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ग्रन्थ

शिव पुराण(105)

शिव पुराण पर शास्त्रीय व्याख्या, कथा, अर्थ, शिक्षाएँ और प्रश्नोत्तर — कुल 105 प्रश्न उपलब्ध हैं।

लोक

भस्मासुर कथा के दो संस्करण क्यों मिलते हैं?

दो संस्करण इसलिए मिलते हैं क्योंकि भागवत में ब्रह्मचारी रूप है, जबकि लोकपरंपरा में मोहिनी रूप अधिक प्रसिद्ध हुआ।

#कथा संस्करण#श्रीमद्भागवत#शिव पुराण
लोक

भस्मासुर कथा शिव पुराण में कैसे आती है?

शिव पुराण और लोकपरंपरा में भस्मासुर कथा प्रायः मोहिनी रूप और नृत्य प्रसंग के साथ सुनाई जाती है।

#शिव पुराण#भस्मासुर#मोहिनी
लोक

शिव पुराण में अधोलोकों का वर्णन कैसे है?

शिव पुराण में अधोलोकों को अतल, वितल, सुतल, रसातल, तल, तलातल और पाताल के रूप में बताया गया है।

#शिव पुराण#उमा संहिता#अधोलोक
लोक

वायु पुराण और शिव पुराण में महातल का क्या वर्णन है?

वायु पुराण में महातल में हिरण्याक्ष और किर्मीर के नगर बताए गए हैं, जबकि शिव पुराण में इसे तल या महातल कहा गया है।

#वायु पुराण#शिव पुराण#महातल
लोक

महातल लोक का धरातल कैसा बताया गया है?

महातल का धरातल स्वर्ण और मणियों से जटित, अत्यंत भव्य और विलासी बताया गया है।

#महातल धरातल#मणि जटित#स्वर्ण
लोक

शिव पुराण में रसातल से कौन जुड़े हैं?

शिव पुराण में तारकासुर और उसके वंशजों को रसातल के विशिष्ट क्षेत्रों से जोड़ा गया है।

#शिव पुराण#रसातल#तारकासुर
लोक

शिव पुराण के अनुसार वैराज देवगण अमूर्त क्यों कहे गए हैं?

क्योंकि वैराज देवगणों का स्थूल पाञ्चभौतिक शरीर नहीं होता; वे अशरीरी चेतनामय स्वरूप हैं।

#शिव पुराण#वैराज#अमूर्त
लोक

शिव पुराण में तपोलोक की दूरी क्या बताई गई है?

शिव पुराण में तपोलोक जनलोक से आठ लाख योजन और सत्यलोक से अड़तालीस करोड़ योजन दूर बताया गया है।

#शिव पुराण#तपोलोक दूरी#जनलोक
लोक

वैराज देवगणों का शरीर कैसा होता है?

वैराज देवगणों का स्थूल शरीर नहीं होता; वे अमूर्त, अशरीरी, चेतनामय और ज्ञान-स्वरूप होते हैं।

#वैराज शरीर#अमूर्त#अशरीरी
लोक

शिव पुराण में सृष्टि के आरंभ में ब्रह्मा जी पर अविद्या का प्रभाव क्या दर्शाता है?

शिव पुराण का यह प्रसंग दर्शाता है — सृष्टि की इच्छा भी अविद्या है। सत्यलोक में भी जब तक सृष्टि-इच्छा है तब तक माया का सूक्ष्म प्रभाव रहता है। तप और शिव-कृपा से ही इसे पार किया जा सकता है।

#शिव पुराण#ब्रह्मा#अविद्या
लोक

शिव पुराण में सत्यलोक का क्या वर्णन है?

शिव पुराण में ब्रह्मा जी शिव की आज्ञा से सत्यलोक में हैं। यहाँ सृष्टि के आरंभ में अविद्या के पाँच आवरण का प्रसंग और तपोलोक से 84,000 योजन की दूरी का उल्लेख है।

#शिव पुराण#सत्यलोक#ब्रह्मा
लोक

विभिन्न पुराणों में अतल लोक के वर्णन में क्या अंतर है?

भागवत माया-हाटक रस पर, वायु पुराण निवासियों पर, गरुड़ पुराण कामुकता पर, शिव पुराण पूर्वजन्म के तप पर और मार्कंडेय असुरों के विश्राम पर केंद्रित है।

#विभिन्न पुराण#अंतर#भागवत
लोक

शिव पुराण में अतल लोक का क्या वर्णन है?

