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श्रीमद्भागवत प्रश्नोत्तरी — 429 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित श्रीमद्भागवत विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 429 प्रश्न

श्रीमद्भागवत

भगवान का अनुभव कैसे होता है?

भागवत श्रवण से प्राप्त ज्ञान-वैराग्ययुक्त भक्ति और प्रेममयी भक्ति से भगवान के तत्त्व का अनुभव होता है।

भगवान अनुभवपरमात्माभक्ति
श्रीमद्भागवत

स्थायी भक्ति कैसे मिलती है?

महात्मा सेवा, श्रवण की इच्छा, श्रद्धा और निरंतर भागवत-कथा सेवन से अशुभ वासनाएँ मिटती हैं और स्थायी भक्ति मिलती है।

स्थायी भक्तिभागवत सेवाश्रद्धा
श्रीमद्भागवत

काम और लोभ से कैसे बचें?

भागवत और भगवद्कथा के निरंतर सेवन से अशुभ वासनाएँ नष्ट होती हैं, फिर काम-लोभ शांत होकर चित्त निर्मल होता है।

कामलोभभागवत
श्रीमद्भागवत

बुरी वासनाएँ कैसे मिटती हैं?

भगवान की कथा सुनने वालों के हृदय में कृष्ण स्थित होकर अशुभ वासनाएँ दूर करते हैं; निरंतर भागवत सेवा से वे नष्ट होती हैं।

बुरी वासनाएँकृष्ण कथाभागवत सेवा
श्रीमद्भागवत

भगवान की कथा में रुचि कैसे बढ़ती है?

महात्मा सेवा से श्रवण की इच्छा और श्रद्धा आती है; कथा सुनने से कृष्ण हृदय की अशुभ वासनाएँ दूर करते हैं।

भगवत कथाकथा रुचिश्रवण
श्रीमद्भागवत

संतों की सेवा से भक्ति कैसे आती है?

पवित्र तीर्थों के सेवन से महात्माओं की सेवा, फिर श्रवण की इच्छा, श्रद्धा और अंत में भगवत कथा में रुचि उत्पन्न होती है।

संत सेवाभक्तिवासुदेव कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत पढ़ने से पहले क्या करना चाहिए?

भागवत पाठ से पहले नर-नारायण ऋषि, देवी सरस्वती और श्री व्यासदेव को प्रणाम करना बताया गया है।

भागवत पाठनारायणसरस्वती
श्रीमद्भागवत

भगवान को प्रसन्न कैसे करें?

अपने धर्म की पूर्ण सिद्धि भगवान को प्रसन्न करने में है; इसलिए एकाग्र मन से उनका श्रवण, कीर्तन, ध्यान और पूजन करना चाहिए।

भगवान को प्रसन्नश्रवणकीर्तन
श्रीमद्भागवत

मनुष्य जीवन का उद्देश्य क्या है?

मनुष्य जीवन का उद्देश्य तत्त्व-जिज्ञासा बताया गया है; केवल कर्म, भोग या स्वर्ग-प्राप्ति इसका अंतिम फल नहीं है।

मनुष्य जीवनजीवन उद्देश्यतत्त्व जिज्ञासा
श्रीमद्भागवत

पैसा किसलिए कमाना चाहिए?

अर्थ को धर्म के लिये बताया गया है; धन का फल भोग-विलास नहीं, और भोग का उद्देश्य केवल जीवन-निर्वाह है।

धनअर्थधर्म
श्रीमद्भागवत

धर्म का असली उद्देश्य क्या है?

धर्म का असली उद्देश्य मोक्ष, भगवान को प्रसन्न करना और जीवन को तत्त्व-जिज्ञासा की ओर ले जाना है।

धर्ममोक्षभगवान
श्रीमद्भागवत

पूजा-पाठ के बाद भी मन शांत क्यों नहीं होता?

