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यममार्ग में जीव को कौन-कौन से कष्ट मिलते हैं?

गरुड़ पुराण के प्रेतकल्प और तीसरे-चौथे अध्याय में यममार्ग के कष्टों का अत्यंत विस्तृत वर्णन है।

संक्षिप्त उत्तर

यममार्ग पर पापी को भूख-प्यास, जलती बालू, यमदूतों के कोड़े, कुत्तों का काटना, नरक का भय, बार-बार गिरना, वैतरणी नदी की यातना और अंधकारमय मार्ग — ये सभी कष्ट एक साथ भोगने पड़ते हैं।

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विस्तृत उत्तर

गरुड़ पुराण के प्रेतकल्प और तीसरे-चौथे अध्याय में यममार्ग के कष्टों का अत्यंत विस्तृत वर्णन है। पापी जीव को यममार्ग पर जो कष्ट भोगने पड़ते हैं वे इस प्रकार हैं:

भूख और प्यास की तीव्र पीड़ा — यममार्ग पर कोई जल नहीं, कोई भोजन नहीं। भूख-प्यास से व्याकुल जीव कष्ट सहता है। पिंडदान से कुछ शक्ति मिलती है, परंतु पापी जीव को वह भी तृप्त नहीं करती।

गर्म बालू और तेज धूप — 'सूर्य, दावाग्नि और वायु के झोंकों से संतृप्त होते हुए' वह जीव जलती हुई बालू पर नंगे पैर चलने को विवश होता है।

यमदूतों के कोड़े — पीठ पर कोड़ों की मार निरंतर होती है। थकने पर भी चलाया जाता है।

कुत्तों का आक्रमण — रास्ते में भयंकर कुत्ते काटते हैं।

नरक का भय — यमदूत बार-बार नरक की यातनाओं का वर्णन सुनाते हैं।

बार-बार गिरना और बेहोशी — थककर जगह-जगह गिरता है, बेहोश होता है, फिर उठाकर चलाया जाता है।

वैतरणी नदी की यातना — रक्त, मवाद, सर्पों और कीड़ों से भरी नदी को पार करना।

अंधकारमय मार्ग — यमदूत जीव को अंधकारपूर्ण यमलोक में ले जाते हैं।

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