शिव पुराण के अनुसार अतल लोक के निवासियों को यह भोग-विलास उनके पूर्वजन्म की कठोर तपस्या के कारण मिला है। यहाँ श्रेष्ठ भोजन, संगीत और असीमित विलासिता है।

#शिव पुराण#अतल लोक#तपस्या
पूर्णाहुति और समापन

हवन की भस्म धारण करने से क्या फायदा है?

हवन की भस्म = अभेद्य रक्षा-कवच। यह मानव शरीर के अंतिम सत्य (राख) का प्रतीक। शिव पुराण: नित्य भस्म धारण करने वाले को संपूर्ण तीर्थों और यज्ञों का फल स्वतः प्राप्त होता है।

#भस्म धारण फायदा#रक्षा कवच#तीर्थ फल
व्रत-पूर्व तैयारी

नहाए बिना पूजा कैसे करें — मंत्र स्नान क्या है?

शिव पुराण: 'आपोहिष्ठा' मंत्र की तीन ऋचाएं पढ़ते हुए क्रमशः पैर-मस्तक-हृदय पर जल छिड़कें। यह मंत्र स्नान पूर्ण शारीरिक स्नान का विकल्प है। इसके बाद तीन बार आचमन करें।

#मंत्र स्नान#आपोहिष्ठा#बिना नहाए पूजा
कार्तिकेय और गणेश जन्म

शिव पुराण के अनुसार गणेश का जन्म कैसे हुआ?

शिव पुराण: पार्वती ने उबटन से बालक बनाया → शिव रोके गए → शिव ने मस्तक काटा → पार्वती का क्रोध → नंदी हाथी का सिर लाए → शिव ने जोड़कर जीवित किया और 'गणपति' नाम दिया। हाथी मस्तक = परम ज्ञान, पूर्व मस्तक = अहंकार नाश।

#गणेश जन्म#शिव पुराण#उबटन
जप संख्या

शिव पुराण के अनुसार 5 लाख और 10 लाख जप से क्या होता है?

शिव पुराण (2.1.14): 5 लाख जप = भगवान शिव के प्रत्यक्ष दर्शन और समस्त कामनाएं पूर्ण; 10 लाख जप = अकल्पनीय पुण्य। कलियुग में 5 लाख (चार गुना) जप अनुशंसित, सवा लाख न्यूनतम प्रामाणिक संख्या।

#5 लाख जप#10 लाख जप#शिव दर्शन
महामृत्युंजय मंत्र परिचय

शुक्राचार्य और महामृत्युंजय मंत्र का क्या संबंध है?

शिव पुराण सती खंड: शुक्राचार्य ने कठोर तपस्या से शिव से 'मृत-संजीवनी विद्या' प्राप्त की — इससे वे देवासुर संग्राम में मृत असुर सैनिकों को पुनः जीवित करते थे।

#शुक्राचार्य#मृत संजीवनी विद्या#असुर
108 मनकों का रहस्य

शिव पुराण में 108 मनकों की माला के बारे में क्या कहा गया है?

शिव पुराण की वायवीय संहिता में भगवान शिव स्वयं 108 मनकों की माला को सर्वश्रेष्ठ बताते हैं और इसे 'सर्वसिद्धिदायक' (सभी सिद्धियाँ देने वाली) कहा गया है।

#शिव पुराण#वायवीय संहिता#सर्वसिद्धिदायक
शास्त्रीय प्रमाण और फलश्रुति

शिव पुराण में रावण और पारद शिवलिंग का क्या संबंध है?

शिव पुराण की रुद्र संहिता के अनुसार लंकापति रावण — महान तांत्रिक और उच्च कोटि के रसायन शास्त्री — ने पारद शिवलिंग का निर्माण और पूजन करके भगवान शिव को प्रसन्न किया था।

#शिव पुराण#रुद्र संहिता#रावण
असितांग भैरव परिचय और स्वरूप

'भरणाद भैरव स्मृत' का क्या अर्थ है?

'भरणाद भैरव स्मृत' का अर्थ है 'भरण-पोषण करने वाला भैरव' — शिव पुराण के अनुसार भैरव केवल संहारक नहीं बल्कि सृष्टि के संरक्षक, पोषक और स्वास्थ्य के दाता हैं।

#भरणाद भैरव स्मृत#भरण पोषण#शिव पुराण
महेश्वर कवचम् परिचय और आधार

महेश्वर कवचम् किस ग्रंथ से लिया गया है?

महेश्वर कवचम् मुख्यतः शिवपुराण के रुद्र संहिता से जुड़ा है। तंत्रसार जैसे ग्रंथ भी सुरक्षा और रोग निवारण हेतु इस प्रकार के कवचों का उल्लेख करते हैं।

#शिवपुराण#रुद्र संहिता#तंत्रसार
फलश्रुति और लाभ

रुद्राभिषेक से मोक्ष मिलता है क्या?

