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पौराणिक कथा प्रश्नोत्तरी — 50 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित पौराणिक कथा विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 50 प्रश्न

पौराणिक कथा

कलाप उपवन में पितर क्या बात कर रहे थे?

कलाप उपवन में पितृगण आपस में वार्तालाप कर रहे थे और अपेक्षा कर रहे थे कि उनके वंश में कोई सन्मार्गशील और धर्मपरायण व्यक्ति उत्पन्न हो जो गया तीर्थ में पिण्डदान करे, पितृ पक्ष की त्रयोदशी या प्रतिपदा को मधु-घृत युक्त पायस का दान करे, वृषोत्सर्ग नीला वृषभ छोड़े, और ब्राह्मणों को दक्षिणा सहित संतुष्ट करे। महाराज पुरुरवा ने ये सब अपेक्षाएँ पूरी कीं।

कलाप उपवनपितृगण वार्तालापश्राद्ध अपेक्षा
पौराणिक कथा

महाराज पुरुरवा कौन थे?

महाराज पुरुरवा एक चन्द्रवंशी सम्राट थे, जो अत्यंत धर्मपरायण और विष्णु भक्त थे। विष्णु पुराण के तृतीय अंश में उनका प्रसंग वर्णित है। उन्होंने अपने पितरों की आकांक्षा को पूर्ण कर विधिपूर्वक श्राद्ध संपन्न कर उन्हें परम तृप्ति प्रदान की, और परिणामस्वरूप पितरों के आशीर्वाद से अकूत ऐश्वर्य, धर्म और अंततः मोक्ष प्राप्त किया।

महाराज पुरुरवाचन्द्रवंशी सम्राटविष्णु भक्त
पौराणिक कथा

पितृ देवताओं ने महर्षि निमि से क्या कहा?

पितृ देवताओं ने महर्षि निमि से कहा कि उनका मृत पुत्र की आत्मा को लक्ष्य करके किया गया ब्राह्मण भोजन साक्षात् पितृ यज्ञ के रूप में उन्हें प्राप्त हुआ है, और उनके इस कृत्य से उनका पुत्र अब पितृ देवों के मध्य उच्च और शांत स्थान प्राप्त कर चुका है। इस आश्वासन से निमि का शोक दूर हुआ।

पितृ देवता संदेशपितृ यज्ञउच्च स्थान
पौराणिक कथा

महर्षि निमि ने पुत्र की मृत्यु पर क्या किया?

महर्षि निमि ने अशांत मन से श्रेष्ठ ब्राह्मणों को अपने आश्रम में आमंत्रित कर वे सभी सात्त्विक और स्वादिष्ट व्यंजन परोसे जो उनके मृत पुत्र को अत्यंत प्रिय थे। पितृ देवताओं ने प्रकट होकर बताया कि यह भोजन साक्षात् पितृ यज्ञ के रूप में उन्हें प्राप्त हुआ है। इसी कार्य से श्राद्ध की लौकिक परम्परा का आरंभ हुआ।

निमि कार्यब्राह्मण भोजनपुत्र प्रिय व्यंजन
पौराणिक कथा

महर्षि निमि का पुत्र क्यों मरा?

महर्षि निमि का अत्यंत आज्ञाकारी और तपस्वी पुत्र कठोर तपस्या के दौरान अकाल मृत्यु को प्राप्त हुआ। दुर्भाग्यवश तपस्या के दौरान उसकी असमय मृत्यु हुई। इस अकाल मृत्यु से महर्षि निमि का हृदय विदीर्ण हो गया, और वे गहन शोक में डूब गए। इसी शोक से उन्होंने श्राद्ध की लौकिक परम्परा का आरंभ किया।

निमि पुत्र मृत्युअकाल मृत्युकठोर तपस्या
पौराणिक कथा

महर्षि निमि कौन थे?

महर्षि निमि एक महान ऋषि थे, जो ब्रह्मा जी के मानस पुत्र महर्षि अत्रि के वंश में हुए थे। उनके पुत्र की अकाल मृत्यु से उत्पन्न शोक के कारण उन्होंने ब्राह्मणों को सात्त्विक भोजन कराया, जिससे श्राद्ध की लौकिक परम्परा का आरंभ हुआ। वराह पुराण में उनकी कथा का वर्णन है।

महर्षि निमिअत्रि वंशनिमि कथा
पौराणिक कथा

कुशा घास कैसे उत्पन्न हुई?

