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गरुड़ पुराण(592)

गरुड़ पुराण पर शास्त्रीय व्याख्या, कथा, अर्थ, शिक्षाएँ और प्रश्नोत्तर — कुल 592 प्रश्न उपलब्ध हैं।

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यमपुरी के चार द्वार कौन-कौन से हैं?

यमपुरी के चार द्वार हैं: दक्षिण द्वार, पश्चिम द्वार, उत्तर द्वार और पूर्व द्वार। प्रवेश कर्मों के आधार पर होता है।

#यमपुरी#चार द्वार#यमलोक
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वैतरणी नदी पार करने में गोदान कैसे सहायक होता है?

गोदान करने वाला जीव वैतरणी नदी को गाय की पूंछ पकड़कर बिना कष्ट पार कर सकता है।

#गोदान#वैतरणी नदी#यमलोक
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वैतरणी नदी इतनी भयानक क्यों है?

वैतरणी भयानक है क्योंकि उसमें जल नहीं, उबलता रक्त, पीब, मज्जा, मूत्र और हड्डियाँ बहती हैं तथा यमदूत पापियों को उसमें धकेलते हैं।

#वैतरणी नदी#भयानक नदी#यमलोक
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वैतरणी नदी क्या है?

वैतरणी यमलोक के मार्ग की १०० योजन चौड़ी भयंकर नदी है, जिसमें पापियों के लिए रक्त, पीब, मूत्र और हड्डियाँ बहती हैं।

#वैतरणी नदी#यमलोक#गरुड़ पुराण
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यममार्ग में पिंडदान न होने पर आत्मा को क्या कष्ट होता है?

पिंडदान न होने पर आत्मा भूख-प्यास से तड़पती है, विलाप करती है और अपने सांसारिक मोह पर पश्चाताप करती है।

#पिंडदान#यममार्ग#आत्मा कष्ट
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विचित्रभवन में आत्मा का अनुभव कैसा होता है?

विचित्रभवन यममार्ग का एक नगर है, जहाँ राजा विचित्र है और आत्मा अपनी लंबी कर्म-यात्रा में आगे बढ़ती है।

#विचित्रभवन#यममार्ग#गरुड़ पुराण
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यममार्ग के 16 नगर कौन-कौन से हैं?

यममार्ग के 16 नगर हैं: सौम्यपुर, सौरिपुर, नगेन्द्रभवन, गंधर्वपुर, शैलागम, क्रौंचपुर, क्रूरपुर, विचित्रभवन, बह्वापद, दुःखदपुर, नानाक्रन्दपुर, सुतप्तभवन, रौद्रपुर, पयोवर्षणपुर, शीताढ्यपुर और बहुभीतिपुर।

#यममार्ग 16 नगर#गरुड़ पुराण#सौम्यपुर
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यममार्ग में श्राद्ध और पिंडदान का क्या महत्व है?

यममार्ग में पिंडदान आत्मा को नगरों में विश्राम और पोषण देता है; पिंडदान न होने पर आत्मा भूख-प्यास से तड़पती है।

#श्राद्ध#पिंडदान#यममार्ग
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यममार्ग में आत्मा को कौन-कौन से कष्ट होते हैं?

यममार्ग में आत्मा को तपती रेत, भूख-प्यास, हिंसक जीवों की पीड़ा, यमदूतों के कोड़े और परिवार-वियोग का दुख सहना पड़ता है।

#यममार्ग कष्ट#पापी आत्मा#गरुड़ पुराण
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यममार्ग पापी आत्मा के लिए इतना कठिन क्यों होता है?

यममार्ग पापी आत्मा के लिए इसलिए कठिन है क्योंकि वहाँ तपती बालू, भूख-प्यास, अंधकार, हिंसक जीव और यमदूतों के कोड़े मिलते हैं।

#यममार्ग#पापी आत्मा#यमदूत
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आत्मा यमलोक तक कितने दिनों में पहुँचती है?

आत्मा यमलोक तक ३४८ दिनों में पहुँचती है और प्रतिदिन लगभग २००.५ योजन चलती है।

#आत्मा यात्रा#यमलोक#348 दिन
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यममार्ग की दूरी 86,000 योजन क्यों बताई गई है?

गरुड़ पुराण में मृत्युलोक से यमलोक की दूरी ८६,००० योजन बताई गई है, इसलिए यममार्ग इतना लंबा माना गया है।

#यममार्ग दूरी#86000 योजन#गरुड़ पुराण
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यमलोक तक की यात्रा कितनी लंबी है?

यमलोक तक की यात्रा ८६,००० योजन लंबी है और आत्मा इसे ३४८ दिनों में तय करती है।

#यमलोक यात्रा#86000 योजन#348 दिन
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यममार्ग क्या है?

यममार्ग मृत्यु के बाद आत्मा की यमलोक तक ८६,००० योजन लंबी कठिन यात्रा का मार्ग है।

#यममार्ग#यमलोक#गरुड़ पुराण
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पापी आत्मा यमदूतों को देखकर क्यों डरती है?