हाँ, शिवपुराण के अनुसार 'लघुरुद्र' पाठ के साथ अभिषेक करने से मोक्ष प्राप्त होता है। तीर्थ जल से अभिषेक भी मोक्ष और सभी पापों के क्षय के लिए वर्णित है।

#मोक्ष प्राप्ति#लघुरुद्र#तीर्थ जल
फलश्रुति और लाभ

रुद्राभिषेक से अकाल मृत्यु से बचाव होता है क्या?

हाँ, शिवपुराण के अनुसार अकाल मृत्यु से बचाव के लिए रुद्राभिषेक अत्यंत आवश्यक है — घी से अभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र जाप अकाल मृत्यु से विशेष रक्षा करते हैं।

#अकाल मृत्यु#रुद्राभिषेक#महामृत्युंजय
रुद्राभिषेक परिचय और आधार

रुद्राभिषेक किन ग्रंथों पर आधारित है?

रुद्राभिषेक शिवपुराण, रुद्रसंहिता, कुमारसंहिता और आगमिक ग्रंथों पर आधारित है — यह मुख्यतः वेद मंत्रों (रुद्राष्टाध्यायी) द्वारा किया जाता है।

#शिवपुराण#रुद्रसंहिता#कुमारसंहिता
रुद्राभिषेक परिचय और आधार

रुद्राभिषेक क्या है?

रुद्राभिषेक शिवपुराण और आगमिक ग्रंथों में वर्णित शिवलिंग का विशेष अभिषेक अनुष्ठान है जो सुख-समृद्धि, रोग-निवारण और मनोकामना सिद्धि के लिए किया जाता है।

#रुद्राभिषेक#शिवलिंग अभिषेक#शिवपुराण
गौरी-शंकर तत्व और साधना का आधार

गौरी-शंकर साधना किन ग्रंथों पर आधारित है?

गौरी-शंकर साधना शिवपुराण, स्कंदपुराण, देवीभागवत, कौमार तांत्र, आगमिक ग्रंथों, रामचरितमानस और शाक्त आगम पर आधारित है।

#शास्त्रीय आधार#शिवपुराण#स्कंदपुराण
पुराणों में अर्धनारीश्वर का प्राकट्य

ब्रह्मा ने शिव से अर्धनारीश्वर रूप क्यों माँगा?

ब्रह्मा केवल पुरुष प्राणियों का सृजन कर पाए थे और सृष्टि विस्तार संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने शिव से प्रार्थना की — तब शिव ने अर्धनारीश्वर रूप दिखाया।

#ब्रह्मा#अर्धनारीश्वर#सृष्टि विस्तार
पुराणों में अर्धनारीश्वर का प्राकट्य

शिवपुराण में अर्धनारीश्वर का प्राकट्य कैसे हुआ?

शिवपुराण के अनुसार, जब ब्रह्मा सृष्टि विस्तार में असमर्थ हुए तब शिव ने अर्धनारीश्वर रूप दिखाया, जिससे ब्रह्मा को स्त्री-पुरुष दोनों की आवश्यकता का ज्ञान हुआ। (रुद्रसंहिता, प्रथम खण्ड)

#शिवपुराण#अर्धनारीश्वर प्राकट्य#ब्रह्मा
गुप्त रुद्राक्ष प्रयोग

बिना मंत्र और विधान के रुद्राक्ष धारण करने पर क्या चेतावनी दी गई है?

शिव पुराण के अनुसार बिना मंत्र के रुद्राक्ष धारण करने वाला मनुष्य घोर नरक में पड़ता है।

#चेतावनी#शिव पुराण#नरक
गुप्त रुद्राक्ष प्रयोग

१ मुखी रुद्राक्ष के प्रमाणित बीज-मंत्र क्या हैं?

१ मुखी रुद्राक्ष का प्रमाणित बीज मंत्र 'ॐ ह्रीं नमः' है।

#1 मुखी मंत्र#बीज मंत्र#शिव पुराण
पाशुपत अस्त्र साधना

पाशुपतास्त्र साधना के मुख्य संदर्भ ग्रंथ कौन से हैं?

शिव पुराण, महाभारत, अग्नि पुराण और रुद्रयामल तंत्र इसके मुख्य संदर्भ ग्रंथ हैं।

#ग्रंथ#संदर्भ#शिव पुराण
पाशुपत अस्त्र साधना

पाशुपतास्त्र साधना का मुख्य शास्त्रीय आधार क्या है?

