विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में दान से प्रेत को मिलने वाले लाभों का विस्तृत वर्णन है।
जीव का स्वयं का दान — जिसने जीवन में दान किया हो, उसे यममार्ग पर उसी का फल मिलता है। वह भूखा-प्यासा नहीं रहता, यमदूत सौम्य रहते हैं, यात्रा में सहायता मिलती है।
परिजनों का दान — मृत्यु के बाद परिजन जो पिंडदान करते हैं वह प्रेत का 'भोजन' है। गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'दान के प्रभाव से देवताओं से पूजित होकर वह जीव स्वर्ग को प्राप्त करता है।'
स्वर्णदान से प्रेत उद्धार — गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय में सीधे कहा गया है — 'प्रेत के उद्धार के लिए स्वर्णदान करना चाहिए।'
गोदान से वैतरणी पार — जिस प्रेत के नाम पर गोदान होता है, उसे वैतरणी पार करने में सहायता मिलती है।
प्रेत घट दान से मुक्ति — यह विशेष दान प्रेत को योनि से मुक्त करता है।
श्राद्ध में दान — पितृपक्ष में और वार्षिक श्राद्ध में किए गए दान से प्रेत और पितर दोनों तृप्त होते हैं और उनकी मुक्ति का मार्ग खुलता है।





