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विस्तृत उत्तर
मृत्यु के बाद आत्मा तुरंत पितृलोक नहीं पहुँचती क्योंकि दाह-संस्कार के बाद वह वायव्य सूक्ष्म शरीर धारण कर पहले प्रेत अवस्था में रहती है। गरुड़ पुराण के अनुसार उसे यमलोक की कठिन यात्रा करनी पड़ती है, जो 12 महीने तक चलती है और जिसमें 16 पुरियां पार करनी होती हैं। पुत्र द्वारा किए गए दैनिक पिण्ड, मासिक श्राद्ध और अंततः सपिण्डीकरण से उसे बल मिलता है और वह पितृ पद प्राप्त करती है।
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