यह साधना महाभारत, अग्नि पुराण, शिव पुराण और रुद्रयामल तंत्र जैसे प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है।

#शिव पुराण#महाभारत#अग्नि पुराण
पौराणिक कथा

भगवान कालभैरव की उत्पत्ति कैसे हुई? (ब्रह्मा के अहंकार की कथा)

शिवपुराण के अनुसार, जब ब्रह्मा जी के पांचवें मुख ने अहंकारवश भगवान शिव की निंदा की, तब शिव जी के क्रोध से कालभैरव की उत्पत्ति हुई थी।

#कालभैरव उत्पत्ति#शिवपुराण#ब्रह्मा का अहंकार
पूजा विधि

शिव पूजा के बाद क्षमा प्रार्थना कैसे करें?

पूजा के बाद हाथ जोड़कर शिव जी से प्रार्थना करें कि अज्ञानवश पूजा में जो भी कमी रह गई हो, उसे अपनी कृपा से क्षमा कर सफल बनाएं।

#क्षमा प्रार्थना#पूजा मंत्र#शिव पुराण
पूजा विधि

पार्थिव शिवलिंग की पूजा कैसे करते हैं?

शुद्ध मिट्टी, गोबर और भस्म से अंगूठे के आकार का शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा करना 'पार्थिव पूजन' कहलाता है। यह कलयुग में सबसे श्रेष्ठ पूजा है।

#पार्थिव शिवलिंग#मिट्टी का शिवलिंग#शिव पुराण
पूजा विधान और नियम

महोदरेश्वर लिंग के क्षेत्र में 'अन्नदान' का क्या तांत्रिक और धर्मशास्त्रीय महत्त्व है?

यहाँ अन्नदान उग्र शिव-गणों की 'भूत-शुद्धि' और तृप्ति करता है। भूखे संन्यासी की तृप्ति की तरंगें दानकर्ता के कर्म-बंधनों और प्रारब्ध को भस्म कर देती हैं। यह दान पूर्णतः गुप्त होना चाहिए।

#अन्नदान का महत्त्व#तांत्रिक रसायन#कर्म क्षय
तुलनात्मक अध्ययन

उज्जैन (अवन्तिका) और काशी स्थित महाकालेश्वर शिवलिंग में क्या समानता और अंतर है?

उज्जैन का महाकालेश्वर 'स्वयंभू ज्योतिर्लिंग' और दक्षिणमुखी है, जबकि काशी का महाकालेश्वर शिवगण 'महाकाल' द्वारा स्थापित 'सिद्ध लिंग' और पूर्वमुखी है। शास्त्रों के अनुसार दोनों की शक्ति और फल सर्वथा समतुल्य हैं।

#उज्जैन बनाम काशी#महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग#सिद्ध लिंग
देवी-देवता पूजन

केतकी का फूल शिव पूजा में क्यों नहीं चढ़ाते?

शिव पुराण के अनुसार केतकी के फूल ने ब्रह्माजी के पक्ष में झूठी गवाही दी थी। इसलिए भगवान शिव ने उसे श्राप दिया कि वह कभी उनकी पूजा में स्वीकार नहीं होगा। तभी से केतकी शिव पूजा में वर्जित है।

#केतकी#शिव पूजा#शिव पुराण
देवी-देवता एवं उपासना

शिव के 1008 नामों में सबसे प्रमुख कौन से हैं

शिव के 1008 नामों में सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं — महादेव, शम्भु, शंकर, नीलकंठ, त्र्यम्बक, पशुपति, महाकाल, विश्वनाथ, नटराज और गिरीश। 'ॐ नमः शिवाय' इन सभी नामों का सार है।

#शिव सहस्रनाम#शिव के नाम#महादेव
शिव पूजा नियम

शिवलिंग पर बिल्वपत्र तोड़ने के क्या नियम हैं शास्त्रों में?

बिल्व वृक्ष को प्रणाम कर मंत्र पढ़कर तोड़ें। वर्जित: सोमवार, चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या, संक्रांति काल। 12 बजे के बाद न तोड़ें। त्रिदलीय, अखंडित, छिद्ररहित होना अनिवार्य। 3 माह तक ताजा माना जाता है (शिव पुराण)। अन्य देवता का बेलपत्र शिव को न चढ़ाएं।

#बिल्वपत्र#बेलपत्र#तोड़ने के नियम
पुराण परिचय

शिव पुराण क्या है?

शिव पुराण वेदव्यास रचित 24,000 श्लोक, 7 संहिताओं का महापुराण है। इसमें ज्योतिर्लिंग कथा, सती-पार्वती कथा, शिव-पार्वती विवाह, गणेश-कार्तिकेय जन्म, हलाहल पान और शिव-विष्णु एकता का संदेश है।

#शिव पुराण#7 संहिता#24000 श्लोक
पुराण परिचय

शिव पुराण क्या है?