कुशा घास भगवान वराह के दिव्य रोमों से उत्पन्न हुई। जब भगवान वराह ने हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी को रसातल से बाहर निकाला, उसके बाद उनके दिव्य रोमों से पवित्र कुशा घास का प्रादुर्भाव हुआ। इसीलिए श्राद्ध में कुशा अत्यंत पवित्र मानी जाती है, क्योंकि यह साक्षात् नारायण के शरीर से उत्पन्न हुई है।

कुशा उत्पत्तिवराह दिव्य रोमपवित्र घास
पौराणिक कथा

काले तिल की उत्पत्ति कैसे हुई?

काले तिल की उत्पत्ति भगवान वराह के शरीर से उत्पन्न पसीने की बूंदों से हुई। जब भगवान वराह ने हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी को रसातल से बाहर निकाला, तब उनके पसीने की बूंदें पृथ्वी पर गिरीं, और उनसे काले तिल उत्पन्न हुए। इसीलिए श्राद्ध में काले तिल अत्यंत पवित्र और अनिवार्य माने जाते हैं।

काले तिल उत्पत्तिवराह पसीनादिव्य उद्भव
पौराणिक कथा

पहला पिण्ड किस मिट्टी से बना?

पहला पिण्ड भगवान वराह की दाढ़ से दक्षिण दिशा की ओर गिरे पृथ्वी के मृदा अंश अर्थात् मिट्टी से बना था। यह वह मृदा थी जिसे भगवान ने हिरण्याक्ष का वध करके रसातल से बाहर निकाला था। इससे तीन गोलाकार पिण्ड बने, जो पिता, पितामह और प्रपितामह के शाश्वत प्रतीक हैं।

पहला पिण्डमृदा अंशवराह दाढ़
पौराणिक कथा

भगवान वराह ने पिण्डदान कब शुरू किया?

भगवान वराह ने पिण्डदान तब शुरू किया जब उन्होंने हिरण्याक्ष नामक महादैत्य का वध कर पृथ्वी को रसातल से बाहर निकाला। उनकी दाढ़ से दक्षिण दिशा की ओर गिरे मृदा अंश से तीन पिण्ड बनाकर, कुशा के ऊपर स्थापित कर, उन्हें पिता, पितामह और प्रपितामह के शाश्वत प्रतीक घोषित किया। यह सम्पूर्ण जगत में पिण्डदान की पवित्र परम्परा का आरंभ था।

वराह अवतारहिरण्याक्ष वधपृथ्वी रसातल
पौराणिक कथा

पिण्डदान की शुरुआत किसने की?

पिण्डदान की शुरुआत स्वयं भगवान विष्णु के वराह अवतार ने की थी। जब उन्होंने हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी को रसातल से बाहर निकाला, तब उनकी दाढ़ से गिरे मृदा अंश से तीन पिण्डों का निर्माण कर, कुशा पर दक्षिण दिशा में स्थापित किया, और उन्हें पिता, पितामह तथा प्रपितामह के शाश्वत प्रतीक घोषित किया।

पिण्डदान शुरुआतभगवान वराहविष्णु अवतार
पौराणिक कथा

माता पार्वती के श्राप से लंगड़ा बालक कैसे ठीक हुआ?

नाग कन्याओं के बताने पर उस बालक ने लगातार 21 'संकष्टी चतुर्थी' का अत्यंत कठोर व्रत किया, जिससे भगवान गणेश ने खुश होकर उसे पूरी तरह से ठीक कर दिया।

विकट संकष्टीश्राप मुक्तिव्रत प्रभाव
पौराणिक कथा

शिव-पार्वती के चौसर (पांसे) की कहानी?

चौसर के खेल में एक बालक ने माता पार्वती के जीतने पर भी पक्षपात करते हुए शिव जी को जीता हुआ बता दिया, जिस पर गुस्सा होकर माता ने उसे लंगड़ा होने का श्राप दे दिया।

चौसरशिव पार्वतीश्राप
पौराणिक कथा

देवराज इंद्र का विमान क्यों गिर गया था?

गणेश पुराण के अनुसार, एक अत्यंत महापापी मनुष्य की बुरी नज़र (दृष्टि-दोष) पड़ने के कारण इंद्र के विमान का सारा पुण्य नष्ट हो गया और वह ज़मीन पर गिर पड़ा।

इंद्र विमानगणेश पुराणदृष्टि दोष
पौराणिक कथा

हनुमान जी ने संकष्टी व्रत क्यों किया था?

