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पूर्वभाग अध्याय 17 प्रश्नोत्तरी — 27 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित पूर्वभाग अध्याय 17 विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 27 प्रश्न

शिव स्तुति

विष्णु ने शिव की स्तुति क्यों की?

विष्णु ने वेद-वाक्य से शिव को जानकर, उमा-महेश्वर और पाँच मंत्रों का दर्शन पाकर वरदाता ईशान परमेश्वर की स्तुति की।

विष्णुशिव स्तुतिमहादेव
पाँच शिव मंत्र

पाँच शिव मंत्रों का क्या महत्व बताया गया है?

इन पाँच मंत्रों को शिव के अंगों से जोड़ा गया है: ईशान मुकुट, तत्पुरुष मुख, अघोर हृदय, वामदेव गुह्यस्थान और सद्योजात चरण।

पाँच शिव मंत्रईशानतत्पुरुष
पाँच शिव मंत्र

वामदेव मंत्र क्या है?

वामदेव मंत्र सामवेद से उत्पन्न, रक्तवर्ण, तेरह कलाओं से युक्त और छाछठ अक्षरों वाला बताया गया है।

वामदेव मंत्रसामवेदरक्तवर्ण
पाँच शिव मंत्र

सद्योजात मंत्र क्या है?

सद्योजात मंत्र यजुर्वेद से उत्पन्न, आठ कलाओं वाला, श्वेतवर्ण, शान्तिकारक और पैंतीस अक्षरों से युक्त बताया गया है।

सद्योजात मंत्रयजुर्वेदश्वेतवर्ण
पाँच शिव मंत्र

अघोर मंत्र क्या है?

अघोर मंत्र अथर्ववेद से उत्पन्न, आठ कलाओं से युक्त, तैंतीस अक्षरों वाला और कृष्णवर्ण बताया गया है।

अघोर मंत्रअथर्ववेदआठ कला
पाँच शिव मंत्र

तत्पुरुष मंत्र क्या है?

तत्पुरुष मंत्र गायत्री से उत्पन्न, चार कलाओं वाला, चौबीस अक्षरों से युक्त और हरित वर्ण का बताया गया है।

तत्पुरुष मंत्रगायत्रीचार कला
पाँच शिव मंत्र

ईशान मंत्र क्या है?

ईशान मंत्र ओंकार से उत्पन्न, पाँच कलाओं वाला, बुद्धिविवर्धक, धर्म-अर्थ सिद्ध करने वाला और शुद्ध स्फटिक जैसा शुभ्र बताया गया है।

ईशान मंत्रओंकारपाँच कला
शब्दमय शिव

अक्षरों से शिव का शरीर कैसे बताया गया है?

अक्षरों से शिव के अंग बताए गए हैं: अकार मस्तक, आकार ललाट, इकार-ईकार नेत्र, मकार हृदय, हकार आत्मा और क्षकार क्रोध कहा गया है।

अक्षर शरीरशिववर्णमाला
उमा-महेश्वर

उमा-महेश्वर कैसे प्रकट हुए?

ब्रह्मा-विष्णु की वैदिक स्तुति से प्रसन्न होकर महेश्वर लिंग में शब्दमय रूप से प्रकट हुए और उमा सहित दर्शन दिए।

उमा महेश्वरमहेश्वरलिंग
शब्दमय शिव

शब्दमय शिव रूप क्या है?

वेदमंत्रों से स्तुति के बाद महेश्वर लिंग में दिव्य शब्दमय रूप धारण कर प्रकट हुए, जिनका शरीर अक्षरों से बताया गया।

शब्दमय शिवमहेश्वरलिंग
सृष्टि क्रम

आकाश और पृथ्वी की उत्पत्ति कैसे बताई गई है?

स्वर्ण अंड के ऊपरी पवित्र कपाल से आकाश और नीचे के भाग से पाँच लक्षणों वाली पृथ्वी की उत्पत्ति बताई गई है।

आकाशपृथ्वीस्वर्ण अंड
सृष्टि क्रम

स्वर्ण अंड से सृष्टि कैसे हुई?

