दिव्यास्त्रगरुड़ पुराण में यमदण्ड का क्या अर्थ है?गरुड़ पुराण में यमदण्ड का अर्थ किसी शस्त्र से नहीं बल्कि मृत्यु के बाद पापी आत्मा को भोगनी पड़ने वाली दण्ड-प्रक्रिया से है। यह कर्मफल के अटल नियम का प्रतीक है।#गरुड़ पुराण#यमदण्ड#कर्मफल
माहेश्वर योगबड़े योगी भी स्वर्ग और नरक में क्यों जाते हैं?बड़े योगी भी नानाविध कर्म करके अपने कर्मानुसार स्वर्ग और नरक में जाते हैं।#योगी#कर्म#स्वर्ग
नरक और महादेवऋषियों ने नरक के बारे में क्या पूछा?ऋषियों ने पूछा कि किन कर्मों को करने या न करने से मनुष्य नरक को प्राप्त होते हैं।#ऋषि प्रश्न#नरक#कर्म
नरक और महादेव28 करोड़ नरक किसके लिए बताए गए हैं?28 करोड़ नरक उन पापी प्राणियों के लिए बताए गए हैं जो महादेव का आश्रय ग्रहण नहीं करते और अपने कर्मों के फल भोगते हैं।#28 करोड़ नरक#नरक#पापी
शंकर महिमाशिव के आश्रित पापी नरक में क्यों नहीं जाते?क्योंकि शंकरजी का आश्रय लेने वाले मुक्ति पाते हैं और शिवजी के शाश्वत पद को प्राप्त होते हैं।#शिव आश्रय#पापी#नरक
शंकर महिमाशिव की शरण लेने से क्या फल मिलता है?शंकर की शरण लेने वाले मुक्ति प्राप्त करते हैं और शिवजी का शाश्वत पद पा जाते हैं।#शिव शरण#मुक्ति#शंकर
कर्म फलनरक और कर्मानुसार दंड का वर्णन किसके साथ आता है?नरक और कर्मानुसार दंड का वर्णन स्वर्ग-नरक, दान, यमपुरी, पंचाक्षर मन्त्र और रुद्रमाहात्म्य के साथ आता है।#नरक#कर्मानुसार दंड#स्वर्ग
श्रीमद्भागवतपुत्र मोह क्यों छोड़ना चाहिए?गोकर्ण कहते हैं कि पुत्र-मोह अज्ञान है, मोह से नरक की प्राप्ति होती है और शरीर भी नश्वर है।#पुत्र मोह#गोकर्ण#आत्मदेव
लोकश्राद्ध न करने से नरक मिलता है क्या?हाँ, शास्त्रों में ऐसा कहा गया है।#श्राद्ध लोप#नरक#विष्णु स्मृति
लोकश्राद्ध न करने से नरक क्यों मिलता है?सामर्थ्य होते हुए श्राद्ध न करना नरक का कारण बताया गया है।#नरक#विष्णु स्मृति#श्राद्ध न करना
लोकश्राद्ध न करने से क्या होता है?श्राद्ध न करने से पितृ दोष, वंश बाधा और नरक का फल बताया गया है।#श्राद्ध न करना#पितृ दोष#नरक
लोकमहापातक करने वाला प्रेत क्यों बनता है?महापातक करने वाला जीव पहले नरक यातना भोगता है और फिर तामसिक कर्मों के कारण प्रेत योनि में आता है।#महापातक#प्रेत योनि#नरक
लोकविष्णु पुराण में नरकों का वर्णन कैसे है?विष्णु पुराण में पराशर मुनि रौरव, रोध, सूकर, तप्तकुण्ड आदि नरकों और उनके पाप-दंड का वर्णन करते हैं।#विष्णु पुराण#नरक#दंड विधान
लोककालसूत्र नरक इतना भयानक क्यों है?कालसूत्र नरक में माता-पिता या ब्राह्मणों से द्रोह करने वाले पापी को दहकते तांबे के मैदान में नंगा दौड़ाया जाता है।#कालसूत्र नरक#नरक#माता पिता द्रोह
