विस्तृत उत्तर
यमराज आत्मा के कर्मों का निर्णय चित्रगुप्त द्वारा पढ़े गए कर्म-लेख के आधार पर करते हैं। चित्रगुप्त की अग्रसंधानी पंजिका में प्रत्येक जीव के जन्म से मृत्यु तक के कर्म और श्वास का सूक्ष्म लेखा रहता है। धर्मराज यम निष्पक्ष न्यायाधीश की तरह इन कर्मों के आधार पर आत्मा के भाग्य का निर्णय करते हैं। यदि जीव ने सत्कर्म किए हैं, तो उसे स्वर्ग या उच्च लोकों में भेजा जाता है। यदि जीव ने पाप किए हैं, तो उसे पापों की गंभीरता के अनुसार कुम्भीपाक, रौरव आदि नरकों में यातना सहने के लिए भेजा जाता है।
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