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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — 13772 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 13772 प्रश्न

ब्रह्मा और अघोर

ब्रह्मा ने अघोर शिव की शरण कैसे ली?

ब्रह्मा ने अघोर शिव को महादेव जानकर प्रणाम किया, प्राणायाम और ध्यान से महेश्वर को हृदय में धारण किया और उनकी शरण ली।

ब्रह्माअघोरशरणागति
ब्रह्मा और अघोर

ब्रह्मा का वर्ण काला कैसे हुआ?

प्रजासृष्टि की इच्छा से चिंतनमग्न और पुत्रकामना से ध्यानरत होने पर ब्रह्मा का वर्ण काला बताया गया है।

ब्रह्माकृष्णवर्णध्यान
ब्रह्मा और अघोर

ब्रह्मा ने प्रजा-सृष्टि के लिए क्या किया?

ब्रह्मा प्रजासृष्टि की इच्छा से दुःखित होकर विचारमग्न हुए और पुत्र की कामना से ध्यान करने लगे।

ब्रह्माप्रजासृष्टिचिंतन
असित कल्प

सृष्टि से पहले क्या स्थिति बताई गई है?

प्रजासृष्टि से पहले एक हजार दिव्य वर्षों तक सर्वत्र जल ही जल व्याप्त बताया गया है।

सृष्टिजलप्रजासृष्टि
असित कल्प

असित कल्प क्या है?

असित कल्प पीतकल्प के बीत जाने के बाद प्रवृत्त ब्रह्मा का दूसरा कल्प बताया गया है।

असित कल्पकल्पब्रह्मा
अघोर रूप

अघोर शिव का रूप कैसा बताया गया है?

अघोर शिव का रूप कृष्णवर्ण, तेजस्वी, कृष्ण वस्त्र-पगड़ी, कृष्ण मुकुट, यज्ञोपवीत और कृष्ण अंगराग से युक्त बताया गया है।

अघोर रूपकृष्णवर्णकृष्ण वस्त्र
अघोर महिमा

अघोर शिव कौन हैं?

अघोर शिव असित कल्प में कृष्णवर्ण कुमार के रूप में प्रकट हुए महादेव हैं, जिन्हें ब्रह्मा ने देवदेवेश और ब्रह्मस्वरूप माना।

अघोरशिवमहादेव
श्रीमद्भागवत

युधिष्ठिर ने हिंसा के प्रायश्चित पर क्या कहा?

युधिष्ठिर ने कहा कि जिन स्त्रियों के पति और भाई-बंधु मारे गए, उनके प्रति हुए अपराध को गृहस्थ यज्ञों से शुद्ध करना संभव नहीं।

युधिष्ठिरहिंसाप्रायश्चित
श्रीमद्भागवत

युधिष्ठिर को महाभारत युद्ध का पाप क्यों लगा?

युधिष्ठिर को लगा कि उन्होंने नश्वर शरीर के लिए अनेक स्वजनों, गुरुओं और सेनाओं का वध कराया; इसलिए शास्त्र-वचन भी उन्हें संतोष नहीं दे पाया।

युधिष्ठिरयुद्ध पापधर्मयुद्ध
श्रीमद्भागवत

युधिष्ठिर युद्ध के बाद दुखी क्यों थे?

युधिष्ठिर अपने भाई-बंधुओं और स्वजनों के मारे जाने से दुखी थे; उन्हें लगता था कि उन्होंने नश्वर शरीर के लिए अनेक अक्षौहिणी सेनाएँ मरवा दीं।

युधिष्ठिरमहाभारत युद्धशोक
श्रीमद्भागवत

कुंती ने कृष्ण से मोह छुड़ाने की प्रार्थना क्यों की?

कुंती ने यदुवंशियों और पांडवों के प्रति मजबूत ममता को काटने और अपनी बुद्धि को गंगा की धारा की तरह कृष्ण में लगाने की प्रार्थना की।

कुंतीमोहकृष्ण भक्ति
श्रीमद्भागवत

कृष्ण दर्शन से जन्म-मृत्यु कैसे मिटती है?

कुंती के अनुसार विपत्ति में कृष्ण का दर्शन होता है, और कृष्ण के चरणकमल का दर्शन जन्म-मृत्यु के प्रवाह को रोक देता है।

कृष्ण दर्शनजन्म मृत्युकुंती
श्रीमद्भागवत

कृष्ण लीला सुनने का फल क्या है?

