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यममार्ग में पापी जीव की स्थिति कैसी होती है?

यममार्ग पर पापी जीव भूखा-प्यासा, जलती बालू पर, कोड़े खाता, कुत्तों से काटा, बेहोश होता-उठता चलता है। मन में पछतावा, विलाप और भय है।

संक्षिप्त उत्तर

यममार्ग पर पापी जीव भूखा-प्यासा, जलती बालू पर, कोड़े खाता, कुत्तों से काटा, बेहोश होता-उठता चलता है। मन में पछतावा, विलाप और भय है। पाश में बंधा होने से वापस नहीं लौट सकता। कोई सहायता नहीं मिलती।

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विस्तृत उत्तर

गरुड़ पुराण में यममार्ग पर पापी जीव की दशा का जो चित्रण है, वह अत्यंत कारुणिक और भयावह दोनों है।

शारीरिक स्थिति — पापी जीव भूख-प्यास से व्याकुल होता है। जलती बालू पर चलना पड़ता है। यमदूतों के कोड़े पड़ते हैं। कुत्ते काटते हैं। थककर बार-बार गिरता है, बेहोश होता है।

मानसिक स्थिति — अपने पापकर्मों को याद करते हुए पछताता है। नरक का भय यमदूतों द्वारा बार-बार सुनाया जाता है। परिजनों से बिछड़ने का दुख है। वह जोर-जोर से रोता है, विलाप करता है, परंतु कोई सहायता नहीं करता।

आत्मिक स्थिति — यमदूत के पाश में बंधा होने के कारण वह शरीर में वापस नहीं लौट सकता। उसे अपने अंतिम संस्कार को जलते देखना पड़ता है। परिजनों को देख-सुन सकता है पर वे उसे नहीं देख-सुन सकते।

गरुड़ पुराण में यह भी वर्णित है कि यमदूत थकने पर भी उसे आगे धकेलते हैं — 'चलने में असमर्थ जगह पर भी उसे चलाया जाता है।'

यह सब उस जीव की दशा है जिसने जीवन में धर्म, दान और ईश्वर-भक्ति से मुँह मोड़ा।

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