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श्रीलिङ्गमहापुराण प्रश्नोत्तरी — 578 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित श्रीलिङ्गमहापुराण विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 578 प्रश्न

प्रणव रूप

शिव ओंकार और सर्वज्ञ कैसे हैं?

स्तुति में शिव को भगवान्, सर्पों के पति, ओंकार और सर्वज्ञ कहा गया है।

ओंकारसर्वज्ञशिव
मोक्ष

शिव मोक्ष कैसे देते हैं?

शिव को मोक्ष, मोक्षरूप और मोक्ष प्रदान करने वाला कहा गया है; साथ ही वे आत्मास्वरूप, स्वामी और व्यापक शिव हैं।

मोक्षमोक्षदातामोक्षरूप
सृष्टि-पालन-संहार

शिव सृष्टि, पालन, संहार कैसे करते हैं?

शिव को जल के मध्य स्थित, ब्रह्मा-विष्णु के मध्य प्रकाशमान, सृष्टिकर्ता, पालनकर्ता, संहारकर्ता और मृत्युस्वरूप ईश्वर कहा गया है।

सृष्टिपालनसंहार
विश्वव्यापक शिव

शिव इन्द्रियों के विषयों में कैसे हैं?

शिव को शब्द, स्पर्श, रस और गंध स्वरूप कहा गया है; उन्हें गंधी और गणों का अधिपति भी नमस्कार किया गया है।

शब्दस्पर्शरस
विश्वव्यापक शिव

शिव पंचभूतों में कैसे हैं?

शिव को जल, वायु, तेज, पृथ्वी और अंतरिक्ष में व्याप्त रूप से नमस्कार किया गया है।

पंचभूतशिवजल
लिंग रूप

लिंग और लिंगी क्या हैं?

विष्णु स्तुति में शिव को ऊर्ध्व लिंग, लिंगी, हेमलिंग, जललिंग और शिवलिंग रूप में नमस्कार किया गया है।

लिंगलिंगीऊर्ध्व लिंग
प्रणव रूप

अकार, उकार, मकार क्या हैं?

अकार को परमात्मा, उकार को आदिदेव विद्यादेह और मकार को परमात्मा शिव कहा गया है।

अकारउकारमकार
प्रणव रूप

प्रणवरूप रुद्र कौन हैं?

प्रणवरूप रुद्र अद्वितीय और नाशरहित हैं; स्तुति में अकार, उकार और मकार रूप परमात्मा को भी नमस्कार किया गया है।

प्रणवरूप रुद्ररुद्रओंकार
विष्णु स्तुति

विष्णु ने शिव की स्तुति कैसे की?

विष्णु ने शिव को अनेक नामों और रूपों से नमस्कार किया, जैसे प्रणवरूप रुद्र, महादेव, ईशान, लिंग, लिंगी, ओंकार और सर्वज्ञ।

विष्णुशिव स्तुतिमहेश्वर
विष्णु स्तुति

विष्णु स्तुति क्या है?

विष्णु स्तुति वह स्तोत्र है जिसमें विष्णु ने रुद्र, शिव, महेश्वर, ओंकार, मोक्षदाता और विश्वगर्भ रूपों को नमस्कार किया।

विष्णु स्तुतिमहेश्वरशिव
शिव स्तुति

विष्णु ने शिव की स्तुति क्यों की?

विष्णु ने वेद-वाक्य से शिव को जानकर, उमा-महेश्वर और पाँच मंत्रों का दर्शन पाकर वरदाता ईशान परमेश्वर की स्तुति की।

विष्णुशिव स्तुतिमहादेव
पाँच शिव मंत्र

पाँच शिव मंत्रों का क्या महत्व बताया गया है?

इन पाँच मंत्रों को शिव के अंगों से जोड़ा गया है: ईशान मुकुट, तत्पुरुष मुख, अघोर हृदय, वामदेव गुह्यस्थान और सद्योजात चरण।

पाँच शिव मंत्रईशानतत्पुरुष
पाँच शिव मंत्र

वामदेव मंत्र क्या है?