लोककुम्भीपाक नरक किस पाप का फल है?कुम्भीपाक नरक जीवित पशु-पक्षियों को स्वाद के लिए पकाकर खाने वालों के लिए है।#कुम्भीपाक नरक#नरक#पशु हत्या
लोकअंधतामिस्र नरक में किसे भेजा जाता है?अंधतामिस्र नरक छल-कपट से दूसरे की पत्नी या संपत्ति भोगने वालों के लिए है।#अंधतामिस्र नरक#नरक#भागवत पुराण
लोकतामिस्र नरक किस पाप के लिए है?तामिस्र नरक दूसरों का धन, स्त्री या संपत्ति छीनने वालों के लिए है, जहाँ यमदूत कालपाश में बांधकर पीटते हैं।#तामिस्र नरक#नरक#भागवत पुराण
लोकश्रीमद्भागवत पुराण में कितने नरक बताए गए हैं?श्रीमद्भागवत पुराण में २८ प्रमुख नरकों का वर्णन है, जहाँ पापों के अनुसार दंड मिलता है।#श्रीमद्भागवत पुराण#28 नरक#नरक
लोकयमपुरी का दक्षिण द्वार भयानक क्यों है?दक्षिण द्वार पापियों का अंधकारमय मार्ग है, जो सिंहों, भेड़ियों और विषैले सर्पों से घिरा रहता है।#दक्षिण द्वार#यमपुरी#पापी
लोकयमपुरी का दक्षिण द्वार किसके लिए है?दक्षिण द्वार पापियों के लिए है, जहाँ से झूठ, परस्त्रीगमन, भ्रूणहत्या और अन्य पाप करने वालों को यमदूत ले जाते हैं।#यमपुरी दक्षिण द्वार#पापी आत्मा#यमलोक
लोकयातना-देह क्या है?यातना-देह वह सूक्ष्म शरीर है जिससे आत्मा नरक की यातनाएँ भोगती है, पर वह आग या शस्त्र से नष्ट नहीं होती।#यातना देह#सूक्ष्म शरीर#नरक
लोकयमलोक और नरक में क्या संबंध है?यमलोक कर्मों का न्याय-स्थान है; नरक वे दंड-स्थल हैं जहाँ पापी आत्माएँ यमराज के निर्णय के बाद यातना भोगती हैं।#यमलोक#नरक#भागवत पुराण
लोकहाटकेश्वर शिवलिंग के नीचे क्या बताया गया है?हाटकेश्वर शिवलिंग और पाताल के नीचे अथाह जलराशि और उसके नीचे पचपन करोड़ घोर नरक बताए गए हैं।#हाटकेश्वर शिवलिंग नीचे#नरक#पाताल
मरणोपरांत आत्मा यात्राआत्मा जन्म-मृत्यु के चक्र में कब लौटती है?कर्मों का भोग पूरा होने के बाद आत्मा पुनः जन्म-मृत्यु के चक्र में लौटती है।#जन्म मृत्यु चक्र#कर्म भोग#नरक
मरणोपरांत आत्मा यात्रानरक भोगने के बाद आत्मा का क्या होता है?नरक भोगने के बाद आत्मा नया शरीर लेने के लिए जन्म-मृत्यु के चक्र में लौट आती है।#नरक#आत्मा#जन्म मृत्यु चक्र
मरणोपरांत आत्मा यात्रापापी आत्मा को कहाँ भेजा जाता है?पापी आत्मा को पापों के अनुसार कुम्भीपाक, रौरव आदि नरकों में भेजा जाता है।#पापी आत्मा#नरक#कुम्भीपाक
मरणोपरांत आत्मा यात्राभूमि दान नरक से कैसे बचाता है?भूमि दान नरक की यातनाओं से पूर्ण रक्षा करने वाला माना गया है।#भूमि दान#नरक#दान
मरणोपरांत आत्मा यात्रायातना देह नष्ट क्यों नहीं होती?यातना देह कष्ट सहने के लिए बनी होती है; वह पीड़ा अनुभव करती है लेकिन नष्ट नहीं होती।#यातना देह#नरक#पीड़ा
मरणोपरांत आत्मा यात्रायातना देह क्या होती है?यातना देह पापी आत्मा को कष्ट सहने के लिए मिलने वाला ऐसा शरीर है जो पीड़ा पाता है पर नष्ट नहीं होता।#यातना देह#पापी जीव#यममार्ग
