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नारायणास्त्र प्रश्नोत्तरी — 34 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित नारायणास्त्र विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 34 प्रश्न

दिव्यास्त्र

नारायणास्त्र हमें क्या सिखाता है?

नारायणास्त्र सिखाता है — अहंकार त्यागो, समर्पण में भी शक्ति है, और हर समस्या का समाधान केवल लड़ाई से नहीं होता। विनम्रता सबसे बड़ा रक्षाकवच है।

नारायणास्त्रशिक्षासमर्पण
दिव्यास्त्र

लक्ष्मण पर नारायणास्त्र का कोई प्रभाव क्यों नहीं पड़ा?

लक्ष्मण जी आदिशेष के अवतार और विष्णु के अंश थे। नारायणास्त्र अपने ही स्वामी के अंश पर प्रहार नहीं कर सकता था इसलिए यह प्रभावहीन रहा।

लक्ष्मणनारायणास्त्रआदिशेष
दिव्यास्त्र

मेघनाद ने लक्ष्मण पर नारायणास्त्र क्यों चलाया?

जब मेघनाद के सभी अस्त्र लक्ष्मण के विरुद्ध विफल हो गए तब उसने अंतिम उपाय के रूप में नारायणास्त्र चलाया।

मेघनादलक्ष्मणनारायणास्त्र
दिव्यास्त्र

भीम के समर्पण करने के बाद क्या हुआ?

जैसे ही भीम ने शस्त्र त्यागकर समर्पण किया नारायणास्त्र तुरंत शांत हो गया। पांडव सेना एक महाविनाश से बच गई और अश्वत्थामा का उद्देश्य विफल रहा।

भीमनारायणास्त्रसमर्पण
दिव्यास्त्र

भीम ने नारायणास्त्र का प्रतिरोध क्यों किया और क्या हुआ?

भीम ने बाहुबल के अहंकार में प्रतिरोध किया जिससे नारायणास्त्र और शक्तिशाली हो गया और विशेष रूप से भीम को लक्षित करने लगा। पांडवों की एक अक्षौहिणी सेना नष्ट हो गई।

भीमनारायणास्त्रप्रतिरोध
दिव्यास्त्र

नारायणास्त्र से पांडव सेना को कैसे बचाया गया?

श्रीकृष्ण की सूझबूझ से पांडव सेना बची। कृष्ण ने सभी को शस्त्र त्यागकर रथ से उतरकर हाथ जोड़कर नारायणास्त्र के प्रति समर्पण करने का आदेश दिया।

नारायणास्त्रपांडव सेनाकृष्ण
दिव्यास्त्र

अश्वत्थामा ने नारायणास्त्र क्यों चलाया?

पिता द्रोणाचार्य की छलपूर्ण मृत्यु से क्रोधित अश्वत्थामा ने प्रतिशोध में पांडव सेना का समूल नाश करने के लिए नारायणास्त्र चलाया।

अश्वत्थामानारायणास्त्रद्रोण वध
दिव्यास्त्र

नारायणास्त्र को शांत करने का क्या तरीका था?

नारायणास्त्र को शांत करने का एकमात्र तरीका था — सभी हथियार त्यागकर रथ से उतरकर दोनों हाथ जोड़कर पूर्ण आत्मसमर्पण करना।

नारायणास्त्रशांत करनाशरणागति
दिव्यास्त्र

दोबारा चलाने पर क्या होता था?

नारायणास्त्र दोबारा चलाने पर यह अस्त्र चलाने वाले की अपनी सेना का विनाश कर देता था। इसलिए इसे केवल एक बार ही प्रयोग किया जा सकता था।

नारायणास्त्रदोबाराखुद की सेना
दिव्यास्त्र

नारायणास्त्र कितनी बार चलाया जा सकता था?

नारायणास्त्र एक युद्ध में केवल एक बार ही चलाया जा सकता था। यह नियम इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए था।

नारायणास्त्रएक बारनियम
दिव्यास्त्र

क्या नारायणास्त्र को कोई अस्त्र रोक सकता था?

नहीं, नारायणास्त्र को कोई अस्त्र नहीं रोक सकता था। केवल पूर्ण आत्मसमर्पण — हथियार त्यागकर हाथ जोड़ना — ही इसका एकमात्र उपाय था।

नारायणास्त्रअजेयप्रतिकार असंभव
दिव्यास्त्र

नारायणास्त्र की सबसे खतरनाक विशेषता क्या है?

नारायणास्त्र की सबसे खतरनाक विशेषता यह है कि प्रतिरोध करने पर यह और शक्तिशाली हो जाता है। जितना ज्यादा लड़ो उतना ज्यादा विनाश।

नारायणास्त्रखतरनाकप्रतिरोध
दिव्यास्त्र

नारायणास्त्र काम कैसे करता था?