वामदेव मंत्र सामवेद से उत्पन्न, रक्तवर्ण, तेरह कलाओं से युक्त और छाछठ अक्षरों वाला बताया गया है।

वामदेव मंत्रसामवेदरक्तवर्ण
पाँच शिव मंत्र

सद्योजात मंत्र क्या है?

सद्योजात मंत्र यजुर्वेद से उत्पन्न, आठ कलाओं वाला, श्वेतवर्ण, शान्तिकारक और पैंतीस अक्षरों से युक्त बताया गया है।

सद्योजात मंत्रयजुर्वेदश्वेतवर्ण
पाँच शिव मंत्र

अघोर मंत्र क्या है?

अघोर मंत्र अथर्ववेद से उत्पन्न, आठ कलाओं से युक्त, तैंतीस अक्षरों वाला और कृष्णवर्ण बताया गया है।

अघोर मंत्रअथर्ववेदआठ कला
पाँच शिव मंत्र

तत्पुरुष मंत्र क्या है?

तत्पुरुष मंत्र गायत्री से उत्पन्न, चार कलाओं वाला, चौबीस अक्षरों से युक्त और हरित वर्ण का बताया गया है।

तत्पुरुष मंत्रगायत्रीचार कला
पाँच शिव मंत्र

ईशान मंत्र क्या है?

ईशान मंत्र ओंकार से उत्पन्न, पाँच कलाओं वाला, बुद्धिविवर्धक, धर्म-अर्थ सिद्ध करने वाला और शुद्ध स्फटिक जैसा शुभ्र बताया गया है।

ईशान मंत्रओंकारपाँच कला
शब्दमय शिव

अक्षरों से शिव का शरीर कैसे बताया गया है?

अक्षरों से शिव के अंग बताए गए हैं: अकार मस्तक, आकार ललाट, इकार-ईकार नेत्र, मकार हृदय, हकार आत्मा और क्षकार क्रोध कहा गया है।

अक्षर शरीरशिववर्णमाला
उमा-महेश्वर

उमा-महेश्वर कैसे प्रकट हुए?

ब्रह्मा-विष्णु की वैदिक स्तुति से प्रसन्न होकर महेश्वर लिंग में शब्दमय रूप से प्रकट हुए और उमा सहित दर्शन दिए।

उमा महेश्वरमहेश्वरलिंग
शब्दमय शिव

शब्दमय शिव रूप क्या है?

वेदमंत्रों से स्तुति के बाद महेश्वर लिंग में दिव्य शब्दमय रूप धारण कर प्रकट हुए, जिनका शरीर अक्षरों से बताया गया।

शब्दमय शिवमहेश्वरलिंग
सृष्टि क्रम

आकाश और पृथ्वी की उत्पत्ति कैसे बताई गई है?

स्वर्ण अंड के ऊपरी पवित्र कपाल से आकाश और नीचे के भाग से पाँच लक्षणों वाली पृथ्वी की उत्पत्ति बताई गई है।

आकाशपृथ्वीस्वर्ण अंड
सृष्टि क्रम

स्वर्ण अंड से सृष्टि कैसे हुई?

लिंगरूप प्रणव से बीज योनि में स्थित होकर बढ़ा, स्वर्ण अंड बना और परमेश्वर ने उसे दो भागों में विभाजित किया।

स्वर्ण अंडसृष्टिप्रणव
त्रिदेव और ओम्

ब्रह्मा, विष्णु और शिव का संबंध ओम् से कैसे बताया गया है?

ओम् से अकाररूप ब्रह्मा, उकाररूप विष्णु और मकाररूप नीललोहित शिव का प्रादुर्भाव बताया गया है।

ब्रह्माविष्णुशिव
प्रणव ओम्

प्रणव ओम् को ब्रह्म क्यों कहा गया है?

प्रणव ओम् को रुद्र, परम कारण, सत्य-आनन्द, अमृतरूप परम ब्रह्म और सृष्टिकर्ता लिंगरूप प्रणव का वाचक बताया गया है।

प्रणवओम्ब्रह्म

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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