दिव्यास्त्रवैष्णवास्त्र किन-किन के पास था?वैष्णवास्त्र श्री राम, मेघनाद, परशुराम, भगदत्त (नरकासुर पुत्र) और प्रद्युम्न (कृष्ण पुत्र) के पास था।
दिव्यास्त्रभार्गवास्त्र और इंद्रास्त्र में क्या संबंध है?भार्गवास्त्र को इंद्रास्त्र का उन्नत और अधिक शक्तिशाली संस्करण माना जाता है जिसे परशुराम ने निर्मित किया था।#भार्गवास्त्र#इंद्रास्त्र#परशुराम
अस्त्र शस्त्रद्रोणाचार्य के पास कौन-कौन से अस्त्र थे?द्रोणाचार्य के पास परशुराम से प्राप्त संपूर्ण अस्त्र-शस्त्र ज्ञान था — ब्रह्मास्त्र, ब्रह्मशिरास्त्र, नारायणास्त्र, प्रस्वापनास्त्र, आंगिरस धनुष सहित सभी प्रमुख दिव्यास्त्र।#द्रोणाचार्य#अस्त्र#परशुराम
दिव्यास्त्रभार्गवास्त्र किसने बनाया थाभार्गवास्त्र भगवान परशुराम (भार्गव) की अस्त्र-सिद्धि से उत्पन्न उनका अपना विशिष्ट दिव्यास्त्र है। यह उनके वंश-नाम 'भार्गव' पर आधारित है। शिव की शिक्षा और अपनी तपस्या से यह अस्त्र सिद्ध किया गया।#भार्गवास्त्र निर्माण#परशुराम#भृगु वंश
दिव्यास्त्रभार्गवास्त्र क्या हैभार्गवास्त्र परशुराम (भृगु-वंशज/भार्गव) का विनाशकारी दिव्यास्त्र है जो एक साथ अनेक विध्वंसक अस्त्रों की वर्षा करता है। कर्ण ने इससे पांडव सेना की पूरी अक्षौहिणी नष्ट कर दी थी।#भार्गवास्त्र#परशुराम#कर्ण
दिव्यास्त्रपरशुराम ने कृष्ण को सुदर्शन चक्र क्यों दियापरशुराम ने कृष्ण को सुदर्शन इसलिए दिया क्योंकि श्रीकृष्ण विष्णु के पूर्ण अवतार थे और यह चक्र मूलतः विष्णु का ही था। द्वापर में अधर्म-नाश के लिए इस चक्र का सही उत्तराधिकारी कृष्ण थे।#सुदर्शन चक्र#परशुराम#कृष्ण
दिव्यास्त्रपरशुराम ने सुदर्शन चक्र कैसे प्राप्त कियासुदर्शन चक्र शिव → विष्णु → पार्वती → अग्नि → वरुण की परंपरा से परशुराम को मिला। परशुराम भगवान विष्णु के अवतार हैं इसलिए यह चक्र उनके पास धरोहर के रूप में था।#सुदर्शन चक्र#परशुराम#वरुण
अस्त्र शस्त्रपरशुराम के फरसे का नाम क्या है?परशुराम के फरसे का नाम 'परशु' है, और शास्त्रों में इसे 'विद्युदभि' भी कहा जाता है। यह शिव-प्रदत्त दिव्य फरसा था जिसके कारण वे 'परशुराम' कहलाए।#परशु#विद्युदभि#परशुराम
दिव्यास्त्रभीष्म ने परशुराम पर आग्नेयास्त्र चलाया तो क्या हुआ?भीष्म ने परशुराम पर आग्नेयास्त्र चलाया था लेकिन परशुराम ने वरुणास्त्र से उसे शांत कर दिया। यह गुरु-शिष्य के बीच दिव्यास्त्र द्वंद्व का उदाहरण है।#भीष्म#परशुराम#आग्नेयास्त्र
दिव्यास्त्रकर्ण को वरुणास्त्र कैसे मिला?कर्ण को वरुणास्त्र कुछ मतों के अनुसार परशुराम से मिला था जबकि अन्य मतों के अनुसार विभिन्न यक्षों, राक्षसों और देवों से भी उन्होंने अस्त्र प्राप्त किए थे।#कर्ण#वरुणास्त्र#परशुराम
दिव्यास्त्रपाशुपतास्त्र किन-किन के पास था?पाशुपतास्त्र भगवान शिव के अलावा केवल चार महापुरुषों के पास था — अर्जुन, मेघनाद (इंद्रजीत), परशुराम और विश्वामित्र।#पाशुपतास्त्र#धारक#अर्जुन
