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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — 13772 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 13772 प्रश्न

रामचरितमानस — बालकाण्ड

'जसि रघुबीर ब्याह बिधि बरनी। सकल कुअँर ब्याहे तेहिं करनी' — इसका अर्थ?

अर्थ — रामजी के विवाह की जो विधि बताई, उसी रीति से सब राजकुमार (भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न) भी विवाहे गये। चारों विवाह एक ही वेदविधि, एक मण्डप, एक अवसर पर। दहेज से मण्डप सोने-मणियों से भरा।

बालकाण्डचौपाई अर्थचारों विवाह
रामचरितमानस — बालकाण्ड

राजा जनक और राजा दशरथ का मिलन कैसा था?

अत्यन्त प्रेमपूर्ण — जनक ने भव्य स्वागत किया, प्रेम से गले लगे। 'इन्ह कै प्रीति परसपर पावनि। कहि न जाइ मन भाव सुहावनि' — पवित्र प्रीति वाणी से कही नहीं जा सकती। जनक ने कहा — ब्रह्म-जीव जैसा स्वाभाविक प्रेम।

बालकाण्डजनक दशरथ मिलनप्रेम
रामचरितमानस — बालकाण्ड

बारात अयोध्या से कब और कैसे चली?

गुरु वसिष्ठजी की आज्ञा पर शुभ मुहूर्त में — 'सजहु बारात बजाइ निसाना।' हाथी-घोड़े-रथ सजाये, ब्राह्मण-मुनि-सेना साथ लिये। भव्य बारात अयोध्या से जनकपुर चली।

बालकाण्डबारात प्रस्थानअयोध्या
रामचरितमानस — बालकाण्ड

परशुरामजी ने जाते समय क्या कहा?

पुलकित-प्रफुल्लित होकर स्तुति — 'जय रघुबंस बनज बन भानू।' वैष्णव धनुष रामजी को दिया, प्रणाम किया और प्रसन्नतापूर्वक तपोवन चले गये। सभा में आनन्द छा गया।

बालकाण्डपरशुराम विदाराम स्तुति
रामचरितमानस — बालकाण्ड

परशुरामजी और लक्ष्मणजी के संवाद में विश्वामित्रजी ने क्या भूमिका निभाई?

विश्वामित्रजी ने बीच-बचाव किया। रामजी ने इशारे से लक्ष्मण को शान्त कर पास बैठाया। फिर रामजी ने स्वयं मृदु-विनीत वाणी से परशुरामजी से बात करके शान्ति स्थापित की — मर्यादा पुरुषोत्तम का आदर्श।

बालकाण्डविश्वामित्रमध्यस्थता
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'बहु धनुही तोरी लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं' — किसने कहा?

लक्ष्मणजी ने परशुरामजी से कहा — बचपन में बहुत धनुष तोड़े, कभी ऐसा क्रोध नहीं हुआ। प्रसिद्ध व्यंग्य — शिवजी के दिव्य धनुष को 'धनुही' (साधारण छोटा धनुष) कहा।

बालकाण्डलक्ष्मणपरशुराम
रामचरितमानस — बालकाण्ड

परशुरामजी ने अपना वैष्णव धनुष किसे दिया?

श्रीरामजी को — 'राम रमापति कर धनु लेहू। खेंचहु मिटै मोर संदेहू।' धनुष देने लगे तो वह स्वयं रामजी के पास चला गया — इससे परशुरामजी को निश्चय हुआ कि ये साक्षात् विष्णु हैं।

बालकाण्डवैष्णव धनुषपरशुराम
रामचरितमानस — बालकाण्ड

परशुरामजी ने किन-किन क्षत्रियों/राजाओं को पहले मारा था?

इक्कीस बार पृथ्वी क्षत्रियविहीन की। सहस्रबाहु (हज़ार भुजाओं वाला) को भी मारा। पिता जमदग्नि की हत्या का प्रतिशोध। 'बिस्व बिदित छत्रिय कुल द्रोही' — संसार जानता है मैं क्षत्रिय कुल का शत्रु हूँ।

बालकाण्डपरशुरामइक्कीस बार
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'भरे भुवन घोर कठोर रव रबि बाजि तजि मारगु चले' — इसका अर्थ?

अर्थ — भयंकर कठोर ध्वनि से सब लोक भरे, सूर्य के घोड़े मार्ग छोड़ भटके, दिग्गज चिंघाड़े, पृथ्वी डोली, शेष-वाराह-कच्छप कलमलाये। धनुष भंग की ध्वनि से सारी सृष्टि काँप उठी।

बालकाण्डछन्द अर्थधनुष भंग ध्वनि
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'कोदंड खण्डेउ राम तुलसी जयति बचन उचारहीं' — इसका अर्थ?

अर्थ — तुलसीदासजी कहते हैं — जब सबको निश्चय हुआ कि रामजी ने कोदण्ड (शिवजी का धनुष) तोड़ डाला, तब सब 'जयति' (जय हो) बोलने लगे। धनुष भंग के क्षण की जयकार।

बालकाण्डछन्द अर्थधनुष भंग
रामचरितमानस — बालकाण्ड

विश्वामित्रजी ने श्रीरामजी से धनुष तोड़ने के लिये क्या कहा?

'उठहु राम भंजहु भवचापा। मेटहु तात जनक परितापा' — उठो राम, शिवजी का धनुष तोड़ो, जनक का सन्ताप मिटाओ। गुरु की आज्ञा पर रामजी उठे और सहज भाव से धनुष तोड़ दिया।

बालकाण्डविश्वामित्र आज्ञाधनुष भंग
रामचरितमानस — बालकाण्ड

लक्ष्मणजी ने पृथ्वी को वीरविहीन कहने पर क्या प्रतिक्रिया दी?

