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पूर्वभाग अध्याय 9 प्रश्नोत्तरी — 46 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित पूर्वभाग अध्याय 9 विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 46 प्रश्न

मुक्ति और पाशुपत योग

पाशुपत योग में मन स्थिर क्यों रखना चाहिए?

शिव की महिमा अनंत है, इसलिए पाशुपत योग में निष्ठापूर्वक रहकर मन को सदा उसी में स्थिर रखना चाहिए।

पाशुपत योगमन स्थिरशिव महिमा
मुक्ति और पाशुपत योग

परमेश्वर की कृपा से क्या-क्या सुलभ होता है?

परमेश्वर की कृपा से धर्म, ऐश्वर्य, ज्ञान, वैराग्य और मोक्ष सुलभ हो जाते हैं।

परमेश्वर कृपाधर्मऐश्वर्य
मुक्ति और पाशुपत योग

आत्मविद्या से अज्ञान कैसे नष्ट होता है?

योगी आत्मविद्यारूप प्रदीप से अज्ञानान्धकार को नष्ट करके अपने भीतर साक्षात् ईश्वर का दर्शन करता है।

आत्मविद्याअज्ञान नाशईश्वर दर्शन
योगी की शक्तियाँ

योगी देवताओं, ग्रहों और भुवनों को कैसे देखता है?

योगी देवताओं के बिम्ब, विमानों, ग्रहों, नक्षत्रों, तारों, भुवनों और पातालस्थ पदार्थों को समाधि से देख सकता है।

योगीदेव दर्शनग्रह
योगी की शक्तियाँ

योगी ब्रह्मा से स्थावर तक संसार को कैसे देखता है?

योगी के लिये ब्रह्मा से स्थावर तक समग्र संसार हस्तामलक के समान स्पष्ट हो जाता है।

योगीब्रह्मा से स्थावरहस्तामलक
योगी की शक्तियाँ

योगी को पशु-पक्षियों की ध्वनि कैसे समझ आती है?

योगी में सिद्धियों और सतत अभ्यास से ऐसे विज्ञान उत्पन्न होते हैं कि उसे पशु और पक्षियों की ध्वनियों का ज्ञान हो जाता है।

योगीपशु ध्वनिपक्षी ध्वनि
योगी की शक्तियाँ

सिद्धियाँ न छोड़ने वाला योगी क्या कर सकता है?

जो योगी लोककल्याण या लीला के लिए सिद्धियाँ नहीं छोड़ता, वह आकाश में क्रीड़ा, वेदार्थ वचन, काव्यरचना और पशु-पक्षी ध्वनि का ज्ञान कर सकता है।

योगीसिद्धियाँलीला
शैव पद और वैराग्य

परम वैराग्य से कैसी मुक्ति मिलती है?

परम वैराग्य से शिव प्रसन्न होने पर साधक को विमल मुक्ति प्राप्त होती है।

परम वैराग्यविमल मुक्तिमहेश्वर
शैव पद और वैराग्य

सिद्धियों का त्याग करने से महेश्वर कैसे प्रसन्न होते हैं?

चित्त को विषयभोगों से हटाकर विघ्नरूप ब्राह्म ऐश्वर्यों का त्याग करने से महेश्वर प्रसन्न होते हैं।

सिद्धि त्यागमहेश्वर प्रसन्नवैराग्य
शैव पद और वैराग्य

गुणवैतृष्ण्य क्या है?

पुरुष में वितृष्णा नाम से प्रसिद्ध भाव को गुणवैतृष्ण्य कहा गया है।

गुणवैतृष्ण्यवितृष्णावैराग्य
शैव पद और वैराग्य

विषय भोगों को नश्वर क्यों समझना चाहिए?

विषयभोग भय उत्पन्न करने वाले और अवश्य नाशवान हैं, इसलिए उनका अश्रद्धा से त्याग करना चाहिए।

विषय भोगनश्वरतावैराग्य
शैव पद और वैराग्य

वैराग्य से सिद्धियों का त्याग कैसे किया जाता है?

सिद्धियों को समाधि में विघ्न मानकर परम वैराग्य से रोकना और विषयभोगों की नश्वरता जानकर त्यागना चाहिए।

वैराग्यसिद्धि त्यागऔपसर्गिक सिद्धि
शैव पद और वैराग्य

सिद्धियाँ समाधि में विघ्न क्यों बनती हैं?