माता सीता की खोज के दौरान सौ योजन के विशाल समुद्र को लांघने के लिए वृद्ध संपाती के कहने पर हनुमान जी ने यह संकटमोचक व्रत किया था।

हनुमान जीरामायणसीता खोज
पौराणिक कथा

भगवान कृष्ण के बेटे साम्ब को इस व्रत से क्या फायदा हुआ था?

भगवान कृष्ण के बेटे साम्ब को एक ऋषि के श्राप के कारण 'कुष्ठ रोग' (कोढ़) हो गया था। रथ सप्तमी के दिन सूर्य की विशेष पूजा करने से उसका यह रोग पूरी तरह ठीक हो गया था।

साम्बकुष्ठ रोगश्रीकृष्ण
पौराणिक कथा

इन्दुमती की कथा क्या है और उसने यह व्रत क्यों किया?

भविष्य पुराण के अनुसार, इन्दुमती एक वेश्या थी जिसने जिंदगी में कभी पूजा-पाठ नहीं किया था। बुढ़ापे में मृत्यु के डर से उसने यह व्रत किया, जिसके पुण्य से उसे मोक्ष और 'सूर्य-लोक' मिला।

इन्दुमतीभविष्य पुराणमोक्ष
पौराणिक कथा

महाभारत में पांडवों ने अनंत चतुर्दशी का व्रत क्यों किया था?

वनवास की कठिनाइयां दूर करने और अपना खोया हुआ राज्य वापस पाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर पांडवों ने 14 साल तक यह व्रत किया था।

पांडवश्रीकृष्णमहाभारत
पौराणिक कथा

कौण्डिन्य ऋषि द्वारा अनंत सूत्र (धागा) जलाने का क्या परिणाम हुआ था?

धागा जलाने से भगवान विष्णु का अपमान हुआ, जिससे ऋषि की सारी संपत्ति नष्ट हो गई और वे एकदम गरीब हो गए। भूल सुधारने के लिए उन्हें 14 साल तक यह व्रत करना पड़ा।

अपमानदरिद्रताप्रायश्चित
पौराणिक कथा

सुशीला और कौण्डिन्य ऋषि की अनंत चतुर्दशी कथा क्या है?

ब्राह्मण की पुत्री सुशीला ने शादी के बाद यमुना तट पर यह व्रत किया था, जिसके चमत्कार से उसके पति कौण्डिन्य ऋषि का आश्रम अपार धन-संपत्ति और वैभव से भर गया था।

सुशीलाकौण्डिन्य ऋषिमूल कथा
पौराणिक कथा

माता मनसा को भगवान शिव की पुत्री और वासुकि नाग की बहन क्यों कहा जाता है?

चूंकि वे भगवान शिव के तेज से सजीव हुई थीं, इसलिए शिव ने उन्हें अपनी 'मानस पुत्री' माना। साथ ही, नागराज वासुकि के परिवार से जुड़े होने के कारण वे उनकी बहन कहलाईं।

शिव की मानस पुत्रीनागराज वासुकिकैलाश
पौराणिक कथा

मनसा देवी कौन हैं और उनका जन्म कैसे हुआ?

देवी मनसा महर्षि कश्यप के 'मन' (संकल्प शक्ति) से उत्पन्न हुई थीं। एक अन्य कथा के अनुसार, नागराज वासुकि की माता द्वारा बनाई मूर्ति में भगवान शिव के तेज से उनका जन्म हुआ था।

मनसा देवी का जन्ममहर्षि कश्यपकल्प भेद
पौराणिक कथा

एकादशी माता की उत्पत्ति कैसे हुई (मुर दैत्य की कथा)?

देवताओं को परेशान करने वाले 'मुर' दैत्य को मारने के लिए भगवान विष्णु के मन (ग्यारहवीं इंद्रिय) से एक शक्ति प्रकट हुई थी, जिसे भगवान ने 'एकादशी' नाम दिया।

एकादशी उत्पत्तिमुर दैत्यभगवान विष्णु
पौराणिक कथा

भगवान विष्णु 4 महीने पाताल लोक में क्यों रहते हैं (राजा बलि की कथा)?

वामन अवतार के समय राजा बलि की दानवीरता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसे वरदान दिया था कि वे 4 महीने (चातुर्मास) पाताल लोक में उसके महल के पहरेदार बनकर रहेंगे।

राजा बलिपाताल लोकवामन अवतार

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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