लक्ष्मणजी ने क्रोध से कहा — ब्रह्माण्ड गेंद-सा उठा लूँ, मेरु मूली-सा तोड़ दूँ, यह धनुष तो क्या! वचन बोलते ही पृथ्वी डगमगाई, दिग्गज काँपे। सब डरे, सीता हर्षित, जनक सकुचाये।

बालकाण्डलक्ष्मणवीरविहीन
व्रत फल

अनंत चतुर्दशी व्रत करने और दान देने से क्या फल मिलता है?

इस व्रत से पाप मिटते हैं, गरीबी दूर होती है, अकाल मृत्यु का डर खत्म होता है और जीवन के अंत में भगवान विष्णु के धाम (मोक्ष) की प्राप्ति होती है।

पाप मुक्तिअक्षय फलमोक्ष
पूजन विधान

अनंत सूत्र बांधते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए?

धागा बांधते समय मंत्र बोलना चाहिए— 'अनन्तसंसारमहासमुद्रे मग्नान् समभ्युद्धर वासुदेव...'। इसका मतलब है: हे वासुदेव, इस संसार रूपी बड़े समुद्र से मुझे बचाइए।

मंत्रवासुदेवप्रार्थना
पूजन विधान

अनंत चतुर्दशी की पूजा में मालपुआ और खीर का भोग क्यों लगता है?

अग्नि पुराण के नियम के अनुसार इस दिन लगभग 1 किलो आटे का मालपुआ बनाना चाहिए, जिसका आधा हिस्सा ब्राह्मण को दान देना और आधा खुद प्रसाद के रूप में खाना शुभ माना गया है।

मालपुआखीरअग्नि पुराण
पूजन विधान

अनंत चतुर्दशी के दिन शेषनाग की पूजा क्यों की जाती है?

क्योंकि शेषनाग भगवान विष्णु की शय्या (बिस्तर) हैं और उन्हीं के ऊपर भगवान आराम करते हुए दुनिया चलाते हैं। घास (दूर्वा) से शेषनाग बनाकर कलश पर उनकी पूजा होती है।

शेषनागकाल शक्तिकलश
जैन परम्परा

जैन धर्म में अनंत चतुर्दशी पर्व का क्या महत्व है?

जैन धर्म में यह दिन 14वें तीर्थंकर भगवान 'अनन्तनाथ' को समर्पित है। इस दिन दशलक्षण पर्व का समापन होता है और लोग उपवास रखकर पूजा करते हैं।

जैन धर्मअनन्तनाथदशलक्षण पर्व
सांस्कृतिक समन्वय

गणेश विसर्जन और अनंत चतुर्दशी का आपस में क्या कनेक्शन है?

दार्शनिक रूप से इसका मतलब है कि भगवान का 'साकार रूप' (गणेश जी की मूर्ति) अंत में 'अरूप और अनंत सत्ता' (भगवान विष्णु) में जाकर मिल जाता है।

गणेश विसर्जनलोकमान्य तिलकअरूप
उद्यापन

अनंत चतुर्दशी व्रत का उद्यापन कितने साल बाद करना चाहिए?

इस व्रत का उद्यापन लगातार 14 साल तक व्रत करने के बाद किया जाता है। उद्यापन में 14 ब्राह्मणों को भोजन कराकर उन्हें वस्त्र और दान दिया जाता है।

उद्यापन विधि14 वर्षपूर्णता
नियम

धागा (अनंत सूत्र) टूट जाए या अशुद्ध हो जाए तो क्या करना चाहिए?

धागा टूटने पर भगवान विष्णु से माफी मांगते हुए उनके नाम का जाप करना चाहिए और पूजा करके एक नया अनंत सूत्र हाथ में बांध लेना चाहिए।

अशुद्ध धागाप्रायश्चितनया सूत्र
नियम

अनंत सूत्र कितने दिनों तक बांध कर रखना चाहिए?

अनंत सूत्र को कम से कम 14 दिनों तक हाथ में बांध कर रखना चाहिए। कुछ लोग इसे पूरे एक साल तक पहनते हैं और अगली अनंत चतुर्दशी पर ही बदलते हैं।

धारण अवधि14 दिनविसर्जन
पौराणिक कथा

महाभारत में पांडवों ने अनंत चतुर्दशी का व्रत क्यों किया था?

वनवास की कठिनाइयां दूर करने और अपना खोया हुआ राज्य वापस पाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर पांडवों ने 14 साल तक यह व्रत किया था।

पांडवश्रीकृष्णमहाभारत
पौराणिक कथा

कौण्डिन्य ऋषि द्वारा अनंत सूत्र (धागा) जलाने का क्या परिणाम हुआ था?

धागा जलाने से भगवान विष्णु का अपमान हुआ, जिससे ऋषि की सारी संपत्ति नष्ट हो गई और वे एकदम गरीब हो गए। भूल सुधारने के लिए उन्हें 14 साल तक यह व्रत करना पड़ा।

अपमानदरिद्रताप्रायश्चित
पौराणिक कथा

सुशीला और कौण्डिन्य ऋषि की अनंत चतुर्दशी कथा क्या है?

ब्राह्मण की पुत्री सुशीला ने शादी के बाद यमुना तट पर यह व्रत किया था, जिसके चमत्कार से उसके पति कौण्डिन्य ऋषि का आश्रम अपार धन-संपत्ति और वैभव से भर गया था।

सुशीलाकौण्डिन्य ऋषिमूल कथा

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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