लोकअतल लोक और नरक में मूलभूत अंतर क्या है?अतल भोग का स्थान है — स्वर्ग से अधिक सुख, रोग-बुढ़ापा नहीं। नरक दंड का स्थान है — यातना और पीड़ा। नरक पातालों से भी नीचे है।#अतल लोक#नरक#अंतर
लोकपाताल और नरक में क्या फर्क है?पाताल भोग-विलास का स्थान है जहाँ स्वर्ग से भी अधिक सुख है। नरक दंड का स्थान है जहाँ पापियों को यातना मिलती है। नरक पातालों से भी नीचे है।#पाताल#नरक#फर्क
लोकअतल लोक नरक है क्या?नहीं, अतल लोक नरक नहीं है। यह 'बिल-स्वर्ग' है जहाँ स्वर्ग से भी अधिक भौतिक सुख हैं। नरक इन पातालों से भी नीचे गर्भोदक सागर के ऊपर है।#अतल लोक#नरक#फर्क
गुप्त रुद्राक्ष प्रयोगबिना मंत्र और विधान के रुद्राक्ष धारण करने पर क्या चेतावनी दी गई है?शिव पुराण के अनुसार बिना मंत्र के रुद्राक्ष धारण करने वाला मनुष्य घोर नरक में पड़ता है।#चेतावनी#शिव पुराण#नरक
जीवन एवं मृत्युपितरों का अपमान करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?पितर अपमान पर — कुड्म-पूतिमृत्तिक नरक, उग्रगंध नरक। यमदूत का उलाहना — 'पितरों का तर्पण क्यों नहीं किया?' इस जन्म में पितृदोष। 'पितृ-कर्म बहुत महत्वपूर्ण।'#पितर अपमान#नरक#पितृदोष
जीवन एवं मृत्युप्रेत को कष्ट देने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?प्रेत को कष्ट देने पर — पितृदोष (इस जन्म में), नरक (मृत्यु के बाद)। 'पितरों का तर्पण न करना = पाप।' स्वयं भी प्रेत बनकर भटकना। संतान-रोग-व्यापार में हानि।#प्रेत को कष्ट#नरक#पितृदोष
जीवन एवं मृत्युपिंडदान न करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?पिंडदान न करने वाले को — उग्रगंध नरक (गंदगी से भरा)। पितर को — कल्पान्त तक निर्जन वन में भटकन। 'पितरों का तर्पण न करना = यमदूत का उलाहना।' इस जन्म में पितृदोष।#पिंडदान न करना#उग्रगंध#नरक
जीवन एवं मृत्युश्राद्ध न करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?श्राद्ध न करने वाले को — कुड्म-पूतिमृत्तिक नरक, पितृघातक का दंड। 'श्राद्ध न होने पर पितर प्रेत बना रहता है।' इस जन्म में पितृदोष — रोग, संतानहीनता, कलह।#श्राद्ध न करना#नरक#पितर
जीवन एवं मृत्युपवित्र कर्मों को त्यागने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?पवित्र कर्म त्यागने पर — शाल्मी-वृक्ष (व्रत-तीर्थ त्याग), कुड्म, प्रेत योनि (ईश्वर-विमुखता), घोर नरक (देव-पूजा न करना)। यमदूत का उलाहना — 'तीर्थ-पूजा क्यों नहीं की?'#पवित्र कर्म त्याग#नरक#व्रत-तीर्थ