पापी आत्मा यमदूतों के विकराल रूप, काल-पाश, त्रिशूल और दंड को देखकर भय से कांप उठती है।

#पापी आत्मा#यमदूत#मृत्यु
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मृत्यु के समय पापी को यमदूत कैसे दिखाई देते हैं?

पापी को मृत्यु के समय विकराल, लाल आँखों वाले, भयानक मुख वाले यमदूत दिखाई देते हैं, जिन्हें देखकर वह भय से कांप उठता है।

#मृत्यु समय#यमदूत#पापी आत्मा
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यमदूतों का स्वरूप कैसा बताया गया है?

यमदूत विकराल, लाल आँखों वाले, भयानक मुख वाले, काल-पाश, मुद्गर, त्रिशूल और कोड़े धारण किए हुए बताए गए हैं।

#यमदूत स्वरूप#गरुड़ पुराण#काल पाश
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श्रवण देवों की उत्पत्ति कैसे हुई?

ब्रह्मा जी ने लोक-व्यवहार का सूक्ष्म ज्ञान रखने के लिए अपनी तपस्या से तेजस्वी और विशाल नेत्रों वाले श्रवण देव उत्पन्न किए।

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चित्रगुप्त की उत्पत्ति कैसे हुई?

चित्रगुप्त ब्रह्मा जी की १००० वर्षों की तपस्या से उनकी काया से प्रकट हुए, इसलिए वे कायस्थ कहलाए।

#चित्रगुप्त उत्पत्ति#ब्रह्मा#कायस्थ
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यमराज की सभा में पुण्यात्माओं का स्वागत कैसे होता है?

पुण्यात्मा के आने पर धर्मराज स्वयं आसन से उठकर स्वागत करते हैं और उसे सम्मानपूर्वक सभा में स्थान देते हैं।

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यमराज की सभा कैसी है?

यमराज की सभा दिव्य, भव्य और विस्तृत है, जहाँ मुनि, सिद्ध, गंधर्व, देवता और पितृगण उपस्थित रहते हैं।

#यमराज सभा#यमलोक#गरुड़ पुराण
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यमराज पापी और पुण्यात्मा के साथ अलग व्यवहार क्यों करते हैं?

यमराज का व्यवहार जीवात्मा के कर्मों के अनुसार होता है; पापी को भय और पुण्यात्मा को सम्मान प्राप्त होता है।

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पुण्यात्माओं को यमराज का सौम्य रूप क्यों दिखाई देता है?

सत्य, धर्म, दान और अहिंसा का पालन करने वाली पुण्यात्मा को यमराज शांत, सौम्य और देव रूप में दिखाई देते हैं।

#यमराज सौम्य रूप#पुण्यात्मा#धर्म
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यमराज का भयानक स्वरूप पापियों को क्यों दिखाई देता है?

पापी आत्मा अपने ही पाप कर्मों की छाया यमराज के भयानक स्वरूप में देखती है, इसलिए उसे वे डरावने दिखाई देते हैं।

#यमराज स्वरूप#पापी आत्मा#गरुड़ पुराण
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यमलोक पृथ्वी से कितनी दूरी पर है?

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्युलोक से यमलोक की दूरी ८६,००० योजन, लगभग ६,८८,००० मील है।

#यमलोक दूरी#86000 योजन#गरुड़ पुराण
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यमलोक को पौराणिक ब्रह्मांड विज्ञान में कैसे समझाया गया है?

पौराणिक ब्रह्मांड विज्ञान में यमलोक कर्म-फल, न्याय और यातना-देह द्वारा कर्म-शोधन का निश्चित पारलौकिक आयाम है।

#यमलोक#पौराणिक ब्रह्मांड विज्ञान#कर्म फल
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यमलोक क्या है?

यमलोक वह पारलौकिक न्याय-स्थान है जहाँ मृत्यु के बाद जीवात्मा के कर्मों का निष्पक्ष मूल्यांकन होता है और उनके अनुसार फल दिया जाता है।

#यमलोक#गरुड़ पुराण#कर्म न्याय
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सुतल लोक मोक्ष का स्थान है या कर्म-भोग का?

गरुड़ पुराण के अनुसार सुतल लोक कर्म-भोग का स्थान है, मोक्ष का नहीं, पर भगवान विष्णु की उपस्थिति से यह पवित्र है।

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मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद आत्मा की गति को शास्त्रीय विधान क्यों कहा गया है?

आत्मा की गति लिंग शरीर, वायुजा देह, पिण्डज शरीर, सपिण्डीकरण और यमयात्रा की शास्त्र-सम्मत श्रृंखला है।

#आत्मा की गति#शास्त्रीय विधान#गरुड़ पुराण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद सबसे जरूरी कर्म कौन से हैं?

मृत्यु के बाद पवित्रता-विधान, षट्पिण्ड, दशगात्र पिण्डदान, अन्न-जल, दीपदान, सपिण्डीकरण और महादान जरूरी हैं।

#गरुड़ पुराण#मृत्यु कर्म#पिण्डदान
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

हत्या से मृत्यु को अकाल मृत्यु क्यों माना गया है?

