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श्रीलिङ्गमहापुराण प्रश्नोत्तरी — 578 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित श्रीलिङ्गमहापुराण विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 578 प्रश्न

प्रणव ओम्

अकार, उकार और मकार का क्या अर्थ है?

अकार से ब्रह्मा, उकार से विष्णु और मकार से परमेश्वर नीललोहित शिव का प्रादुर्भाव बताया गया है।

अकारउकारमकार
प्रणव ओम्

ओम् नाद कैसे प्रकट हुआ?

ब्रह्मा और विष्णु के प्रणाम और विचार के बाद वहाँ स्पष्ट प्लुत स्वर से ओम्-ओम् नाद सुनाई पड़ा।

ओम्नादप्रणव
लिंग तत्त्व

शिवलिंग का आदि और अंत क्यों नहीं मिला?

लिंग क्षय-वृद्धि से रहित, अव्यक्त और आदि-मध्य-अन्त से हीन था, इसलिए उसका मूल या अंत नहीं मिला।

आदि अंतअनन्त लिंगज्योतिर्लिंग
लिंग अन्वेषण

ब्रह्मा ने हंस रूप क्यों लिया?

ब्रह्मा ने अग्नि-स्तंभ रूप लिंग का ऊपरी अंत खोजने के लिए हंस रूप धारण किया।

ब्रह्माहंस रूपलिंग अंत
लिंग अन्वेषण

विष्णु ने वाराह रूप क्यों लिया?

विष्णु ने अग्नि-स्तंभ रूप लिंग का मूल खोजने के लिए वाराह रूप धारण किया और नीचे की ओर गए।

विष्णुवाराह रूपलिंग मूल
लिंग अन्वेषण

ब्रह्मा और विष्णु शिवलिंग का अंत क्यों नहीं पा सके?

वह लिंग आदि-मध्य-अन्त से हीन और अवर्णनीय था, इसलिए ब्रह्मा ऊपर जाकर भी अंत और विष्णु नीचे जाकर भी मूल नहीं पा सके।

ब्रह्माविष्णुअनादि अनन्त
ज्योतिर्लिंग

ज्योतिर्मय अग्नि-स्तंभ क्या था?

ज्योतिर्मय अग्नि-स्तंभ वही लिंग था जो ब्रह्मा-विष्णु के कलह को दूर करने और ज्ञान देने के लिए प्रकट हुआ।

ज्योतिर्मय अग्नि स्तंभलिंगब्रह्मा
प्रलय वर्णन

प्रलय जल में विष्णु कैसे थे?

प्रलय जल में विष्णु योगात्मा, विश्वात्मा, सर्वात्मा, नारायण और शेषनाग की शय्या पर शयन करते हुए बताए गए हैं।

विष्णुप्रलय जलनारायण
प्रलय वर्णन

प्रलय के समय संसार कैसा था?

प्रलय के समय अनावृष्टि से स्थावर पदार्थ सूख गए, प्राणी सूर्य की किरणों से दग्ध हुए और चारों ओर समुद्र ही समुद्र हो गया।

प्रलयअनावृष्टिसागर
ब्रह्मा-विष्णु विवाद

ब्रह्मा और विष्णु में विवाद क्यों हुआ?

विष्णु की माया से मोहित होकर ब्रह्मा और विष्णु दोनों ने स्वयं को सृष्टि, पालन और संहार का कर्ता कहा, इसलिए विवाद हुआ।

ब्रह्माविष्णुविवाद
लिंग तत्त्व

लिंगी किसे कहा गया है?

परमेश्वर को लिंगी कहा गया है, जबकि प्रधान को लिंग कहा गया है।

लिंगीपरमेश्वरलिंग
लिंग तत्त्व

शिवलिंग क्या है?

लिंग को प्रधान कहा गया है और आगे वही लिंगरूप प्रणव सभी लोकों की सृष्टि करने वाला बताया गया है।

शिवलिंगलिंगप्रधान
लिंगोद्भव

शिवलिंग की उत्पत्ति कैसे हुई?

