विस्तृत उत्तर
कर्ण को भार्गवास्त्र भगवान परशुराम ने दिया था — यद्यपि यह एक छलपूर्ण शिक्षा थी।
कर्ण की समस्या — द्रोणाचार्य ने कर्ण को सूतपुत्र होने के कारण शिक्षा देने से मना किया था। परशुराम केवल ब्राह्मणों को ही दिव्य अस्त्र-विद्या देते थे।
छल से शिक्षा — कर्ण ने ब्राह्मण का वेश धारण करके परशुराम से शिक्षा ली। वर्षों तक परशुराम ने उन्हें समस्त दिव्यास्त्रों की विद्या दी जिनमें भार्गवास्त्र भी था।
शाप — जब एक बार परशुराम कर्ण की जंघा पर सिर रखकर सो रहे थे और एक कीड़ा कर्ण को काटने लगा, तब कर्ण ने गुरु की नींद न टूटे इसलिए दर्द सहते रहे। इससे परशुराम ने जान लिया कि यह ब्राह्मण नहीं हो सकता। सत्य जानकर उन्होंने शाप दिया — 'जब तुम्हें मेरी विद्या की सबसे अधिक आवश्यकता होगी उस समय यह भूल जाएगी।' यह शाप भार्गवास्त्र नहीं बल्कि दिव्य मंत्र-ज्ञान (विशेषतः ब्रह्मास्त्र) पर लागू था।