कृष्ण लीला को सुनने, गाने, कीर्तन करने और याद करने वाले भक्त शीघ्र ही कृष्ण के चरणकमल का दर्शन पाते हैं, जो जन्म-मृत्यु का प्रवाह रोक देता है।

कृष्ण लीलाश्रवणकीर्तन
श्रीमद्भागवत

कृष्ण अवतार का उद्देश्य क्या है?

कुंती स्तुति में कृष्ण अवतार के कई कारण बताए गए हैं: भक्तों की कीर्ति, देवकी-वसुदेव का वर, दैत्यों का नाश, पृथ्वी का भार हटाना और सुनने-स्मरण योग्य लीला।

कृष्ण अवतारकुंती स्तुतिदैत्य विनाश
श्रीमद्भागवत

कृष्ण ने पांडवों को किन विपत्तियों से बचाया?

कुंती ने कहा कि कृष्ण ने पांडवों को विष, लाक्षागृह की आग, राक्षसों, द्यूतसभा, वनवास, युद्धों और अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से बचाया।

कृष्णपांडवकुंती
श्रीमद्भागवत

विपदः सन्तु नः शश्वत् का अर्थ क्या है?

इस वाक्य का भाव है कि हमारे जीवन में विपत्तियाँ आती रहें, क्योंकि विपत्तियों में कृष्ण का दर्शन होता है और उनका दर्शन जन्म-मृत्यु से मुक्त करता है।

विपदः सन्तु नः शश्वत्कुंती स्तुतिकृष्ण दर्शन
श्रीमद्भागवत

कुंती ने कृष्ण से विपत्ति क्यों मांगी?

कुंती ने विपत्ति इसलिए मांगी क्योंकि विपत्तियों में कृष्ण का दर्शन होता है, और कृष्ण-दर्शन के बाद जन्म-मृत्यु के चक्र में नहीं आना पड़ता।

कुंतीविपत्तिकृष्ण दर्शन
श्रीमद्भागवत

कुंती स्तुति हिंदी अर्थ क्या है?

कुंती स्तुति का भाव है कि कृष्ण परमेश्वर हैं, भक्तों के रक्षक हैं, विपत्ति में उनका दर्शन होता है और मन केवल उन्हीं में लगना चाहिए।

कुंती स्तुति अर्थकृष्णविपदः सन्तु
श्रीमद्भागवत

कुंती स्तुति क्या है?

कुंती स्तुति में कुंती ने कृष्ण को प्रकृति से परे परम पुरुष, भक्तों के रक्षक और जन्म-मृत्यु से छुड़ाने वाले भगवान के रूप में नमस्कार किया।

कुंती स्तुतिकृष्णभक्ति
श्रीमद्भागवत

युधिष्ठिर ने कृष्ण को क्यों रोका?

युधिष्ठिर ने कृष्ण को प्रेम से रोका, क्योंकि वे अपने भाई-बंधुओं की मृत्यु के भारी शोक से मुक्त नहीं हो पा रहे थे।

युधिष्ठिरकृष्णमहाभारत युद्ध
श्रीमद्भागवत

कृष्ण द्वारका क्यों लौटना चाहते थे?

राज्य-संबंधी कार्य पूरे होने के बाद कृष्ण ने द्वारका जाने का विचार किया; उनके भीतर का अलग कारण विस्तार से नहीं बताया गया।

कृष्णद्वारकापांडव
श्रीमद्भागवत

युधिष्ठिर ने अश्वमेध यज्ञ क्यों किए?

कृष्ण ने युधिष्ठिर से तीन अश्वमेध यज्ञ कराए, जिससे उनका पवित्र यश इंद्र के यश की तरह सब ओर फैल गया।

युधिष्ठिरअश्वमेध यज्ञकृष्ण
श्रीमद्भागवत

युधिष्ठिर को राज्य वापस कैसे मिला?

कृष्ण ने युधिष्ठिर को वह राज्य वापस दिलाया जिसे छल से छीन लिया गया था और द्रौपदी का अपमान करने वाले राजाओं का वध कराया।

युधिष्ठिरकृष्णराज्य
श्रीमद्भागवत

कृष्ण ने युद्ध के बाद पांडवों को कैसे संभाला?

कृष्ण ने शोकाकुल लोगों को काल की गति समझाकर सांत्वना दी, युधिष्ठिर को राज्य दिलाया और उनके यश के लिए तीन अश्वमेध यज्ञ कराए।

कृष्णपांडवयुद्ध के बाद

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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