ब्रह्मा और विष्णु के विवाद को दूर करने तथा ज्ञान देने के लिए समुद्र में ज्योतिर्मय, आदि-अन्तहीन लिंग प्रकट हुआ।

शिवलिंगलिंगोद्भवब्रह्मा
अघोर मंत्र

अघोर मंत्र का रोज जप क्यों करें?

सभी पापों से मुक्ति के लिए ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य को अघोर मंत्र का नित्य जप करने के लिए कहा गया है।

अघोर मंत्रनित्य जपद्विज
पाप मुक्ति

जन्म-जन्मांतर के पाप कैसे मिटते हैं?

अघोर मंत्र से अभिमंत्रित पंचगव्य, हवन, शिवस्नान, उपवास, पंचगव्य पान और गायत्री जप की विधि से जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति कही गई है।

जन्म जन्मांतर पापअघोर मंत्रपंचगव्य
प्रायश्चित विधि

उपवास के बाद क्या करना चाहिए?

दिन-रात उपवास के बाद सुबह स्नान कर ब्रह्मकूर्च-विधि से बने पंचगव्य का पान, आचमन और शिव के आगे गायत्री जप करना चाहिए।

उपवासपंचगव्य पानआचमन
शिव स्नान

शिव स्नान की विधि क्या है?

अघोर मंत्र जपते हुए आठ द्रोण घी से देवेश शिव को स्नान कराकर बाद में शुद्ध जल से स्नान कराने का विधान है।

शिव स्नानघी स्नानअघोर मंत्र
हवन विधि

अघोर मंत्र से हवन कैसे करें?

अघोर मंत्र जपकर घी, चरु, समिध, तिल, यव और धान्य से अलग-अलग सात-सात आहुति देने का विधान है।

अघोर मंत्रहवनघी
पंचगव्य विधि

पंचगव्य विधि क्या है?

पंचगव्य विधि में कपिला गाय का मूत्र, गोबर, घी, दूध, दही और कुशजल लेकर अघोर मंत्र से अभिमंत्रित करने का विधान है।

पंचगव्यकपिला गायअघोर मंत्र
जप विधान

मानस, उपांशु और वाचिक जप कितना बताया गया है?

संसर्गजन्य पाप के लिए एक लाख मानस जप, उसका चार गुना उपांशु जप और आठ गुना वाचिक जप बताया गया है।

मानस जपउपांशु जपवाचिक जप
संसर्ग दोष

पापी के संपर्क का दोष कैसे मिटता है?

पापी के संपर्क से लगे दोष के लिए दस हजार जप बताया गया है; संसर्गजन्य पाप शमन के लिए मानस, उपांशु या वाचिक जप का विधान भी है।

संसर्ग दोषपापी का संपर्कअघोर मंत्र
पाप प्रायश्चित

चोरी के पाप से मुक्ति कैसे मिलती है?

ब्राह्मण का धन हरण करने वाले और स्वर्ण चोरी करने वाले के लिए दस लाख अघोर मंत्र जप से पापमुक्ति बताई गई है।

चोरीस्वर्ण चोरीब्राह्मण धन
दैनिक आचार

बिना स्नान-पूजा भोजन करने का उपाय क्या है?

बिना स्नान, गायत्री-जप, अग्निहोत्र या देव-अतिथि भोजन कराए बिना भोजन करने वाले द्विज के लिए एक हजार जप बताया गया है।

बिना स्नान भोजनगायत्री जपअग्निहोत्र
महापातक प्रायश्चित

सुरापान का प्रायश्चित क्या है?

सुरापान करने वाले के लिए एक लाख अघोर मंत्र जप और वारुणी पीने वाले के लिए पचास हजार जप बताया गया है।

सुरापानमद्यपानअघोर मंत्र

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।