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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — 13772 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 13772 प्रश्न

लोक परंपरा

तिरुपति बालाजी में रथ सप्तमी पर क्या खास होता है?

तिरुपति बालाजी (तिरुमाला) मंदिर में इसे एक 'मिनी ब्रह्मोत्सव' की तरह मनाया जाता है। भगवान वेंकटेश्वर दिन भर 7 अलग-अलग वाहनों (रथों) पर बैठकर मंदिर के बाहर भक्तों को दर्शन देते हैं।

तिरुपतिब्रह्मोत्सवमलयप्प स्वामी
लोक परंपरा

दक्षिण भारत (कर्नाटक/तमिलनाडु) में रथ सप्तमी कैसे मनाते हैं?

वहां आंगन में सूर्य-रथ की रंगोली बनाकर गाय के गोबर पर मिट्टी के बर्तन में दूध उबाला जाता है। उबलते दूध को शुभ माना जाता है और उसी से 'मीठा पोंगल' (परमान्न) बनाकर सूर्य को भोग लगाते हैं।

परमान्नकोलम रंगोलीदक्षिण भारत
पौराणिक कथा

भगवान कृष्ण के बेटे साम्ब को इस व्रत से क्या फायदा हुआ था?

भगवान कृष्ण के बेटे साम्ब को एक ऋषि के श्राप के कारण 'कुष्ठ रोग' (कोढ़) हो गया था। रथ सप्तमी के दिन सूर्य की विशेष पूजा करने से उसका यह रोग पूरी तरह ठीक हो गया था।

साम्बकुष्ठ रोगश्रीकृष्ण
पौराणिक कथा

इन्दुमती की कथा क्या है और उसने यह व्रत क्यों किया?

भविष्य पुराण के अनुसार, इन्दुमती एक वेश्या थी जिसने जिंदगी में कभी पूजा-पाठ नहीं किया था। बुढ़ापे में मृत्यु के डर से उसने यह व्रत किया, जिसके पुण्य से उसे मोक्ष और 'सूर्य-लोक' मिला।

इन्दुमतीभविष्य पुराणमोक्ष
रथ का रहस्य

सूर्य के रथ में कितने पहिए हैं और वे क्या दर्शाते हैं?

सूर्य के रथ में सिर्फ 1 पहिया (संवत्सर) होता है जो 1 साल का प्रतीक है। इस पहिए में 12 तीलियां (अरे) होती हैं जो साल के 12 महीनों और 12 राशियों को दिखाती हैं।

एक पहियासंवत्सर12 अरे
रथ का रहस्य

सूर्य के रथ के सारथी (ड्राइवर) 'अरुण' का क्या मतलब है?

सारथी 'अरुण' सुबह की उस लालिमा के प्रतीक हैं जो सूरज निकलने से पहले आसमान में छा जाती है। उनका रूप दर्शाता है कि अज्ञान के अंधेरे से ज्ञान का प्रकाश एकाएक नहीं, धीरे-धीरे आता है।

सारथी अरुणउषःकालज्ञान
रथ का रहस्य

भगवान सूर्य के रथ के सात (7) घोड़े किसके प्रतीक हैं?

ये 7 घोड़े वेदों के 7 छंदों, सूर्य के प्रकाश के 7 रंगों, हफ्ते के 7 दिनों और इंसान के शरीर के 7 चक्रों की रहस्यमयी और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के प्रतीक हैं।

सप्ताश्वसात घोड़ेदार्शनिक प्रतीक
व्रत नियम

इस दिन कौन से काम बिल्कुल नहीं करने चाहिए (निषेध)?

इस दिन सरसों के तेल की मालिश करना, दिन में सोना, मांस-मदिरा खाना, झूठ बोलना और बेवजह गुस्सा करना शास्त्रों में महापाप माना गया है।

निषेधतेल मालिशतामसिक
आहार नियम

रथ सप्तमी के व्रत में कौन सा खाने का नियम सबसे जरूरी है?

इस व्रत में 'नमक' खाना बिल्कुल मना होता है। इसे 'अलवण व्रत' (बिना नमक का व्रत) कहा जाता है। नमक छोड़ने से शरीर शुद्ध होता है और व्रत का पूरा फल मिलता है।

अलवण व्रतनमक निषेधनिराहार
पूजन विधान

रथ सप्तमी के स्नान में किन पत्तों का इस्तेमाल होता है और कैसे?

इस दिन नहाते समय 'आक' या 'मदार' (अर्क) के 7 पत्तों का इस्तेमाल होता है। नहाते समय इन 7 पत्तों को सिर, कंधों, घुटनों और पैरों पर रखकर पाप-नाशक मंत्र के साथ पानी डाला जाता है।

अर्क-पत्रस्नान विधिआक के पत्ते
तिथि और मुहूर्त

रथ सप्तमी की पूजा और स्नान का सबसे शुभ समय क्या है?

इस दिन स्नान और पूजा के लिए 'अरुणोदय काल' सबसे शुभ माना जाता है, जो सुबह सूरज निकलने (सूर्योदय) से लगभग डेढ़ घंटे (1 घंटा 36 मिनट) पहले का समय होता है।

अरुणोदय कालशुभ समयस्नान मुहूर्त
नाम का कारण

रथ सप्तमी को 'आरोग्य सप्तमी' क्यों कहते हैं?

इस दिन सूर्य की पूजा और अर्क के पत्तों से विशेष स्नान करने से चर्म रोग और सात जन्मों की बीमारियां दूर होती हैं, इसलिए इसे स्वास्थ्य देने वाली 'आरोग्य सप्तमी' कहते हैं।

आरोग्य सप्तमीचर्म रोगबीमारी नाश
नाम का कारण

इसे 'सूर्य-जयंती' क्यों कहा जाता है?

