विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में 'यममार्ग' उस मार्ग को कहा गया है जिससे होकर जीवात्मा मृत्यु के बाद यमलोक पहुँचती है। यह कोई साधारण भौतिक मार्ग नहीं है — यह एक आध्यात्मिक यात्रा है जो जीव के कर्मों के अनुसार सुखद या कष्टकारी होती है।
गरुड़ पुराण के अनुसार यममार्ग अत्यंत लंबा और दुर्गम है। इसकी दूरी 99,000 योजन (एक प्राचीन माप, लगभग 12-16 किमी प्रति योजन) बताई गई है। इस मार्ग पर कोई छाया नहीं, कोई विश्राम-स्थान नहीं, कोई जल नहीं। गर्म बालू, तेज धूप और झुलसाने वाली हवाएँ इस मार्ग की विशेषता हैं।
यह मार्ग उन सभी आत्माओं के लिए है जो मृत्यु के बाद यमलोक जाती हैं। गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'यो मार्गः पुण्यात्माओं के लिए सुखद है तो बुरे लोगों के लिए बहुत अधिक दुखद है।' अर्थात् यही एक मार्ग है परंतु उसका अनुभव व्यक्ति के कर्मों के अनुसार भिन्न-भिन्न होता है।
इस मार्ग में 16 बड़ी नदियाँ पार करनी होती हैं और अनेक कठिन स्थान पार करने पड़ते हैं।