अस्त्र शस्त्रपरशुराम ने कर्ण को श्राप क्यों दिया था?कर्ण ने ब्राह्मण बनकर परशुराम से छल से विद्या ली। भौंरे के काटने पर गुरु की नींद न टूटे इसलिए दर्द सहा — रक्त देखकर परशुराम ने क्षत्रिय पहचाना और श्राप दिया — निर्णायक समय में विद्या भूल जाएगी।#परशुराम श्राप#कर्ण#भौंरा
शिव अस्त्र-शस्त्रशिव का फरसा परशुराम को कैसे मिलापरशुराम ने शिव की घोर तपस्या की। शिव ने प्रसन्न होकर धर्म-रक्षा के लिए दिव्य परशु (फरसा) दिया और उसे उठाने की शक्ति भी प्रदान की। इसी से वे 'परशुराम' कहलाए।#परशु#परशुराम#फरसा
अस्त्र शस्त्रविजय धनुष कर्ण को किसने दिया था?विजय धनुष परशुराम ने कर्ण को दिया था — शाप के बाद दया में। आशीर्वाद था कि जब तक यह हाथ में रहे, कोई नहीं जीत सकता। इसीलिए कर्ण के हाथ से विजय छूटने पर ही उसका वध संभव हुआ।#विजय धनुष#परशुराम#कर्ण
अस्त्र शस्त्रकर्ण के धनुष का नाम क्या था?कर्ण के धनुष का नाम 'विजय' था जिसे परशुराम ने उसे दिया था। यह अखंड था, पाशुपतास्त्र से भी इसका घेरा नहीं टूटता था। यह धनुष न होने पर ही कर्ण का वध हो सका।#विजय धनुष#कर्ण#परशुराम
अस्त्र शस्त्रपरशुराम के पास कौन-कौन से अस्त्र थे?परशुराम के पास परशु (फरसा), शार्ङ्ग धनुष (विष्णु का), विजय धनुष (इंद्र से), ब्रह्मास्त्र, पाशुपतास्त्र और अनेक दिव्यास्त्र थे। उन्होंने भीष्म, द्रोण और कर्ण को अस्त्र-शिक्षा दी।#परशुराम अस्त्र#विजय धनुष#शार्ङ्ग
अवतारवादपरशुराम अवतार का क्या महत्व है?परशुराम = क्रोधी और शस्त्र-धारक ब्राह्मण रूप। पृथ्वी को अत्याचारी क्षत्रियों से 21 बार मुक्त किया। प्रतीक: आदिम, क्रोधी और शक्ति-संचालित मानव।#परशुराम अवतार#21 बार#क्षत्रिय
रामचरितमानस — बालकाण्ड'भार्गव' और 'रेणुकासुत' कौन हैं?परशुरामजी — भार्गव (भृगु वंश से) और रेणुकासुत (माता रेणुका के पुत्र)। पिता जमदग्नि ऋषि। शिवजी से फरसा (परशु) मिला — इसलिये 'परशुराम'।#बालकाण्ड#भार्गव#रेणुकासुत
रामचरितमानस — बालकाण्ड'बहु धनुही तोरी लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं' — किसने कहा?लक्ष्मणजी ने परशुरामजी से कहा — बचपन में बहुत धनुष तोड़े, कभी ऐसा क्रोध नहीं हुआ। प्रसिद्ध व्यंग्य — शिवजी के दिव्य धनुष को 'धनुही' (साधारण छोटा धनुष) कहा।#बालकाण्ड#लक्ष्मण#परशुराम
रामचरितमानस — बालकाण्डपरशुरामजी ने अपना वैष्णव धनुष किसे दिया?श्रीरामजी को — 'राम रमापति कर धनु लेहू। खेंचहु मिटै मोर संदेहू।' धनुष देने लगे तो वह स्वयं रामजी के पास चला गया — इससे परशुरामजी को निश्चय हुआ कि ये साक्षात् विष्णु हैं।#बालकाण्ड#वैष्णव धनुष#परशुराम
रामचरितमानस — बालकाण्डपरशुरामजी ने किन-किन क्षत्रियों/राजाओं को पहले मारा था?इक्कीस बार पृथ्वी क्षत्रियविहीन की। सहस्रबाहु (हज़ार भुजाओं वाला) को भी मारा। पिता जमदग्नि की हत्या का प्रतिशोध। 'बिस्व बिदित छत्रिय कुल द्रोही' — संसार जानता है मैं क्षत्रिय कुल का शत्रु हूँ।#बालकाण्ड#परशुराम#इक्कीस बार
