विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में यममार्ग पर पापी जीव की दशा का जो चित्रण है, वह अत्यंत कारुणिक और भयावह दोनों है।
शारीरिक स्थिति — पापी जीव भूख-प्यास से व्याकुल होता है। जलती बालू पर चलना पड़ता है। यमदूतों के कोड़े पड़ते हैं। कुत्ते काटते हैं। थककर बार-बार गिरता है, बेहोश होता है।
मानसिक स्थिति — अपने पापकर्मों को याद करते हुए पछताता है। नरक का भय यमदूतों द्वारा बार-बार सुनाया जाता है। परिजनों से बिछड़ने का दुख है। वह जोर-जोर से रोता है, विलाप करता है, परंतु कोई सहायता नहीं करता।
आत्मिक स्थिति — यमदूत के पाश में बंधा होने के कारण वह शरीर में वापस नहीं लौट सकता। उसे अपने अंतिम संस्कार को जलते देखना पड़ता है। परिजनों को देख-सुन सकता है पर वे उसे नहीं देख-सुन सकते।
गरुड़ पुराण में यह भी वर्णित है कि यमदूत थकने पर भी उसे आगे धकेलते हैं — 'चलने में असमर्थ जगह पर भी उसे चलाया जाता है।'
यह सब उस जीव की दशा है जिसने जीवन में धर्म, दान और ईश्वर-भक्ति से मुँह मोड़ा।