नारायणास्त्र के चलते ही आकाश से लाखों चक्र, गदा, त्रिशूल, बाण आदि की एक साथ वर्षा होती थी जो लक्ष्य को चारों ओर से घेर लेते थे।

नारायणास्त्रकार्यप्रणालीशस्त्र वर्षा
दिव्यास्त्र

द्रोणाचार्य ने नारायणास्त्र किसे दिया?

द्रोणाचार्य ने नारायणास्त्र मुख्य रूप से अपने पुत्र अश्वत्थामा को दिया। कुछ मतों के अनुसार अर्जुन को भी इसका ज्ञान दिया था।

द्रोणाचार्यनारायणास्त्रअश्वत्थामा
दिव्यास्त्र

द्रोणाचार्य को नारायणास्त्र कैसे मिला?

द्रोणाचार्य को नारायणास्त्र उनके पिता ऋषि भारद्वाज से मिला था जिन्हें यह भगवान नारायण की कृपा से प्राप्त हुआ था।

द्रोणाचार्यनारायणास्त्रभारद्वाज
दिव्यास्त्र

नारायणास्त्र कैसे मिलता था?

नारायणास्त्र दो तरीकों से मिलता था — भगवान नारायण की कठोर तपस्या करके, या गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से योग्य गुरु से ज्ञान प्राप्त करके।

नारायणास्त्रप्राप्तितपस्या
दिव्यास्त्र

नारायणास्त्र की सबसे अद्भुत बात क्या है?

नारायणास्त्र की सबसे अद्भुत बात यह है कि इसका प्रतिरोध करने पर यह और शक्तिशाली होता जाता है। इससे बचने का एकमात्र उपाय पूर्ण समर्पण है।

नारायणास्त्रअद्भुतप्रतिरोध
दिव्यास्त्र

नारायणास्त्र किसका अस्त्र है?

नारायणास्त्र भगवान विष्णु के नारायण स्वरूप का अस्त्र है। वे ही इसके मूल अधिपति और स्रोत हैं।

नारायणास्त्रनारायणविष्णु
दिव्यास्त्र

नारायणास्त्र क्या है?

नारायणास्त्र भगवान विष्णु का व्यक्तिगत और अमोघ दिव्यास्त्र है जो त्रिलोकी की अंतिम शक्तियों में से एक है। इसका प्रतिरोध करने पर यह और शक्तिशाली होता है।

नारायणास्त्रविष्णुदिव्यास्त्र
मेघनाद चरित्र

मेघनाद के पास कौन-कौन से दिव्य अस्त्र थे

मेघनाद के पास ब्रह्मास्त्र (ब्रह्मा), नारायणास्त्र (विष्णु), पाशुपतास्त्र (शिव) — त्रिदेव के तीनों महास्त्र थे। साथ ही नागपाश, नागास्त्र, अदृश्य दिव्य रथ और अक्षय तरकश भी था।

मेघनाद अस्त्रब्रह्मास्त्रनारायणास्त्र
दिव्यास्त्र

वैष्णवास्त्र और नारायणास्त्र में क्या फर्क है?

वैष्णवास्त्र एकल लक्ष्य पर और विष्णु की कृपा से मिलता था, जबकि नारायणास्त्र अनेक लक्ष्यों पर और एक युद्ध में केवल एक बार प्रयोग होता था।

वैष्णवास्त्रनारायणास्त्रअंतर
अस्त्र शस्त्र

नारायणास्त्र का प्रतिकार क्या है?

नारायणास्त्र का कोई प्रतिकार नहीं है। एकमात्र उपाय है — सभी शस्त्र छोड़कर, मन से भी युद्ध का विचार त्यागकर, हाथ जोड़कर आत्मसमर्पण करना। ऐसा करने पर यह अस्त्र शांत हो जाता है।

नारायणास्त्रप्रतिकारआत्मसमर्पण
अस्त्र शस्त्र

नारायणास्त्र और पाशुपतास्त्र में कौन सा बड़ा है?

दोनों परम समतुल्य महास्त्र हैं — नारायणास्त्र (विष्णु का, कोई प्रतिकार नहीं) और पाशुपतास्त्र (शिव का, ब्रह्मास्त्र को निगल सकता है)। पुराणों में दोनों को समकक्ष बताया गया है।

नारायणास्त्रपाशुपतास्त्रतुलना
दिव्यास्त्र

नारायणास्त्र क्या है

नारायणास्त्र भगवान विष्णु का अजेय दिव्यास्त्र है जो एक साथ हजारों अस्त्र चलाता है। इसे रोकने का एकमात्र उपाय पूर्ण समर्पण है। महाभारत में अश्वत्थामा ने इसे पांडवों पर चलाया था।

नारायणास्त्रविष्णु अस्त्रमहाभारत

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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