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गरुड़ पुराण(592)

गरुड़ पुराण पर शास्त्रीय व्याख्या, कथा, अर्थ, शिक्षाएँ और प्रश्नोत्तर — कुल 592 प्रश्न उपलब्ध हैं।

मरणोपरांत आत्मा यात्रा

अंतिम पिण्ड हाथ में रखने के बाद आत्मा को क्या कहा जाता है?

अंतिम पिण्ड हाथ में रखने के बाद आत्मा को प्रेत कहा जाता है।

#अंतिम पिण्ड#प्रेत#प्रेतत्व
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

प्रेतत्व कब शुरू होता है?

अंतिम पिण्ड हाथ में रखने के बाद आत्मा प्रेत कहलाती है और प्रेतत्व शुरू होता है।

#प्रेतत्व#अंतिम पिण्ड#सपिण्डीकरण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

छः पिण्ड न देने पर क्या दोष बताया गया है?

छः पिण्ड न देने पर शव अग्निदाह योग्य नहीं माना जाता और अधिष्ठाता देवताओं के विनाश का दोष बताया गया है।

#छः पिण्ड#दोष#अग्निदाह
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

षट्पिण्ड विधान क्या है?

षट्पिण्ड विधान मृत्यु के दिन शवयात्रा के चरणों पर दिए जाने वाले छह पिण्डों का विधान है।

#षट्पिण्ड विधान#छः पिण्ड#शवयात्रा
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के दिन छः पिण्ड क्यों दिए जाते हैं?

छः पिण्ड आत्मा की शांति, शव की शुद्धि और अग्निदाह की योग्यता के लिए दिए जाते हैं।

#छः पिण्ड#षट्पिण्ड विधान#शवदाह
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

गरुड़ पुराण में विलाप करने से प्रेत को क्या कष्ट बताया गया है?

विलाप से गिरे कफ और आँसू प्रेत को खाने पड़ते हैं, जो उसके लिए कष्टदायक है।

#गरुड़ पुराण#विलाप#प्रेत
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृतक के लिए बहुत रोना क्यों मना है?

अत्यधिक रोने से गिरे आँसू और कफ को भूख-प्यास से व्याकुल प्रेत को भक्षण करना पड़ता है।

#मृतक#विलाप#गरुड़ पुराण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यमदूत आत्मा को किससे बाँधते हैं?

यमदूत आत्मा को पाश यानी रस्सी से बाँधते हैं।

#यमदूत#पाश#आत्मा
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद पुण्यात्मा किसे देख सकती है?

पुण्यात्मा मृत्यु के बाद भगवान विष्णु के पार्षदों को देख सकती है।

#पुण्यात्मा#विष्णु पार्षद#मृत्यु के बाद
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद आत्मा अंगूठे के आकार की क्यों कही गई है?

प्राण निकलते ही आत्मा अंगुष्ठमात्र सूक्ष्म स्वरूप धारण करती है, जिसे यमदूत पाश से बाँधते हैं।

#अंगुष्ठमात्र आत्मा#मृत्यु#सूक्ष्म शरीर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मरणासन्न व्यक्ति के पास शालिग्राम शिला क्यों रखी जाती है?

शालिग्राम शिला मृत्यु-समय की पवित्रता और पारलौकिक शुद्धता के विधान में रखी जाती है।

#शालिग्राम शिला#मरणासन्न#मृत्यु संस्कार
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मरणासन्न व्यक्ति के हाथों पर तुलसी क्यों रखी जाती है?

मरणासन्न व्यक्ति के हाथों पर तुलसी रखना मृत्यु-समय की शास्त्रीय पवित्रता-विधि का भाग है।

#तुलसी#मरणासन्न#मृत्यु विधि
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

शय्या या खाट पर प्राण त्यागना क्यों वर्जित है?

शास्त्रों में प्राण त्याग के लिए शय्या के बजाय गोमय-लेपित भूमि और कुशा का विधान है।

#शय्या#खाट#प्राण त्याग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के समय कुशा क्यों बिछाई जाती है?

कुशा मरणासन्न व्यक्ति को पवित्र भूमि पर स्थापित करने के शास्त्रीय विधान का भाग है।

#कुशा#मरणासन्न#गरुड़ पुराण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के समय गोमय लेपन क्यों किया जाता है?

गोमय लेपन मृत्यु के समय भूमि को शास्त्रीय रूप से पवित्र करने के लिए किया जाता है।

#गोमय#मृत्यु विधि#गरुड़ पुराण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मरणासन्न व्यक्ति को भूमि पर क्यों लिटाया जाता है?

