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गरुड़ पुराण(592)

गरुड़ पुराण पर शास्त्रीय व्याख्या, कथा, अर्थ, शिक्षाएँ और प्रश्नोत्तर — कुल 592 प्रश्न उपलब्ध हैं।

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गरुड़ पुराण में अष्टमी श्राद्ध का क्या महत्व है?

यह पितरों की यात्रा में सहायक है।

#गरुड़ पुराण#अष्टमी श्राद्ध#प्रेत खण्ड
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अकाल मृत्यु का श्राद्ध किस दिन करें?

पितृ पक्ष की चतुर्दशी को।

#अकाल मृत्यु#चतुर्दशी श्राद्ध#गरुड़ पुराण
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अष्टमी श्राद्ध का शास्त्रीय आधार क्या है?

पुराण, स्मृति और गृह्यसूत्र इसका आधार हैं।

#शास्त्रीय आधार#गरुड़ पुराण#याज्ञवल्क्य स्मृति
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सूतक में श्राद्ध क्यों नहीं करना चाहिए?

सूतक में किया गया श्राद्ध पितरों तक नहीं पहुँचता माना गया है।

#सूतक#श्राद्ध निषेध#गरुड़ पुराण
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श्राद्ध पर संदेह क्यों नहीं करना चाहिए?

श्राद्ध की पारलौकिक पहुँच शास्त्रों से प्रमाणित मानी गई है।

#श्राद्ध संदेह#गरुड़ पुराण#भगवान विष्णु
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श्राद्ध का अन्न पितरों तक कैसे जाता है?

श्राद्ध अन्न मंत्र, नाम और गोत्र से सूक्ष्म ऊर्जा बनकर पितरों तक पहुँचता है।

#श्राद्ध अन्न#पितरों तक अन्न#गरुड़ पुराण
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सप्त पितृगण कौन हैं?

बर्हिषद, अग्निष्वात्त, क्रव्याद, आज्यप, सुकलिन, उपहूत और साध्य सप्त पितृगण हैं।

#सप्त पितृगण#गरुड़ पुराण#पितर
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अकाल मृत्यु का श्राद्ध कब करें?

अकाल मृत्यु का श्राद्ध पितृ पक्ष की चतुर्दशी को करें।

#अकाल मृत्यु#चतुर्दशी श्राद्ध#गरुड़ पुराण
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गरुड़ पुराण में यममार्ग क्या है?

मृत्यु के बाद यमपुरी तक की कठिन यात्रा यममार्ग है।

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श्राद्ध क्यों जरूरी है?

श्राद्ध पितरों की यात्रा, तृप्ति और वंश की शांति के लिए जरूरी है।

#श्राद्ध जरूरी#गरुड़ पुराण#पितृ तृप्ति
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श्राद्ध न करने से क्या होता है?

श्राद्ध न करने से पितृ दोष, कलह, संतान बाधा और रोग हो सकते हैं।

#श्राद्ध न करना#पितृ दोष#गरुड़ पुराण
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गरुड़ पुराण में श्राद्ध का फल क्या है?

गरुड़ पुराण में श्राद्ध से आयु, पुत्र, यश, वैभव और बल का फल बताया गया है।

#गरुड़ पुराण#श्राद्ध फल#पितृ तृप्ति
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तृतीया श्राद्ध से पितृदोष मिटता है?

हाँ, विधिपूर्वक तृतीया श्राद्ध पितृदोष निवारण में सहायक माना गया है।

#पितृदोष#तृतीया श्राद्ध#गरुड़ पुराण
श्राद्ध दर्शन

प्रेत योनि क्या है?

प्रेत योनि = मृत्यु के बाद आत्मा स्थूल शरीर त्यागकर सूक्ष्म शरीर धारण कर जिस अवस्था में जाती है। सपिण्डीकरण संस्कार से पहले आत्मा प्रेत रूप में भटकती है। गरुड़ पुराण के प्रेत कल्प में विस्तृत वर्णन।

#प्रेत योनि#गरुड़ पुराण#सूक्ष्म शरीर
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तर्पण में काले तिल क्यों चढ़ाए जाते हैं?

काले तिल पितरों को प्रिय, पवित्र और अशुभ शक्तियों को दूर करने वाले माने गए हैं।

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सपिण्डीकरण पहले एक साल बाद और अब 12वें दिन क्यों किया जाता है?

कलियुग में जीवन की अस्थिरता के कारण गरुड़ पुराण के आधार पर सपिण्डीकरण 12वें दिन किया जाता है।

#सपिण्डीकरण#12वां दिन#गरुड़ पुराण
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मासिक श्राद्ध से प्रेतात्मा को क्या लाभ मिलता है?

मासिक श्राद्ध प्रेतात्मा को यममार्ग की यात्रा में बल और पोषण देता है।

#मासिक श्राद्ध#प्रेतात्मा#गरुड़ पुराण
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यममार्ग की 16 पुरियां क्या संकेत करती हैं?