जीवन एवं मृत्युअधार्मिक जीवन जीने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?अधार्मिक जीवन पर — कुड्म-कालसूत्र-पूतिमृत्तिक नरक, प्रेत योनि। 'तीर्थ-देव-अतिथि-पितर — सबकी उपेक्षा = नरक।' व्यसनों में लिप्त → नरक। पुनर्जन्म में अधम योनि।#अधार्मिक जीवन#नरक#कुड्म
जीवन एवं मृत्युपाप छुपाने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?पाप छुपाने पर — कोई बचाव नहीं। श्रवण देवता सब चित्रगुप्त को बताते हैं। 'गुप्त पाप करने वाले वैतरणी में जाते हैं।' चित्रगुप्त का लेखा — सब कुछ दर्ज।#पाप छुपाना#नरक#श्रवण देवता
जीवन एवं मृत्युदूसरों को कष्ट देने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?दूसरों को कष्ट देने पर — प्रेत योनि, घोर नरक। 'निर्बल को सताने वाला प्रेत योनि में।' जरूरतमंद की मदद न करना — नरक। वैतरणी में ऋण-दंड। इस जन्म में भी कष्ट।#दूसरों को कष्ट#नरक#प्रेत योनि
जीवन एवं मृत्युदान में दोष करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?दान में दोष पर — श्राद्ध में अपवित्र अन्न पर श्वेतकुष्ठ, गलत पंडित से श्राद्ध पर नरक। दान में अहंकार का फल अपूर्ण। 'निंदक-नशेड़ी पंडित से कर्म करवाने वाला नरकगामी।'#दान में दोष#नरक#श्राद्ध
जीवन एवं मृत्युदान में कपट करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?दान में कपट पर — तमिश्रम नरक (पिटाई), ब्राह्मण-अतिक्रमण पर नरक+जन्मान्ध। 'प्रतिज्ञा करके दान न देने वाला सियार।' अशुद्ध पात्र से श्राद्ध — पितरों को नरक।#दान में कपट#नरक#छल
जीवन एवं मृत्युब्राह्मण को कष्ट देने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?ब्राह्मण को कष्ट देने पर — वैतरणी, अंगारे-गर्म रेत (ब्राह्मण-पीड़न), कुंभीपाक (ब्रह्महत्या)। 'ब्राह्मण को पैर मारने वाला लूला-लंगड़ा।' ब्राह्मण-कलह बढ़ाने वाला भी नरकगामी।#ब्राह्मण कष्ट#वैतरणी#नरक
जीवन एवं मृत्युअतिथि का अपमान करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?अतिथि-अपमान पर — घोर नरक, वैतरणी। यमदूत का उलाहना — 'अतिथि को नमस्कार नहीं किया।' 'भूखे अतिथि को लौटाने वाला नरकगामी।' बुजुर्ग-अपमान पर आग में खाल निकलने तक दंड।#अतिथि अपमान#नरक#यमदूत
जीवन एवं मृत्युमाता-पिता का अपमान करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?माता-पिता अपमान पर — घोर नरक, इस जन्म में दुर्भाग्य-रोग। पुनर्जन्म में गर्भ में ही मृत्यु। 'माता-पिता देवताओं के समान — उनका अपमान = देव-अपमान।'#माता-पिता अपमान#नरक#गर्भ में मृत्यु
जीवन एवं मृत्युशास्त्र का अपमान करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?शास्त्र अपमान पर — 'वेद-निन्दा करने वाले नास्तिक नरक में गिरते हैं।' विदीर्ण नरक (अंग-भंग), निर्भक्षण नरक (बीच से चीरना)। शास्त्र-विरोध = धर्म-विरोध।#शास्त्र अपमान#नरक#नास्तिक