विस्तृत उत्तर
इस दिव्य रथ के सारथी का नाम 'अरुण' है। अरुण पक्षिराज गरुड़ के बड़े भाई हैं और वे उदीयमान सूर्य की लालिमा (Dawn) के प्रतीक हैं। पौराणिक कथाओं में अरुण का शारीरिक रूप से अपूर्ण (निचला धड़ रहित) होना एक गहरा दार्शनिक प्रतीक है। यह यह दर्शाता है कि अज्ञान के गहरे अंधकार से पूर्ण ज्ञान का उदय (सूर्य) एकाएक नहीं होता, बल्कि अरुण की लालिमा की तरह धीरे-धीरे (क्रमशः) होता है। अरुण जीवन में ज्ञान के आगमन का पूर्व-संकेत हैं।