16 पुरियां मृतात्मा की 12 महीने की यममार्ग यात्रा के चरणों को दर्शाती हैं।

#यममार्ग#16 पुरियां#गरुड़ पुराण
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गरुड़ पुराण में मृत आत्मा की 12 महीने की यात्रा कैसे बताई गई है?

गरुड़ पुराण के अनुसार मृतात्मा 12 महीने तक यममार्ग में 16 पुरियां पार करती है और पिण्ड-श्राद्ध से बल पाती है।

#गरुड़ पुराण#12 महीने की यात्रा#यममार्ग
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मृत्यु के बाद आत्मा तुरंत पितृलोक क्यों नहीं पहुँचती?

मृत आत्मा पहले प्रेत अवस्था में यममार्ग की यात्रा करती है, फिर सपिण्डीकरण से पितृलोक की अधिकारी बनती है।

#मृत्यु के बाद आत्मा#प्रेत अवस्था#पितृलोक
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84-अंश सिद्धांत क्या है?

८४-अंश सिद्धान्त बताता है कि शरीर के ८४ अंशों में २८ स्वयं से और ५६ पूर्वजों से प्राप्त होते हैं।

#84 अंश सिद्धांत#श्राद्ध#पितृ ऋण
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त्याजक पितृ कौन होता है?

त्याजक वह पूर्वज है जो आदित्य स्तर से आगे बढ़कर मुख्य पिण्डभाज् श्राद्ध से बाहर और लेपभाज् श्रेणी में चला जाता है।

#त्याजक पितृ#गरुड़ पुराण#आदित्य
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विवाहित स्त्री पितृ श्राद्ध में कैसे सम्मिलित होती है?

विवाहित स्त्री पति के गोत्र और वंश में सम्मिलित होकर पितृ श्राद्ध में पति के देव-वर्ग के साथ सपत्नीक रूप में पूजी जाती है।

#विवाहित स्त्री#पितृ श्राद्ध#गोत्र
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सपिण्डीकरण के बाद प्रेत को पितृ पद कैसे मिलता है?

सपिण्डीकरण में प्रेत का पिण्ड पितरों से मिलते ही वह पितृलोक में प्रवेश कर वसु रूप पितृ बन जाता है।

#सपिण्डीकरण#प्रेत पद#पितृ पद
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मृत्यु के बाद जीव प्रेत से पितृ कैसे बनता है?

सपिण्डीकरण के बाद प्रेत पितृलोक में प्रवेश कर पितृ श्रेणी में आता है और वसु स्वरूप प्रथम पितृ बनता है।

#प्रेत से पितृ#सपिण्डीकरण#गरुड़ पुराण
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प्रेत बाधा से वंश का विनाश कैसे होता है?

श्राद्ध न होने पर प्रेत बाधा कुल को निःसंतान, दरिद्र, रोगी और जीविका-रहित बनाकर वंश विनाश तक ले जाती है।

#प्रेत बाधा#वंश विनाश#गरुड़ पुराण
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प्रेत बाधा परिवार को कैसे प्रभावित करती है?

प्रेत बाधा परिवार की मति, प्रीति, रीति, लक्ष्मी और बुद्धि नष्ट कर वंश को दरिद्र, रोगी और निःसंतान बना सकती है।

#प्रेत बाधा#परिवार#वंश विनाश
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स्वप्न में विकृत मुख वाला व्यक्ति दिखना क्या संकेत देता है?

स्वप्न में विकृत मुख वाला व्यक्ति दिखना प्रेत बाधा और भटकते पूर्वज के संकेत के रूप में बताया गया है।

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प्रेत बाधा के लक्षण क्या हैं?

स्वप्न में घोड़ा, हाथी, बैल, विकृत मुख वाला व्यक्ति दिखना या जागने पर विपरीत दिशा में होना प्रेत बाधा का संकेत है।

#प्रेत बाधा#लक्षण#स्वप्न
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गर्भपात करवाने वाले को शास्त्रों में क्या दंड बताया गया है?

गर्भपात करवाने वाला घोर यातना के बाद प्रेत योनि प्राप्त कर सकता है और पुनर्जन्म में रोगी या नीच अवस्था पा सकता है।

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गोहत्या करने वाले को वैतरणी और प्रेत योनि क्यों मिलती है?

गोहत्या महापातक है; ऐसा पापी वैतरणी की यातना भोगकर प्रेत योनि में आता है।

#गोहत्या#वैतरणी#प्रेत योनि
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गुरुपत्नी गमन का फल क्या बताया गया है?

गुरुपत्नी गमन करने वाला शाल्मली नरक में कांटों से भरे जलते वृक्षों का दंड भोगकर प्रेत योनि में आता है।

#गुरुपत्नी गमन#महापातक#शाल्मली नरक
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स्वर्ण चोरी करने वाला प्रेत योनि क्यों पाता है?