यदि धर्म के अनुष्ठान से भगवान की लीला-कथा में प्रेम नहीं जागता, तो वह परिश्रम मात्र बताया गया है।

पूजा पाठमन की शांतिभगवत कथा
श्रीमद्भागवत

भक्ति से ज्ञान और वैराग्य कैसे आते हैं?

भगवान वासुदेव में भक्ति लगते ही अनन्य प्रेम से निष्काम ज्ञान और वैराग्य शीघ्र प्रकट होते हैं।

भक्तिज्ञानवैराग्य
श्रीमद्भागवत

भगवान की भक्ति से मन को शांति कैसे मिलती है?

निरंतर और निष्काम भक्ति से हृदय परमात्मा को पाता है, अशुभ वासनाएँ मिटती हैं और आत्मप्रसाद मिलता है।

मन की शांतिभक्तिकृष्ण
श्रीमद्भागवत

निष्काम भक्ति का मतलब क्या है?

निष्काम भक्ति का अर्थ है बिना किसी फल-कामना के भगवान में स्थिर प्रेम, जिससे ज्ञान और वैराग्य अपने आप आते हैं।

निष्काम भक्तिभक्तिवासुदेव
श्रीमद्भागवत

सच्ची भक्ति क्या है?

सच्ची भक्ति वह है जो भगवान कृष्ण में हो, बिना किसी कामना के हो और निरंतर बनी रहे।

भक्तिसच्ची भक्तिकृष्ण
श्रीमद्भागवत

कृष्ण के धाम जाने के बाद धर्म का सहारा क्या है?

ऋषि यही प्रश्न पूछते हैं कि धर्मरक्षक कृष्ण के धाम जाने पर धर्म ने अब किसकी शरण ली है।

धर्मकृष्णधाम
श्रीमद्भागवत

कलियुग से पार पाने में हरि कथा कैसे मदद करती है?

ऋषि कहते हैं कि कलियुग अंतःकरण की पवित्रता और शक्ति को नष्ट करता है; उससे पार जाने वालों के लिये सूतजी कर्णधार जैसे मिले हैं।

कलियुगहरि कथासूतजी
श्रीमद्भागवत

कृष्ण और बलराम की लीलाएँ अद्भुत क्यों कही गईं?

क्योंकि कृष्ण ने बलराम के साथ ऐसे कर्म और पराक्रम प्रकट किए जिन्हें मनुष्य नहीं कर सकते।

कृष्णबलरामलीला
श्रीमद्भागवत

कृष्ण मनुष्य जैसे दिखकर भी भगवान कैसे थे?

कृष्ण लोगों के सामने मनुष्य जैसे आचरण करते थे, पर बलराम के साथ उन्होंने ऐसी लीलाएँ और पराक्रम किए जो मनुष्य नहीं कर सकते।

कृष्णभगवानमानव लीला
श्रीमद्भागवत

कृष्ण कथा सुनने की इच्छा क्यों बढ़ती है?

क्योंकि भगवान का यश कलियुग के पापों को हरता है और रसिक श्रोताओं को उनकी लीला में पद-पद पर नया रस मिलता है।

कृष्ण कथाहरि कथाभगवत लीला
श्रीमद्भागवत

भगवान के चरणों की शरण क्यों श्रेष्ठ है?

परम शांत मुनि भगवान के चरणों की शरण में रहते हैं; उनके स्पर्श से जीव तुरंत पवित्र होता है, गंगा से पवित्रता समय लेकर मिलती है।

भगवान चरणशरणपवित्रता
श्रीमद्भागवत

कृष्ण नाम लेने का महत्व क्या है?

जन्म-मृत्यु के घोर चक्र में पड़ा जीव भी यदि भगवान के मंगलमय नाम का उच्चारण कर ले, तो तुरंत मुक्त हो सकता है।

कृष्ण नामभगवान नाममुक्ति
श्रीमद्भागवत

भगवान का अवतार क्यों होता है?

भगवान का अवतार जीवों के परम कल्याण और भगवत प्रेममयी समृद्धि के लिये बताया गया है।

भगवान अवतारहरि कथाकृष्ण

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।