रामचरितमानस — बालकाण्डपरशुरामजी ने अन्त में श्रीरामजी को कैसे पहचाना?रामजी के मृदु-गूढ़ वचनों से बुद्धि के परदे खुले। फिर रामजी ने विष्णु धनुष लेकर खींचा — तब परशुरामजी ने प्रभाव जाना। पुलकित होकर हाथ जोड़कर बोले — 'जय रघुबंस बनज बन भानू!' — परब्रह्म पहचानकर प्रणाम किया।#बालकाण्ड#परशुराम#राम पहचान
रामचरितमानस — बालकाण्डपरशुराम-लक्ष्मण संवाद में लक्ष्मणजी ने परशुरामजी को क्या-क्या सुनाया?लक्ष्मणजी ने निर्भीकता से कहा — बचपन में बहुत धनुष तोड़े कभी ऐसा क्रोध नहीं, ब्रह्माण्ड गेंद-सा उठा लूँ, मेरु मूली-सा तोड़ दूँ। फिर कहा — क्रोध पाप का मूल है। परशुरामजी क्रोध से जलते रहे पर लक्ष्मणजी निर्भय।#बालकाण्ड#लक्ष्मण#परशुराम संवाद
रामचरितमानस — बालकाण्डलक्ष्मणजी ने परशुरामजी के फरसे (परशु) के बारे में क्या कहा?लक्ष्मणजी ने निर्भीकता से कहा — 'बहु धनुही तोरी लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं' — बचपन में बहुत धनुष तोड़े, कभी ऐसा क्रोध नहीं हुआ। फरसे से नहीं डरे — हम क्षत्रिय हैं, युद्ध से भय नहीं।#बालकाण्ड#लक्ष्मण#परशुराम
रामचरितमानस — बालकाण्डपरशुरामजी कौन हैं — किसके अवतार?भगवान विष्णु के अवतार — जमदग्नि ऋषि और रेणुका के पुत्र। भार्गव (भृगुवंशी), रेणुकासुत। 21 बार पृथ्वी क्षत्रियविहीन की। शिवजी के परम भक्त, शिवजी से फरसा (परशु) मिला। अन्त में रामजी को परब्रह्म पहचानकर प्रणाम किया।#बालकाण्ड#परशुराम#विष्णु अवतार
रामचरितमानस — बालकाण्डधनुष भंग की ध्वनि सुनकर कौन क्रोधित होकर आये?परशुरामजी (भार्गव/रेणुकासुत) — शिवजी के परम भक्त और विष्णु अवतार। उन्हें लगा कि शिवजी के धनुष का अपमान हुआ। क्रोधित होकर सभा में आये — 'किसने शिवजी का धनुष तोड़ा?' इसके बाद प्रसिद्ध परशुराम-लक्ष्मण संवाद।#बालकाण्ड#परशुराम#धनुष भंग
अस्त्र शस्त्रपरशुराम को फरसा शिव जी से कैसे मिला?परशुराम ने कैलाश पर भगवान शिव की घोर तपस्या की। प्रसन्न शिव ने उन्हें दिव्य परशु (विद्युदभि फरसा) सहित अनेक अस्त्र दिए। इसी परशु के कारण 'राम' का नाम 'परशुराम' हो गया।#परशुराम#शिव तपस्या#परशु प्राप्ति
अस्त्र शस्त्रकर्ण के विजय धनुष की क्या विशेषता थी?विजय धनुष अखंड और अभेद्य था। इससे चलाने वाले के चारों ओर सुरक्षा-घेरा बनता था जो पाशुपतास्त्र भी नहीं भेद सकता। इस धनुष को हाथ से छोड़ने पर ही कर्ण का वध संभव हुआ।#विजय धनुष#कर्ण#अखंड
विष्णु अस्त्र शस्त्रकृष्ण को सुदर्शन चक्र किसने दिया?कृष्ण विष्णु के अवतार हैं अतः यह चक्र उनका ही है। महाभारत में खांडव दहन के बदले अग्निदेव ने कृष्ण को चक्र और गदा दी। एक अन्य परंपरा में परशुराम से प्राप्त होने का उल्लेख है।#कृष्ण सुदर्शन चक्र#अग्नि देव#परशुराम