भविष्य पुराण के अनुसार इसी दिन महर्षि कश्यप और माता अदिति के घर भगवान सूर्य देव का प्राकट्य (जन्म) हुआ था, इसलिए इसे सूर्य का जन्मदिन (सूर्य-जयंती) भी कहते हैं।

सूर्य जयंतीजन्म दिवसमहर्षि कश्यप
नाम का कारण

इस दिन को 'रथ सप्तमी' क्यों कहा जाता है?

इस दिन भगवान सूर्य अपने सात घोड़ों वाले दिव्य रथ पर सवार होकर नई ऊर्जा के साथ उत्तर दिशा (उत्तरायण) की ओर बढ़ते हैं, इसलिए इसे रथ सप्तमी कहते हैं।

रथ संचालनउत्तरायणसप्ताश्व
परिचय

रथ सप्तमी के अन्य नाम क्या हैं?

शास्त्रों और अलग-अलग राज्यों में इस दिन को 'अचला सप्तमी', 'सूर्य-जयंती', 'आरोग्य सप्तमी' और 'माघ सप्तमी' के पवित्र नामों से भी जाना जाता है।

अचला सप्तमीसूर्य-जयंतीआरोग्य सप्तमी
परिचय

रथ सप्तमी क्या है और यह कब मनाई जाती है?

माघ महीने के शुक्ल पक्ष की 7वीं तिथि (सप्तमी) को रथ सप्तमी मनाई जाती है। यह भगवान सूर्य देव की पूजा का सबसे बड़ा और पवित्र दिन है, जिसका पुण्य सूर्य-ग्रहण के बराबर होता है।

रथ सप्तमीमाघ माससूर्य पूजा
रामचरितमानस — बालकाण्ड

रामचरितमानस में कथा-वक्ता और श्रोता की कितनी जोड़ियाँ हैं?

चार जोड़ियाँ (चार घाट) — (1) शिव-पार्वती, (2) काकभुशुण्डि-गरुड़, (3) याज्ञवल्क्य-भरद्वाज, (4) तुलसीदास-संत। 'सुठि सुंदर संबाद बर बिरचे बुद्धि बिचारि। तेइ एहि पावन सुभग सर घाट मनोहर चारि॥'

बालकाण्डचार संवादकथा जोड़ियाँ
रामचरितमानस — बालकाण्ड

रामचरितमानस में मुख्य छन्द कौन से हैं?

मुख्य छन्द — (1) चौपाई (सर्वाधिक, कथा वाहक), (2) दोहा (सार-संक्षेप), (3) सोरठा (दोहे का उल्टा), (4) छन्द (विशेष अवसरों पर, गेय), (5) श्लोक (संस्कृत, मंगलाचरण)। चौपाई-दोहा मिलकर कथा चलती है।

बालकाण्डछन्द प्रकारचौपाई
रामचरितमानस — बालकाण्ड

रामचरितमानस की टीका (गीता प्रेस संस्करण) किसने लिखी?

श्री हनुमानप्रसाद पोद्दारजी ने — गीता प्रेस गोरखपुर के संस्थापक-सम्पादक। यह 'सटीक' संस्करण है जिसमें मूल पाठ के नीचे हिन्दी अर्थ-व्याख्या है। इसी टीका से सभी उत्तर सत्यापित।

बालकाण्डगीता प्रेसहनुमानप्रसाद पोद्दार
रामचरितमानस — बालकाण्ड

रामचरितमानस किसने लिखी?

गोस्वामी तुलसीदासजी ने — 'रामचरितमानस कबि तुलसी।' संवत् 1631-1633 (1574-1576 ई.) में रचना। अयोध्या में शुरू, काशी में समर्पित। हिन्दी साहित्य के महानतम कवि।

बालकाण्डतुलसीदासरचनाकार
रामचरितमानस — बालकाण्ड

बालकाण्ड रामचरितमानस का सबसे बड़ा काण्ड है — सही या गलत?

सही — बालकाण्ड सबसे बड़ा काण्ड है। गीता प्रेस संस्करण में पृष्ठ 17-340 (~323 पृष्ठ)। ~361 दोहे + सैकड़ों चौपाइयाँ। मंगलाचरण से लेकर विवाह-अयोध्या वापसी तक सब शामिल।

बालकाण्डसबसे बड़ा काण्डसंरचना
रामचरितमानस — बालकाण्ड

रामचरितमानस के सात काण्डों के नाम क्या हैं?

(1) बालकाण्ड, (2) अयोध्याकाण्ड, (3) अरण्यकाण्ड, (4) किष्किन्धाकाण्ड, (5) सुन्दरकाण्ड, (6) लंकाकाण्ड, (7) उत्तरकाण्ड। 'सप्त प्रबंध सुभग सोपाना' — मानस सरोवर की सात सुन्दर सीढ़ियाँ।

बालकाण्डसात काण्ड नामसोपान
रामचरितमानस — बालकाण्ड

रामचरितमानस में कुल कितने काण्ड हैं?

सात काण्ड — बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, लंकाकाण्ड, उत्तरकाण्ड। 'सप्त प्रबंध सुभग सोपाना' — सात सोपान (सीढ़ियाँ) मानस सरोवर की।

बालकाण्डसात काण्डसंरचना
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सीता-राम विवाह तय होने पर राजा जनक ने किसे दूत बनाकर भेजा?

विशिष्ट नाम मानस में नहीं — जनक ने विश्वामित्रजी की सलाह पर दूत भेजे। दूतों ने दशरथ को सब समाचार सुनाये — धनुष भंग, जयमाला, बारात का निमन्त्रण। दशरथ प्रसन्न हुए, बारात की तैयारी शुरू।

बालकाण्डदूतजनक

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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