चौंसठ गुण व्यवहार में सिद्धि कहे जाते हैं, पर समाधि में वही उपसर्ग यानी विघ्न बन जाते हैं।

सिद्धिसमाधिउपसर्ग
शैव पद और वैराग्य

शैव पद वैष्णव पद से परे क्यों कहा गया है?

शैव पद वैष्णव पद से परे बताया गया है; उसे विष्णु भी नहीं जानते और शुद्ध शिवात्मक तत्त्व असंख्य गुणों वाला कहा गया है।

शैव पदवैष्णव पदशिवात्मक तत्त्व
शैव पद और वैराग्य

वैष्णव पद क्या बताया गया है?

ब्राह्म ऐश्वर्य के तत्त्वों को प्रधानसम्बन्धी वैष्णव पद बताया गया है।

वैष्णव पदब्राह्म ऐश्वर्यप्रधान
औपसर्गिक ऐश्वर्य

ब्राह्म ऐश्वर्य क्या है?

बिना कारण जगत् की सृष्टि, अनुग्रह, प्रलय, अधिकार, लोकवृत्त प्रवर्तन और संसार का कर्तृत्व ब्राह्म ऐश्वर्य है।

ब्राह्म ऐश्वर्यसृष्टिअनुग्रह
औपसर्गिक ऐश्वर्य

प्रजापति संबंधी ऐश्वर्य क्या हैं?

छेदन, ताडन, बन्ध, संसार परिवर्तन, सर्वभूतप्रसाद, मृत्यु और काल पर जय प्रजापति संबंधी आहंकारिक ऐश्वर्य हैं।

प्रजापति ऐश्वर्यआहंकारिक ऐश्वर्यछेदन
औपसर्गिक ऐश्वर्य

मानस गुण क्या हैं?

इच्छित वस्तु की प्राप्ति, जहाँ चाहें जाना, गुप्त पदार्थ देखना, इच्छानुसार रूप धारण करना और जगत देखना मानस गुण हैं।

मानस गुणइच्छित वस्तुरूप धारण
औपसर्गिक ऐश्वर्य

आकाश संबंधी ऐश्वर्य क्या है?

छाया न होना, आकाशगमन, दूरश्रवण, सभी शब्दों का ज्ञान, तन्मात्रा ज्ञान और सभी प्राणियों को देखना आकाश संबंधी ऐश्वर्य है।

आकाश ऐश्वर्यऐन्द्र ऐश्वर्यआकाश गमन
औपसर्गिक ऐश्वर्य

वायु संबंधी ऐश्वर्य क्या है?

मन की गति पाना, दूसरों के अन्तर्मन में निवास, हल्का-भारी होना, वायु पकड़ना और आकाश तत्त्व से देह धारण करना वायु ऐश्वर्य है।

वायु ऐश्वर्यमन की गतिहल्का भारी
औपसर्गिक ऐश्वर्य

तैजस ऐश्वर्य क्या है?

देह से अग्नि बनाना, अग्नि से निर्भय रहना, जल में अग्नि रखना, हाथ से आग पकड़ना और भस्म वस्तु को पूर्ववत करना तैजस ऐश्वर्य में आता है।

तैजस ऐश्वर्यअग्निआग पकड़ना
औपसर्गिक ऐश्वर्य

जल संबंधी ऐश्वर्य क्या है?

जल में निवास, जल से बाहर आने की शक्ति, समुद्र पान, जल दर्शन, रसयुक्त भक्षण और जलपिण्ड धारण जैसे गुण जल संबंधी ऐश्वर्य हैं।

जल ऐश्वर्यआप्य ऐश्वर्यसमुद्र पान
औपसर्गिक ऐश्वर्य

पार्थिव ऐश्वर्य क्या है?

शरीर की स्थूलता, ह्रस्वता, बालकपन, वृद्धता, यौवन, अनेक रूप, विशेष देहधारण और सुगन्ध ये पार्थिव गुण बताए गए हैं।

पार्थिव ऐश्वर्यशरीर परिवर्तनस्थूलता
औपसर्गिक ऐश्वर्य

योग में आने वाले चौंसठ गुण क्या हैं?

आठ गुण वृद्धि क्रम से बढ़कर चौंसठ गुण कहे गए हैं; ये पार्थिव, जल, तेज, वायु, आकाश, मन, अहंकार और ब्राह्म ऐश्वर्य से जुड़े हैं।

चौंसठ गुणऔपसर्गिक गुणपार्थिव

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।