हत्या से हुई मृत्यु गरुड़ पुराण में अकाल मृत्यु के कारणों में शामिल है।

#हत्या#अकाल मृत्यु#नारायण बलि
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

डूबने से मृत्यु को अकाल मृत्यु क्यों माना गया है?

डूबने से हुई मृत्यु अकाल मृत्यु के कारणों में गिनी गई है।

#डूबना#अकाल मृत्यु#नारायण बलि
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

सर्पदंश से मृत्यु को अकाल मृत्यु क्यों माना गया है?

सर्पदंश से हुई मृत्यु गरुड़ पुराण में अकाल मृत्यु मानी गई है।

#सर्पदंश#अकाल मृत्यु#नारायण बलि
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

अकाल मृत्यु क्या होती है?

उपवास, दुर्घटना, आत्महत्या, सर्पदंश, डूबना, हत्या आदि से हुई मृत्यु अकाल मृत्यु मानी जाती है।

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मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यममार्ग की 16 पुरियाँ कौन-कौन सी हैं?

यममार्ग की 16 पुरियाँ सौम्यपुर से बहुभीतिपुर तक क्रम से आती हैं।

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मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यममार्ग में छाया या विश्राम क्यों नहीं मिलता?

यममार्ग तपते सूर्य से दग्ध और छाया-विहीन है; विश्राम केवल 16 पुरियों में थोड़े समय के लिए मिलता है।

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मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यममार्ग का वातावरण कैसा है?

यममार्ग तपता, छाया-विहीन, भयावह और भूख-प्यास व यातना से भरा मार्ग है।

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मरणोपरांत आत्मा यात्रा

आत्मा को यमलोक पहुँचने में कितने दिन लगते हैं?

आत्मा को यमलोक पहुँचने में 348 दिन लगते हैं।

#यमलोक#348 दिन#यमयात्रा
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यममार्ग में आत्मा को कौन-कौन से कष्ट होते हैं?

यममार्ग में आत्मा भूख, प्यास, थकान, दाह, प्रहार, कुत्तों-कौवों और भयानक मार्ग की यातनाएँ सहती है।

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मरणोपरांत आत्मा यात्रा

गरुड़ पुराण में तेरहवें दिन के प्रस्थान का क्या वर्णन है?

गरुड़ पुराण में तेरहवें दिन आत्मा को पाश से बाँधकर यमदूतों द्वारा यममार्ग ले जाने का वर्णन है।

#गरुड़ पुराण#तेरहवाँ दिन#यममार्ग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

तेरहवें दिन यमदूत आत्मा को कैसे ले जाते हैं?

तेरहवें दिन यमदूत आत्मा को गले में पाश से बाँधकर यममार्ग की ओर खींचते हैं।

#तेरहवाँ दिन#यमदूत#पाश
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

स्वस्थ अवस्था में दान करने का फल कितना बताया गया है?

स्वस्थ अवस्था में अपने हाथों से दान करने का फल 1000 गुना बताया गया है।

#स्वस्थ अवस्था#दान फल#महादान
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

तिल भगवान विष्णु से कैसे जुड़ा है?

तिल भगवान विष्णु के पसीने से उत्पन्न माने गए हैं।

#तिल#भगवान विष्णु#दान
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

श्राद्ध द्वादशी को क्यों करना चाहिए?

एकादशी श्राद्ध वर्जित है, इसलिए श्राद्ध अगले दिन द्वादशी को किया जाना चाहिए।

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मरणोपरांत आत्मा यात्रा

एकादशी के दिन श्राद्ध क्यों नहीं करना चाहिए?

एकादशी श्राद्ध करने से कर्ता, पितर और पुरोहित तीनों को नरकगामी बताया गया है, इसलिए श्राद्ध द्वादशी को करना चाहिए।

#एकादशी#श्राद्ध#गरुड़ पुराण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पिण्डज शरीर कितने आकार का बनता है?

पिण्डज शरीर लगभग एक हाथ के आकार का बनता है।

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मरणोपरांत आत्मा यात्रा

दशगात्र में दिए गए पिण्ड के कितने भाग होते हैं?

दशगात्र के पिण्ड के चार भाग होते हैं।

#दशगात्र#पिण्ड के भाग#गरुड़ पुराण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

दस दिन पिण्डदान न करने पर आत्मा की क्या स्थिति होती है?

पिण्डदान न होने पर आत्मा भूख से व्याकुल होकर वायव्य रूप में भटकती रहती है।

#पिण्डदान न करना#आत्मा#भटकना
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

सूतक काल में संध्या-वंदन क्यों रोका जाता है?

संध्या-वंदन सूतक काल में इसलिए रोका जाता है ताकि परिवार प्रेत की सद्गति पर केंद्रित रहे।

#सूतक काल#संध्या वंदन#वर्जित
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

सूतक काल में आशीर्वाद देना क्यों वर्जित है?

सूतक काल में आशीर्वाद देना इसलिए वर्जित है ताकि परिजन प्रेत की सद्गति पर ध्यान दें।

#सूतक काल#आशीर्वाद#वर्जित
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