मरणासन्न व्यक्ति को गोमय-लेपित भूमि पर कुशा बिछाकर लिटाना शास्त्रीय विधान है।

#मरणासन्न व्यक्ति#भूमि#गरुड़ पुराण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यातना देह में आत्मा को पीड़ा कैसे होती है?

यातना देह में आत्मा जलने, कटने, फटने, भूख-प्यास, थकान और यममार्ग के कष्टों को अनुभव करती है।

#यातना देह#आत्मा की पीड़ा#यममार्ग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

वायुजा देह क्या होती है?

वायुजा देह मृत्यु के तुरंत बाद मिलने वाला वायव्य शरीर है, जिसमें आत्मा भटकती है पर स्थूल अन्न ग्रहण नहीं कर सकती।

#वायुजा देह#मृत्यु के बाद#प्रेत
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा कैसे बताई गई है?

गरुड़ पुराण में आत्मा की यात्रा वायुजा देह, पिण्डज शरीर, सपिण्डीकरण, यमदूतों के पाश और 348 दिन की यमयात्रा के रूप में बताई गई है।

#गरुड़ पुराण#आत्मा की यात्रा#प्रेत खण्ड
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद आत्मा की 13 दिन की यात्रा क्या है?

मृत्यु के बाद 13 दिनों में आत्मा वायुजा देह से पिण्डज शरीर पाती है, सपिण्डीकरण से प्रेतत्व छोड़ती है और तेरहवें दिन यममार्ग की यात्रा शुरू करती है।

#मृत्यु के बाद आत्मा#13 दिन की यात्रा#गरुड़ पुराण
लोक

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के समय श्रीहरि का ध्यान क्यों करना चाहिए?

मृत्यु के समय मोह-माया त्यागकर श्रीहरि का ध्यान करने की बात गरुड़ पुराण में कही गई है।

#गरुड़ पुराण#मृत्यु#श्रीहरि
लोक

गरुड़ पुराण के अनुसार शरीर में तपोलोक कहाँ है?

गरुड़ पुराण के अनुसार तपोलोक मनुष्य के ललाट पर स्थित है।

#गरुड़ पुराण#शरीर#तपोलोक
लोक

गरुड़ पुराण में अतल लोक का क्या वर्णन है?

गरुड़ पुराण अतल लोक को कामुकता और विलासिता का केंद्र मानता है जहाँ बल असुर का राज है और आध्यात्मिक चेतना का अभाव है।

#गरुड़ पुराण#अतल लोक#कामुकता
तिल का महत्व और षट्तिला

षट्तिला क्या होता है — छह तरह के तिल प्रयोग कौन से हैं?

षट्तिला = तिल के 6 प्रयोग: (1) तिल उबटन (स्नान पूर्व), (2) तिल स्नान (काले तिल जल में), (3) तिल तर्पण (पितरों को), (4) तिल हवन (अग्नि में), (5) तिल दान (ब्राह्मण-दरिद्र को), (6) तिल भक्षण (लड्डू-खिचड़ी खाना)।

#षट्तिला#6 तिल प्रयोग#गरुड़ पुराण
तिल का महत्व और षट्तिला

गरुड़ पुराण में तिल के बारे में क्या कहा है?

गरुड़ पुराण: भगवान विष्णु ने गरुड़ को बताया — 'तिल मेरे पसीने से उत्पन्न हुए हैं। ये अत्यंत पवित्र हैं। श्वेत, काले या भूरे — समस्त पापों और दुष्ट शक्तियों का नाश करते हैं।'

#गरुड़ पुराण#विष्णु पसीना#तिल उत्पत्ति
तिल का महत्व और षट्तिला

मकर संक्रांति पर तिल का क्या महत्व है?

गरुड़ पुराण: तिल = भगवान विष्णु के पसीने से उत्पन्न। श्वेत, काले या भूरे — समस्त पापों और दुष्ट शक्तियों का नाश। मकर संक्रांति पर षट्तिला (तिल के 6 प्रयोग) अनिवार्य।

#तिल महत्व#गरुड़ पुराण#विष्णु पसीना
धातु दान

गरुड़ पुराण में स्वर्ण दान के बारे में क्या कहा गया है?

गरुड़ पुराण: स्वर्ण दान 'अष्ट महादान' में सर्वश्रेष्ठ है — इससे ब्रह्मा, ऋषि और धर्मराज संतुष्ट होते हैं, दाता यमलोक के कष्ट नहीं भोगता और सीधे स्वर्ग प्राप्त करता है।

#गरुड़ पुराण#अष्ट महादान#सुवर्ण दान
धातु दान

स्वर्ण दान से क्या फल मिलता है?

