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लोक प्रश्नोत्तरी — 3617 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित लोक विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 3617 प्रश्न

लोक

सिद्धगण की अष्ट-सिद्धियाँ क्या हैं?

अष्ट-सिद्धियाँ हैं — अणिमा, महिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व और कामावसायिता। इनसे सिद्धगण बिना विमान के अंतरिक्ष में विचरण करते हैं।

सिद्धगणअष्ट सिद्धियाँअणिमा
लोक

भुवर्लोक के ऊपरी और निचले हिस्से में क्या अंतर है?

ऊपरी भुवर्लोक में सिद्ध, चारण और विद्याधर जैसी सात्त्विक सत्ताएं रहती हैं जबकि निचले हिस्से में यक्ष, राक्षस, भूत और प्रेत जैसी तामसिक सत्ताएं विचरण करती हैं।

भुवर्लोकऊपरी हिस्सानिचला हिस्सा
लोक

पृथ्वी से सूर्यमंडल की दूरी कितनी बताई गई है?

विष्णु पुराण के अनुसार पृथ्वी से सूर्यमंडल की दूरी एक लाख योजन (लगभग आठ लाख मील) है और इसी बीच के आकाश में भुवर्लोक फैला हुआ है।

पृथ्वीसूर्यमंडलएक लाख योजन
लोक

विष्णु पुराण में भुवर्लोक का क्षैतिज विस्तार कितना बताया गया है?

विष्णु पुराण के अनुसार भुवर्लोक का क्षैतिज विस्तार बिल्कुल भूलोक (पृथ्वी) के ही समान है। दोनों का घेरा एक जैसा है।

विष्णु पुराणभुवर्लोकक्षैतिज विस्तार
लोक

राहु ग्रह का भुवर्लोक से क्या संबंध है?

राहु ग्रह सूर्य से दस हजार योजन नीचे है और राहु के नीचे से भुवर्लोक की सर्वोच्च सीमा शुरू होती है जहाँ सिद्धलोक, चारणलोक और विद्याधरलोक हैं।

राहुभुवर्लोकसूर्यमंडल
लोक

भुवर्लोक की ऊपरी सीमा कहाँ है और निचली सीमा कहाँ से शुरू होती है?

भुवर्लोक की निचली सीमा पृथ्वी के वायुमंडल के ऊपर से और ऊपरी सीमा राहु ग्रह के नीचे तक है। इसके बीच सिद्धलोक, चारणलोक और विद्याधरलोक हैं।

भुवर्लोकसीमाराहु
लोक

सिद्धगण बिना विमान के कैसे यात्रा करते हैं?

सिद्धगण अपनी जन्मजात योग-शक्ति और अंतर्धान विद्या से बिना विमान के अंतरिक्ष में विचरण करते हैं। उनकी अष्ट-सिद्धियाँ उन्हें यह शक्ति देती हैं।

सिद्धगणभुवर्लोकविमान
लोक

भीष्म पितामह की मृत्यु के समय भुवर्लोक के निवासियों ने क्या किया?

भीष्म पितामह के देह त्याग के समय भुवर्लोक के सिद्ध, चारण और विद्याधर वहाँ एकत्रित हुए और अंतरिक्ष से पुष्पों की भारी वर्षा की।

भीष्म पितामहभुवर्लोकसिद्ध
लोक

भगवद्गीता में भुवर्लोक के बारे में क्या कहा गया है?

गीता (८.१६) में कृष्ण कहते हैं कि ब्रह्मलोक से भूलोक तक सभी लोक पुनरावर्ती हैं। भुवर्लोक में भी पुण्य क्षीण होने पर पुनः पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ता है।

भगवद्गीताभुवर्लोकपुनरावर्ती
लोक

प्रलय में भुवर्लोक का क्या होता है?

प्रलय में सात प्रलयंकारी सूर्यों की अग्नि से भुवर्लोक का वायुमंडल पूरी तरह भस्म हो जाता है और फिर सांवर्तक मेघों की वर्षा से यह जलमग्न हो जाता है।

प्रलयभुवर्लोकनैमित्तिक प्रलय
लोक

यज्ञ का भुवर्लोक से क्या संबंध है?

यज्ञ की आहुति का सूक्ष्म तत्व भुवर्लोक से होकर देवताओं तक स्वर्लोक में पहुँचता है। भुवर्लोक यज्ञीय ऊर्जाओं और मन्त्रों का ब्रह्मांडीय संवाहक है।

यज्ञभुवर्लोकआहुति
लोक

श्राद्ध और पिंडदान का भुवर्लोक से क्या संबंध है?

