विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के बारहवें अध्याय 'एकादशाहकृत्य-निरूपण' में एकादशाह (ग्यारहवें दिन) के कर्मों का विस्तृत वर्णन है।
मृत-शय्यादान — प्रेत की प्रतिमा से युक्त और सभी उपकरणों से समन्वित 'प्रेतशय्या' ब्राह्मण आचार्य को प्रदान की जाती है।
गोदान — 'तदनन्तर पितरों को तारने के लिए गोदान करें।' गाय का दान करते समय वैतरणी-धेनु की प्रार्थना की जाती है।
घटदान — घट (घड़े) का दान।
अष्टमहादान — तिल, स्वर्ण, नमक, सप्तधान्य, जलपात्र, लोहा, रुई और पादुका — इन आठ महादानों का अर्पण।
वृषोत्सर्ग — नील वृष (बैल) को विधिपूर्वक छोड़ना। गरुड़ पुराण में — 'जो पुत्र वृषोत्सर्ग करता है वही पुत्र है।'
ब्राह्मण-भोजन — 'तदनन्तर विविध प्रकार के सुस्वादु मिष्टान्नों से ब्राह्मणों को भोजन कराएँ और फिर दक्षिणा सहित अन्न एवं जलयुक्त बारह घट प्रदान करें।'
सपिंडीकरण — 'ग्यारहवें दिन श्राद्ध करके सपिण्डीकरण करना चाहिए।'
सूतक-मुक्ति — 'सूतक बीत जाने पर शय्यादान और पददान करना चाहिए।'