गरुड़ पुराण: स्वर्ण दान से यमलोक के कष्ट नहीं भोगने पड़ते, सीधे स्वर्ग मिलता है। सत्यलोक निवास के बाद पुनर्जन्म में रूपवान, धार्मिक, श्रीमान और पराक्रमी राजा का जन्म मिलता है।

#स्वर्ण दान#यमलोक मुक्ति#स्वर्ग प्राप्ति
रत्नों का दिव्य उद्गम

रत्नों का उद्गम कहाँ से हुआ?

गरुड़ पुराण और भागवत के अनुसार रत्नों का उद्गम दैत्यराज बलि के महायज्ञ से हुआ — वामन अवतार में भगवान के चरण स्पर्श से बलि का शरीर विभिन्न रत्नों में परिवर्तित होकर भू-मंडल पर बिखर गया।

#रत्न उद्गम#दैत्यराज बलि#गरुड़ पुराण
श्राद्ध अधिकार

क्या महिलाएं (बेटियां या पत्नियां) श्राद्ध और पिंडदान कर सकती हैं?

हाँ, गरुड़ पुराण के अनुसार अगर बेटा न हो तो पत्नी श्राद्ध कर सकती है। यदि परिवार में कोई पुरुष न हो, तो बेटियां (विवाहित या अविवाहित) भी पूरी विधि से श्राद्ध और पिंडदान कर सकती हैं।

#स्त्री श्राद्ध अधिकार#गरुड़ पुराण#उत्तराधिकार
जीवन एवं मृत्यु

पितरों का अपमान करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

पितर अपमान पर — कुड्म-पूतिमृत्तिक नरक, उग्रगंध नरक। यमदूत का उलाहना — 'पितरों का तर्पण क्यों नहीं किया?' इस जन्म में पितृदोष। 'पितृ-कर्म बहुत महत्वपूर्ण।'

#पितर अपमान#नरक#पितृदोष
जीवन एवं मृत्यु

प्रेत को कष्ट देने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

प्रेत को कष्ट देने पर — पितृदोष (इस जन्म में), नरक (मृत्यु के बाद)। 'पितरों का तर्पण न करना = पाप।' स्वयं भी प्रेत बनकर भटकना। संतान-रोग-व्यापार में हानि।

#प्रेत को कष्ट#नरक#पितृदोष
जीवन एवं मृत्यु

पिंडदान न करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

पिंडदान न करने वाले को — उग्रगंध नरक (गंदगी से भरा)। पितर को — कल्पान्त तक निर्जन वन में भटकन। 'पितरों का तर्पण न करना = यमदूत का उलाहना।' इस जन्म में पितृदोष।

#पिंडदान न करना#उग्रगंध#नरक
जीवन एवं मृत्यु

श्राद्ध न करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

श्राद्ध न करने वाले को — कुड्म-पूतिमृत्तिक नरक, पितृघातक का दंड। 'श्राद्ध न होने पर पितर प्रेत बना रहता है।' इस जन्म में पितृदोष — रोग, संतानहीनता, कलह।

#श्राद्ध न करना#नरक#पितर
जीवन एवं मृत्यु

पवित्र कर्मों को त्यागने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

पवित्र कर्म त्यागने पर — शाल्मी-वृक्ष (व्रत-तीर्थ त्याग), कुड्म, प्रेत योनि (ईश्वर-विमुखता), घोर नरक (देव-पूजा न करना)। यमदूत का उलाहना — 'तीर्थ-पूजा क्यों नहीं की?'

#पवित्र कर्म त्याग#नरक#व्रत-तीर्थ
जीवन एवं मृत्यु

अधार्मिक जीवन जीने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

अधार्मिक जीवन पर — कुड्म-कालसूत्र-पूतिमृत्तिक नरक, प्रेत योनि। 'तीर्थ-देव-अतिथि-पितर — सबकी उपेक्षा = नरक।' व्यसनों में लिप्त → नरक। पुनर्जन्म में अधम योनि।

#अधार्मिक जीवन#नरक#कुड्म
जीवन एवं मृत्यु

पाप पर पछतावा न करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

पश्चाताप न करने पर — एक नरक से दूसरे नरक, कोई राहत नहीं, मृत्युकाल का अवसर भी गँवाना। 'हजारों-लाखों वर्षों तक यातना।' घोर नरक — रौरव-महारौरव-कुंभीपाक।

#पछतावा न करना#दीर्घ नरक#कर्मफल
जीवन एवं मृत्यु

पाप छुपाने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

पाप छुपाने पर — कोई बचाव नहीं। श्रवण देवता सब चित्रगुप्त को बताते हैं। 'गुप्त पाप करने वाले वैतरणी में जाते हैं।' चित्रगुप्त का लेखा — सब कुछ दर्ज।