भुवर्लोक में भटक रही प्रेत-आत्माओं को श्राद्ध और पिंडदान से सूक्ष्म ऊर्जा मिलती है जिससे वे इस कष्टदायी लोक को पार करके पितृलोक तक पहुँच सकती हैं।

श्राद्धपिंडदानभुवर्लोक
लोक

अकाल मृत्यु के बाद आत्मा कहाँ जाती है?

अकाल मृत्यु (आत्महत्या, दुर्घटना) के बाद आत्मा प्रेत योनि को प्राप्त होकर भुवर्लोक के निचले वायुमंडल में फंस जाती है और तीव्र वायु के बीच बिना आश्रय के भटकती है।

अकाल मृत्युभुवर्लोकप्रेत योनि
लोक

पुण्यात्मा के लिए भुवर्लोक कैसा होता है?

पुण्यात्माओं के लिए भुवर्लोक एक पारदर्शी सुगम मार्ग है। वे इससे होकर आसानी से स्वर्लोक या पितृलोक पहुँच जाते हैं बिना यहाँ फंसे।

भुवर्लोकपुण्यात्मास्वर्लोक
लोक

पापी आत्मा मृत्यु के बाद भुवर्लोक में क्यों फंस जाती है?

अत्यधिक पाप कर्म, भौतिक आसक्ति या अकाल मृत्यु के कारण आत्मा सीधे स्वर्ग-नरक नहीं जा पाती और प्रेत योनि में निचले भुवर्लोक में फंस जाती है।

भुवर्लोकपापी आत्मामृत्यु
लोक

भुवर्लोक में भूत-प्रेत क्यों भटकते हैं?

कर्म-बंधन, अकाल मृत्यु या भौतिक आसक्ति के कारण जो आत्माएं पृथ्वी के मोह से मुक्त नहीं हो पातीं वे सूक्ष्म शरीर में भुवर्लोक में भटकती रहती हैं।

भुवर्लोकभूत प्रेतकर्म बंधन
लोक

भुवर्लोक के अधिपति देवता कौन हैं?

भुवर्लोक के अधिपति देवता वायु देव (पवन देव) हैं। वे यहाँ वायु संचालन, बादलों का निर्माण और यज्ञ की आहुति को देवताओं तक पहुँचाने का कार्य करते हैं।

भुवर्लोकवायु देवअधिपति
लोक

भुवर्लोक में कौन-कौन सी सत्ताएं रहती हैं?

भुवर्लोक में ऊपरी भाग में सिद्ध, चारण और विद्याधर रहते हैं जबकि निचले भाग में यक्ष, राक्षस, भूत, प्रेत और पिशाच विचरण करते हैं।

भुवर्लोकनिवासीसिद्ध
लोक

भुवर्लोक किस तत्व से बना है?

भुवर्लोक मुख्य रूप से वायु-तत्व और आकाश-तत्व से बना है। यहाँ पृथ्वी-तत्व और जल-तत्व का अभाव है, केवल वायु और मेघ (जल वाष्प) हैं।

भुवर्लोकवायु तत्वआकाश तत्व
लोक

कृतक त्रैलोक्य क्या होता है?

भूलोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक — ये तीनों मिलकर कृतक त्रैलोक्य कहलाते हैं। 'कृतक' अर्थात विनाशी — ये तीनों प्रलय के समय नष्ट हो जाते हैं।

कृतक त्रैलोक्यभूलोकभुवर्लोक
लोक

सात अधोलोक कौन-कौन से हैं?

सात अधोलोक हैं — अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल। ये सभी पृथ्वी के नीचे स्थित हैं।

अधोलोकपातालरसातल
लोक

सात ऊर्ध्व लोक कौन-कौन से हैं?

सात ऊर्ध्व लोक हैं — भूलोक, भुवर्लोक, स्वर्लोक, महर्लोक, जनलोक, तपलोक और सत्यलोक (ब्रह्मलोक)।

सात ऊर्ध्व लोकभूलोकभुवर्लोक
लोक

भुवर्लोक भूलोक और स्वर्लोक के बीच क्यों है?

भुवर्लोक भूलोक और स्वर्लोक के बीच इसलिए है क्योंकि यह स्थूल भौतिक और दैवीय जगत के बीच पारगमन क्षेत्र है। यहाँ सूक्ष्म सत्ताएं निवास करती हैं जो न पूर्णतः भौतिक हैं न दैवीय।

भुवर्लोकभूलोकस्वर्लोक
लोक

भुवर्लोक को 'अंतरिक्ष' क्यों कहते हैं?

भुवर्लोक को अंतरिक्ष इसलिए कहते हैं क्योंकि यह वहाँ तक फैला है जहाँ तक वायु बहती है और बादल दिखते हैं। यह भौतिक और दैवीय जगत के बीच का मध्यवर्ती आकाशीय क्षेत्र है।

भुवर्लोकअंतरिक्षनाम

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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