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पूर्वभाग अध्याय 8 प्रश्नोत्तरी — 47 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित पूर्वभाग अध्याय 8 विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 47 प्रश्न

प्राणायाम

प्राणायाम का सही अर्थ क्या है?

प्राण और अपान वायु का निरोध प्राणायाम कहलाता है।

प्राणायामप्राणअपान
प्रत्याहार और ध्यान

ध्यान और समाधि में क्या अंतर है?

ध्येय विषय में चित्त की एकाग्रता ध्यान है; ध्येयमात्र से प्रकाशित देहशून्य स्थिति समाधि है।

ध्यानसमाधिचित्त एकाग्रता
प्रत्याहार और ध्यान

इन्द्रियों को विषयों से कैसे हटाया जाता है?

विषयों में आसक्त इन्द्रियों को शीघ्र उनसे हटाकर इन्द्रियों पर नियंत्रण करना प्रत्याहार है।

प्रत्याहारइन्द्रियनिग्रहविषय
जप और स्वाध्याय

कौन सा जप सबसे श्रेष्ठ माना गया है?

मानस जप सबसे श्रेष्ठ बताया गया है; वाचिक अधम और उपांशु उत्तम कहा गया है।

मानस जपउपांशु जपवाचिक जप
जप और स्वाध्याय

स्वाध्याय में कौन सा जप बताया गया है?

प्रणव का जप स्वाध्याय कहा गया है। यह जप वाचिक, उपांशु और मानस तीन प्रकार का है।

स्वाध्यायप्रणव जपवाचिक जप
शौच और नियम

संतोषी व्यक्ति किसे कहा गया है?

जो व्रती न्यायपूर्वक अर्जित धन से संतुष्ट रहता है और गए धन की चिंता नहीं करता, वह संतोषी है।

संतोषन्यायपूर्वक धनव्रती पुरुष
शौच और नियम

अन्तःशौच कैसे होता है?

वैराग्यरूपी मृत्तिका का लेपन और आत्मज्ञानरूपी जल में स्नान अन्तःशौच कहा गया है।

अन्तःशौचवैराग्यआत्मज्ञान
शौच और नियम

बाहरी शुद्धि से ज्यादा आंतरिक शुद्धि क्यों जरूरी है?

आंतरिक शुद्धि इसलिए श्रेष्ठ है क्योंकि अंतःशौच के बिना बाहरी स्नान और तीर्थजल भी साधक को वास्तविक शुद्ध नहीं करते।

आंतरिक शुद्धिबाहरी शुद्धिअन्तःशौच
शौच और नियम

योग में शुद्धि का सही अर्थ क्या है?

योग में शुद्धि बाह्य और आंतरिक दोनों है, पर आंतरिक शुचिता श्रेष्ठ बताई गई है।

शुद्धिशौचआंतरिक शुचिता
वैराग्य

अमृतत्व पाने का मार्ग क्या बताया गया है?

अमृतत्व त्याग से प्राप्त बताया गया है; कर्म, संतान या द्रव्य से नहीं।

अमृतत्वत्यागवैराग्य
वैराग्य

कामनाएं भोग से क्यों बढ़ती हैं?

कामना भोग से शांत नहीं होती; वह अग्नि में आहुति डालने की तरह और बढ़ती है।

कामनाभोगअग्नि उपमा
वैराग्य

विषय भोगों से मन क्यों नहीं भरता?

विषयों के भोग से इन्द्रियों की तृप्ति नहीं होती और कामना अग्नि की तरह बढ़ती जाती है।

विषय भोगइन्द्रिय तृप्तिवैराग्य
यम

गृहस्थ व्यक्ति ब्रह्मचर्य कैसे रख सकता है?

गृहस्थ के लिये परनारी से मन, वाणी और कर्म से भोग-प्रवृत्ति न रखना और अपनी पत्नी से उचित समय पर ही संसर्ग करना ब्रह्मचर्य है।

गृहस्थ ब्रह्मचर्यस्वदारऋतुकाल
यम

ब्रह्मचर्य का अर्थ क्या है?

यतियों, ब्रह्मचारियों और पत्नीरहित संन्यासियों के लिये मन, वचन और कर्म से मैथुन में प्रवृत्ति न रखना ब्रह्मचर्य है।

ब्रह्मचर्ययतिब्रह्मचारी
यम

चोरी न करना योग में क्यों जरूरी है?

विपत्ति में भी मन, वचन और कर्म से दूसरों का द्रव्य न लेना अस्तेय है।

अस्तेयचोरी न करनामन वचन कर्म
यम

सत्य बोलने का सही तरीका क्या बताया गया है?

जो देखा, सुना, अनुमान या अनुभव किया हो, उसे दूसरों को कष्ट दिए बिना यथार्थ कहना सत्य है।

सत्यवाणीदूसरों को कष्ट न देना
यम

अहिंसा का असली अर्थ क्या बताया गया है?

सभी प्राणियों में आत्मवत् दृष्टि रखकर उनके हित में प्रवृत्त रहना अहिंसा कहा गया है।

अहिंसाआत्मवत दृष्टिप्राणी हित
यम

योग में यम का मतलब क्या है?

तप में प्रवृत्ति और विषय-भोगों से निवृत्ति को यम कहा गया है। अहिंसा इसका पहला हेतु है।

यमतपविषय निवृत्ति
अष्टांग योग

अष्टांग योग क्या होता है?

अष्टांग योग के आठ अंग यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि हैं।

अष्टांग योगयमनियम
योग का स्वरूप

शिव की कृपा से योग और मुक्ति कैसे मिलती है?

चित्त की एकाग्रता, रुद्र का ज्ञान और निर्वाण शिव की कृपा से बताए गए हैं।

शिव कृपायोगमुक्ति
योग का स्वरूप

योग का सही अर्थ क्या बताया गया है?

जीव को परमार्थ तत्त्व का ज्ञान प्राप्त होना योग कहा गया है; चित्तवृत्तियों पर नियंत्रण भी योग बताया गया है।

योगपरमार्थ तत्त्वचित्त एकाग्रता
योगस्थान

हृदय, नाभि और भ्रूमध्य का योग में क्या महत्व है?

हृदय, नाभि और भ्रूमध्य ध्यान और योग-साधना के प्रमुख आंतरिक स्थान बताए गए हैं।

हृदयनाभिभ्रूमध्य
योगस्थान

योग में शरीर के कौन से स्थान बताए गए हैं?

योग के लिये हृत्कमल, मूलाधार और भृकुटियों के मध्य स्थित आवर्त यानी आज्ञाचक्र मुख्य स्थान बताए गए हैं।

योगस्थानहृत्कमलमूलाधार

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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