विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में यममार्ग पर कुत्तों द्वारा काटने का उल्लेख मिलता है। यह केवल एक शारीरिक यातना का वर्णन नहीं है — इसके गहरे प्रतीकात्मक अर्थ हैं।
गरुड़ पुराण के अनुसार — यममार्ग पर 'रास्ते में कुत्ते काटते हैं।' पापी जीव इस यातना को भी भोगता है जबकि वह पहले से ही भूख-प्यास और गर्मी से व्याकुल होता है।
आध्यात्मिक अर्थ में — कुत्ता स्वामिभक्त प्राणी है। परंतु यहाँ कुत्ते का काटना उस पापी के उन कृत्यों का परिणाम है जिनसे उसने अपने स्वामी, आश्रयदाता या विश्वास करने वाले लोगों को धोखा दिया। जिसने जीवन में विश्वासघात किया, उसे मृत्यु के बाद यहाँ तक दंड मिलता है।
एक और व्याख्या — यमलोक के द्वार पर दो बड़े कुत्ते पहरा देते हैं जिनका उल्लेख ऋग्वेद में भी मिलता है। यह धर्म के द्वारपालों का प्रतीक है जो पापी को रोकते और दंडित करते हैं।
इसके अतिरिक्त, भोजन न मिलने की स्थिति में जीव जब भटकता है, कुत्ते उसे और अधिक असहाय बनाते हैं। यह असहायता पाप के परिणाम का स्वाभाविक हिस्सा है।
यह वर्णन यह संदेश देता है कि जीवन में किए गए हर कर्म का हिसाब होता है।





