विस्तृत उत्तर
महेश्वर कवचम् के श्लोक 5 में 'भूतेश' शब्द का प्रयोग हुआ है:
भूतेशः सकलाङ्गानि पाश-त्रिशूल-खड्ग-वज्रधरः सदा रक्षतु माम्।
भूतेश का अर्थ है 'भूतों के स्वामी' — वे जो समस्त प्राणियों और तत्वों के स्वामी हैं।
सरल अर्थ: भूतों के स्वामी (भूतेश), जो पाश, त्रिशूल, खड्ग और वज्र जैसे दिव्य अस्त्रों को धारण करते हैं, वे मेरे सभी अंगों की सदैव रक्षा करें।





