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विस्तृत उत्तर
अग्रसंधानी चित्रगुप्त के पास रहने वाली एक महान पंजिका है। इसमें प्रत्येक जीव के जन्म से लेकर मृत्यु तक के एक-एक श्वास और कर्म का सूक्ष्म लेखा-जोखा अंकित रहता है। यमराज के दरबार में चित्रगुप्त इसी पंजिका के आधार पर आत्मा के कर्मों को प्रस्तुत करते हैं। धर्मराज यम अत्यंत निष्पक्ष न्यायाधीश की तरह उन कर्मों के आधार पर आत्मा के भाग्य का निर्णय करते हैं।
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