शिव पुराण वेदव्यास रचित 18 महापुराणों में से एक है — 24,000 श्लोक, 7 संहिताएं। इसमें शिव के सभी स्वरूप, सती-पार्वती कथा, गणेश जन्म, 12 ज्योतिर्लिंग माहात्म्य, दक्ष यज्ञ और हलाहल पान की कथाएं हैं। शिव-विष्णु एकता का संदेश इसकी विशेषता है।

#शिव पुराण#7 संहिता#शिव कथा
पुराण परिचय

शिव पुराण क्या है?

शिव पुराण 18 महापुराणों में से एक है, जिसमें 24,000 श्लोक हैं। इसमें 7 संहिताएं हैं — शिव पूजा विधि, 12 ज्योतिर्लिंग कथाएं, शिव-पार्वती विवाह और मोक्ष मार्ग का वर्णन है। वेदव्यास जी इसके रचयिता हैं।

#शिव पुराण#महापुराण#संहिता
विष्णु अस्त्र शस्त्र

शिव जी ने सुदर्शन चक्र विष्णु को क्यों दिया?

दैत्यों के अत्याचार से देवता विवश हो गए। विष्णु ने कैलाश पर शिव की तपस्या की और एक कमल की कमी पर अपना नेत्र अर्पित किया। इस अटूट भक्ति से प्रसन्न शिव ने दैत्य-संहार के लिए विष्णु को सुदर्शन चक्र भेंट किया।

#सुदर्शन चक्र#शिव विष्णु#कमल नेत्र
शिव पार्वती विवाह

शिव ने पार्वती से विवाह के लिए सुनटनर्तक रूप क्यों धारण किया?

शिव ने सुनटनर्तक (ब्राह्मण) रूप इसलिए धारण किया क्योंकि वे पार्वती के प्रेम और निश्चय की परीक्षा लेना चाहते थे। पार्वती ने शिव की निंदा सुनकर भी अपना निश्चय नहीं बदला, तब शिव प्रकट हुए और विवाह स्वीकार किया।

#सुनटनर्तक#शिव पार्वती परीक्षा#शिव विवाह
गणेश कथा

शिव पुराण के अनुसार गणेश जी का जन्म कैसे हुआ?

शिव पुराण के अनुसार माता पार्वती ने अपने शरीर पर लगे उबटन से एक बालक की प्रतिमा बनाई और अपनी दिव्य शक्ति से उसमें प्राण डाले। यही बालक गणेश जी कहलाए। पार्वती जी इसलिए एक विश्वसनीय गण चाहती थीं जो केवल उनकी आज्ञा माने।

#गणेश जन्म#शिव पुराण#पार्वती उबटन
शिव पूजा नियम

शिवलिंग पर बिल्वपत्र तोड़ने के क्या नियम हैं शास्त्रों में?

बिल्व वृक्ष को प्रणाम कर मंत्र पढ़कर तोड़ें। वर्जित: सोमवार, चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या, संक्रांति काल। 12 बजे के बाद न तोड़ें। त्रिदलीय, अखंडित, छिद्ररहित होना अनिवार्य। 3 माह तक ताजा माना जाता है (शिव पुराण)। अन्य देवता का बेलपत्र शिव को न चढ़ाएं।

#बिल्वपत्र#बेलपत्र#तोड़ने के नियम
शिव ग्रंथ

लिंग पुराण और शिव पुराण में क्या अंतर है?

शिव पुराण: 7 संहिताएं, ~24,000 श्लोक, कथा+पूजा प्रधान (शिव विवाह, दक्ष यज्ञ, ज्योतिर्लिंग)। लिंग पुराण: 2 भाग, ~11,000 श्लोक, शिवलिंग दर्शन+ब्रह्मांड विज्ञान (28 शिव अवतार)। शिव पुराण = भक्तिमार्गी, लिंग पुराण = ज्ञानमार्गी।

#लिंग पुराण#शिव पुराण#अंतर
शिव अवतार

शिव के ब्रह्मचारी अवतार का क्या उद्देश्य था?

शिव के ब्रह्मचारी अवतार का उद्देश्य पार्वती के प्रेम और निष्ठा की परीक्षा लेना था। शिव ने ब्रह्मचारी बनकर स्वयं की निंदा की — पार्वती अडिग रहीं। तब शिव प्रकट हुए और पार्वती का सच्चा प्रेम स्वीकार किया।

#ब्रह्मचारी अवतार#शिव अवतार#पार्वती परीक्षा
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