#पाप छुपाना#नरक#श्रवण देवता
जीवन एवं मृत्यु

निर्दोष को कष्ट देने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

निर्दोष को कष्ट देने पर — लोहशंकु नरक (कीलें), महारौरव, जलते डंडों से पिटाई। 'निर्दोष को कष्ट = आत्मा का पतन।' अहिंसा परम धर्म।

#निर्दोष कष्ट#लोहशंकु#महारौरव
जीवन एवं मृत्यु

दूसरों को कष्ट देने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

दूसरों को कष्ट देने पर — प्रेत योनि, घोर नरक। 'निर्बल को सताने वाला प्रेत योनि में।' जरूरतमंद की मदद न करना — नरक। वैतरणी में ऋण-दंड। इस जन्म में भी कष्ट।

#दूसरों को कष्ट#नरक#प्रेत योनि
जीवन एवं मृत्यु

छल करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

छल करने वाले को — तमिश्रम (पिटाई), गर्म रेत-अंगारे-काँटे, शाल्मी-वृक्ष (छल से धन)। 'मित्रघाती → गिद्ध योनि, क्रय में धोखा → उल्लू।'

#छल#तमिश्रम#असिपत्रवन
जीवन एवं मृत्यु

हिंसा करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

हिंसा करने वाले को — कुंभीपाक (खौलता तेल), क्रीमिक (कीट), सूलप्रोत (लोहे के शूल), लोहशंकु (लोहे की कीलें)। 'जो करोगे वही भोगोगे' — पुनर्जन्म में शिकार बनना।

#हिंसा#कुंभिपाक#क्रीमिक
जीवन एवं मृत्यु

ईर्ष्या करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

ईर्ष्यालु को — रौरव नरक (लालची-ईर्ष्यालु), संधांश नरक (निंदा पर नाखूनों से खरोंचना)। 'दूसरों के गुणों में दोष देखने वाले नरकगामी।' पुनर्जन्म में अभाव।

#ईर्ष्या#रौरव#संधांश
जीवन एवं मृत्यु

क्रोध करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

क्रोध करने वाले को — लोहशंकु (निर्दोष-हत्या पर), रौरव (पत्नी-पीड़न पर), सुघोर्म (अन्याय पर खौलता तेल)। पुनर्जन्म में उसी हिंसा का शिकार।

#क्रोध#लोहशंकु#रौरव
जीवन एवं मृत्यु

लोभ करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

लोभी को — रौरव नरक (लालची-ईर्ष्यालु), तमिश्रम (धन-हड़पने वाले), कुड्म (केवल अपना पेट भरने वाले)। पुनर्जन्म में दरिद्रता। 'लोभ → नरक → दरिद्रता।'

#लोभ#रौरव#तमिश्रम
जीवन एवं मृत्यु

अधर्म करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

अधर्म करने वाले को — अंधतामिस्त्र (परम अंधकार), विदीर्ण (अंग-भंग), तामिस्त्र-रौरव। 'अधर्म से परिवार पोषण → अंधतामिस्त्र।' व्यसनों में लिप्त → नरक।

#अधर्म#अंधतामिस्त्र#विदीर्ण
जीवन एवं मृत्यु

दान में दोष करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

दान में दोष पर — श्राद्ध में अपवित्र अन्न पर श्वेतकुष्ठ, गलत पंडित से श्राद्ध पर नरक। दान में अहंकार का फल अपूर्ण। 'निंदक-नशेड़ी पंडित से कर्म करवाने वाला नरकगामी।'

#दान में दोष#नरक#श्राद्ध
जीवन एवं मृत्यु

दान में कपट करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

दान में कपट पर — तमिश्रम नरक (पिटाई), ब्राह्मण-अतिक्रमण पर नरक+जन्मान्ध। 'प्रतिज्ञा करके दान न देने वाला सियार।' अशुद्ध पात्र से श्राद्ध — पितरों को नरक।

#दान में कपट#नरक#छल
जीवन एवं मृत्यु

दान न करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

दान न करने वाले को — कुड्म-कालसूत्र-पूतिमृत्तिक नरक, वैतरणी की गंदगी, यममार्ग पर भूख-प्यास। 'दान न देने से दरिद्रता → पाप → नरक → दरिद्रता' — यह दुष्चक्र।

#दान न करना#वैतरणी#कुड्म
जीवन एवं मृत्यु

ब्राह्मण को कष्ट देने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

ब्राह्मण को कष्ट देने पर — वैतरणी, अंगारे-गर्म रेत (ब्राह्मण-पीड़न), कुंभीपाक (ब्रह्महत्या)। 'ब्राह्मण को पैर मारने वाला लूला-लंगड़ा।' ब्राह्मण-कलह बढ़ाने वाला भी नरकगामी।

#ब्राह्मण कष्ट#वैतरणी#नरक
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