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यममार्ग में जीव को किन स्थानों पर रोका जाता है?

यममार्ग में जीव को 16 पड़ावों (नगरों) पर, वैतरणी नदी के तट पर और यमलोक के द्वार पर रोका जाता है।

संक्षिप्त उत्तर

यममार्ग में जीव को 16 पड़ावों (नगरों) पर, वैतरणी नदी के तट पर और यमलोक के द्वार पर रोका जाता है। प्रत्येक स्थान पर कर्मों का एक भाग देखा जाता है। यह यात्रा 47 दिनों तक चल सकती है।

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विस्तृत उत्तर

गरुड़ पुराण में यममार्ग पर जीव को रोके जाने के स्थानों का वर्णन यमलोक की व्यवस्थित न्याय-प्रक्रिया को दर्शाता है।

16 नगर (पुर) — गरुड़ पुराण में यममार्ग पर 16 नगरों का उल्लेख मिलता है जिनसे होकर जीव को गुजरना होता है। इनमें से प्रत्येक पर जीव को रोककर उसके कर्मों के एक भाग का हिसाब किया जाता है।

सौम्यपुर — यह यममार्ग का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है जहाँ जीव 17-18वें दिन पहुँचता है। यहाँ पहली बड़ी रुकावट होती है।

वैतरणी नदी — यह एक बड़ा अवरोध है जहाँ जीव को रोका जाता है। यहाँ जीव से पूछा जाता है कि उसके पास पार करने का पुण्य (दान) है या नहीं।

यमलोक का द्वार — अंत में यमलोक के चार द्वारों पर जीव को रोका जाता है। कर्मों के अनुसार किस द्वार से प्रवेश दिया जाए — यह वहाँ के द्वारपाल तय करते हैं।

गरुड़ पुराण में बताया गया है कि इन 16 नगरों तक पहुँचने में यात्रा 47 दिन तक चल सकती है और प्रत्येक नगर पर जीव का एक विशेष लेखा-जोखा होता है।

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