लिंगरूप प्रणव से बीज योनि में स्थित होकर बढ़ा, स्वर्ण अंड बना और परमेश्वर ने उसे दो भागों में विभाजित किया।

स्वर्ण अंडसृष्टिप्रणव
त्रिदेव और ओम्

ब्रह्मा, विष्णु और शिव का संबंध ओम् से कैसे बताया गया है?

ओम् से अकाररूप ब्रह्मा, उकाररूप विष्णु और मकाररूप नीललोहित शिव का प्रादुर्भाव बताया गया है।

ब्रह्माविष्णुशिव
प्रणव ओम्

प्रणव ओम् को ब्रह्म क्यों कहा गया है?

प्रणव ओम् को रुद्र, परम कारण, सत्य-आनन्द, अमृतरूप परम ब्रह्म और सृष्टिकर्ता लिंगरूप प्रणव का वाचक बताया गया है।

प्रणवओम्ब्रह्म
प्रणव ओम्

अकार, उकार और मकार का क्या अर्थ है?

अकार से ब्रह्मा, उकार से विष्णु और मकार से परमेश्वर नीललोहित शिव का प्रादुर्भाव बताया गया है।

अकारउकारमकार
प्रणव ओम्

ओम् नाद कैसे प्रकट हुआ?

ब्रह्मा और विष्णु के प्रणाम और विचार के बाद वहाँ स्पष्ट प्लुत स्वर से ओम्-ओम् नाद सुनाई पड़ा।

ओम्नादप्रणव
लिंग तत्त्व

शिवलिंग का आदि और अंत क्यों नहीं मिला?

लिंग क्षय-वृद्धि से रहित, अव्यक्त और आदि-मध्य-अन्त से हीन था, इसलिए उसका मूल या अंत नहीं मिला।

आदि अंतअनन्त लिंगज्योतिर्लिंग
लिंग अन्वेषण

ब्रह्मा ने हंस रूप क्यों लिया?

ब्रह्मा ने अग्नि-स्तंभ रूप लिंग का ऊपरी अंत खोजने के लिए हंस रूप धारण किया।

ब्रह्माहंस रूपलिंग अंत
लिंग अन्वेषण

विष्णु ने वाराह रूप क्यों लिया?

विष्णु ने अग्नि-स्तंभ रूप लिंग का मूल खोजने के लिए वाराह रूप धारण किया और नीचे की ओर गए।

विष्णुवाराह रूपलिंग मूल
लिंग अन्वेषण

ब्रह्मा और विष्णु शिवलिंग का अंत क्यों नहीं पा सके?

वह लिंग आदि-मध्य-अन्त से हीन और अवर्णनीय था, इसलिए ब्रह्मा ऊपर जाकर भी अंत और विष्णु नीचे जाकर भी मूल नहीं पा सके।

ब्रह्माविष्णुअनादि अनन्त
ज्योतिर्लिंग

ज्योतिर्मय अग्नि-स्तंभ क्या था?

ज्योतिर्मय अग्नि-स्तंभ वही लिंग था जो ब्रह्मा-विष्णु के कलह को दूर करने और ज्ञान देने के लिए प्रकट हुआ।

ज्योतिर्मय अग्नि स्तंभलिंगब्रह्मा
प्रलय वर्णन

प्रलय जल में विष्णु कैसे थे?

प्रलय जल में विष्णु योगात्मा, विश्वात्मा, सर्वात्मा, नारायण और शेषनाग की शय्या पर शयन करते हुए बताए गए हैं।

विष्णुप्रलय जलनारायण
प्रलय वर्णन

प्रलय के समय संसार कैसा था?

प्रलय के समय अनावृष्टि से स्थावर पदार्थ सूख गए, प्राणी सूर्य की किरणों से दग्ध हुए और चारों ओर समुद्र ही समुद्र हो गया।

प्रलयअनावृष्टिसागर
ब्रह्मा-विष्णु विवाद

ब्रह्मा और विष्णु में विवाद क्यों हुआ?

विष्णु की माया से मोहित होकर ब्रह्मा और विष्णु दोनों ने स्वयं को सृष्टि, पालन और संहार का कर्ता कहा, इसलिए विवाद हुआ।

ब्रह्माविष्णुविवाद

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।