स्वर्ण चोरी महापातक है; ऐसा जीव कुम्भीपाक नरक में दंड भोगकर प्रेत योनि में आता है।

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ब्रह्महत्या का प्रेत योनि से क्या संबंध है?

ब्रह्महत्या महापातक है; ऐसा पापी महारव नरक की यातना के बाद प्रेत योनि में आता है।

#ब्रह्महत्या#प्रेत योनि#महारव नरक
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महापातक करने वाला प्रेत क्यों बनता है?

महापातक करने वाला जीव पहले नरक यातना भोगता है और फिर तामसिक कर्मों के कारण प्रेत योनि में आता है।

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हत्या के बाद आत्मा प्रेत रूप में क्यों भटकती है?

हत्या अकाल और हिंसक मृत्यु है; अधूरी आयु, आसक्ति और संस्कार-अभाव से आत्मा प्रेत रूप में भटक सकती है।

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सर्पदंश या विषपान से मृत्यु प्रेत योनि का कारण क्यों है?

सर्पदंश और विषपान अकाल मृत्यु हैं; अधूरी आयु और आसक्ति के कारण आत्मा प्रेत योनि में जा सकती है।

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जल में डूबने से मृत्यु के बाद आत्मा प्रेत क्यों बन सकती है?

जल में डूबना अकाल मृत्यु है; शेष आयु और आसक्ति के कारण आत्मा प्रेत रूप में भटक सकती है।

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आत्महत्या के बाद प्रेत योनि क्यों मिलती है?

आत्महत्या अकाल मृत्यु है; आयु और आसक्ति शेष रहने से आत्मा प्रेत रूप में भटक सकती है।

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कौन-कौन सी मृत्यु अकाल मृत्यु मानी गई है?

जल में डूबना, अग्नि में जलना, गिरकर मरना, सर्पदंश, विषपान, आत्महत्या और हत्या अकाल मृत्यु मानी गई हैं।

#अकाल मृत्यु#गरुड़ पुराण#प्रेत योनि
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अकाल मृत्यु से प्रेत योनि क्यों मिलती है?

अकाल मृत्यु में जीव की आयु और आसक्ति शेष रहती है, इसलिए वह शेष आयु तक प्रेत रूप में भटक सकता है।

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प्रेत कल्प तक भटकता क्यों है?

पिण्डदान और श्राद्ध के अभाव में आत्मा आगे की गति नहीं पाती, इसलिए प्रेत रूप में कल्प तक भटकती है।

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गरुड़ पुराण में प्रेत योनि के बारे में क्या कहा गया है?

गरुड़ पुराण प्रेत को वायव्य शरीर, तीव्र भूख-प्यास और पिण्डदान के अभाव से उत्पन्न दुखद अवस्था बताता है।

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पिण्डदान न होने पर आत्मा प्रेत क्यों बनती है?

पिण्डदान और श्राद्ध न होने से आत्मा को पितृगति नहीं मिलती, इसलिए वह प्रेत बनकर दुखपूर्वक भटकती है।

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प्रेत को भूख-प्यास क्यों लगती है?

प्रेत को सूक्ष्म शरीर में भूख-प्यास का अनुभव रहता है, पर भौतिक शरीर न होने से वह अन्न-जल ग्रहण नहीं कर पाता।

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प्रेत योनि में जीव को कैसा शरीर मिलता है?

प्रेत को वायु तत्व से बना वायव्य सूक्ष्म शरीर मिलता है, जिसमें वह भूख-प्यास और अतृप्ति की पीड़ा अनुभव करता है।

#प्रेत शरीर#वायव्य शरीर#सूक्ष्म शरीर
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प्रेत बनने का मुख्य कारण क्या है?

प्रेत बनने के मुख्य कारण हैं: पिण्डदान और श्राद्ध का अभाव, अकाल मृत्यु और महापातक जैसे घोर पाप।

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प्रेत योनि क्या है?

प्रेत योनि वह अवस्था है जिसमें शरीर छोड़ चुकी आत्मा नई योनि या पितृलोक न पाकर वायव्य सूक्ष्म देह में भूख-प्यास से भटकती रहती है।

#प्रेत योनि#गरुड़ पुराण#सूक्ष्म शरीर
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यमलोक और कर्म-विपाक से जीवन को क्या सीख मिलती है?

यमलोक सिखाता है कि कोई कर्म छिपता नहीं; पाप का फल नरक, योनियों और रोगों में मिलता है, जबकि धर्म और भक्ति श्रेष्ठ गति देते हैं।

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यमपुरी का दक्षिण द्वार किसके लिए है?

दक्षिण द्वार पापियों के लिए है, जहाँ से झूठ, परस्त्रीगमन, भ्रूणहत्या और अन्य पाप करने वालों को यमदूत ले जाते हैं।

#यमपुरी दक्षिण द्वार#पापी आत्मा#यमलोक
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