पितरों से है। यह उनके प्रति कृतज्ञता, प्रेम और कर्तव्य का भाव है। गरुड़ पुराण में पितर का स्थान देवताओं के समान बताया गया है।
श्राद्ध और कर्म का संबंध — श्राद्ध एक उत्कृष्ट कर्म है जो इस जन्म और परलोक दोनों में फल देता है। गरुड़ पुराण में श्राद्ध को पितृ-ऋण से मुक्ति का साधन बताया गया है।
श्राद्ध और दान का संबंध — श्राद्ध स्वयं एक प्रकार का दान है। ब्राह्मणों को भोजन और दक्षिणा देना, तर्पण और पिंडदान — ये सब दान के रूप हैं।
श्राद्ध और प्रेत-मुक्ति का संबंध — गरुड़ पुराण में श्राद्ध को प्रेत को 'पितर' बनाने की प्रक्रिया का अंग बताया गया है।
श्राद्ध और परिवार का संबंध — 'पितर संतुष्ट होकर परिवार को सुख, समृद्धि और आशीर्वाद देते हैं' — यह श्राद्ध का परिवार से प्रत्यक्ष संबंध है।
श्राद्ध और परमात्मा का संबंध — गरुड़ पुराण के तेरहवें अध्याय में 'गया श्राद्ध करने से पितर भगवान गदाधर की कृपा से परम गति को प्राप्त होते हैं' — यह श्राद्ध का ईश्वर से संबंध है।





